आईसीयू में हर साल दो करोड़ लोग मर जाते हैं सेप्सिस से

News18India.com
Updated: February 6, 2016, 9:10 PM IST
आईसीयू में हर साल दो करोड़ लोग मर जाते हैं सेप्सिस से
दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के गलत तरीके और डॉक्टरों की सलाह के बिना लेने के कारण लोगों की प्रतिरोधकता कम होने से सेप्सिस के मामले बढ़ रहे हैं।

दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के गलत तरीके और डॉक्टरों की सलाह के बिना लेने के कारण लोगों की प्रतिरोधकता कम होने से सेप्सिस के मामले बढ़ रहे हैं।

  • Share this:
आगरा। लोगों की प्रतिरोधकता के लगातार कम होने से सेप्सिस (अंदरूनी रूप से किसी भी अंग में इनफेक्शन होना) दुनिया में खतरनाक तरीके से मौत का कारण बन रहा है। लोगों में जागरूकता का न होना इसके बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। इजरायल के डॉ. चार्ल्स स्प्रंग ने बताया कि दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के गलत तरीके और डॉक्टरों की सलाह के बिना लेने के कारण लोगों की प्रतिरोधकता कम होने से सेप्सिस के मामले बढ़ रहे हैं।

क्रिटीकेयर वैश्विक सम्मेलन-16 में भाग लेने जर्मनी से आए डॉ. कोनरेड रेनहार्ट (ग्लोबल सेप्सिस एनालिसिस के चेयरमैन) ने बताया कि सेप्सिस आईसीयू में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ भी चिंतित है क्योंकि दुनिया में हर साल आईसीयू में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण (दो करोड़ लोग मर जाते हैं हर साल) सेप्सिस है। मध्यम और कम आयवर्ग के देशों में यह समस्या अधिक है।

सामान्य बुखार में खुद दवा लेने पर यानि सही इलाज न मिलने पर आगे चलकर यह लापरवाही सेप्सिस में बदल सकती है। इसलिए भारत जैसे देशों के लोगों को खुद चिकित्सक बनकर दवा लेने के बजाय एक्सपर्ट की सलाह से ही दवा लेनी चाहिए। विशेषकर एंटीबायोटिक लेने के मामलों में, जो लगातार और गलत तरीके से लेने पर व्यक्ति की प्रतिरोधकता को प्रभावित करती है।

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए वेलनेस से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 6, 2016, 5:59 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...