2022 तक हर महीने स्तनपान जागरुकता सप्ताह मनाएगा स्वास्थ्य मंत्रालय

डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर देशों में शिशु के जन्म के शुरुआती 6 महीनों में स्तनपान कराने की दर 50 फीसदी से भी नीचे आ गई है

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 12:29 PM IST
2022 तक हर महीने स्तनपान जागरुकता सप्ताह मनाएगा स्वास्थ्य मंत्रालय
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर देशों में शिशु के जन्म के शुरुआती 6 महीनों में स्तनपान कराने की दर 50 फीसदी से भी नीचे आ गई है
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Updated: August 9, 2019, 12:29 PM IST
मां बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है. और इससे जुड़े वो सारे अनुभव खास हैं जो आपको मां बनने की अनुभूति कराती है. इन्हीं अनुभवों में से एक है ब्रेस्टफीडिंग.

अगस्त महीने के पहले हफ्ते यानी 1 अगस्त से 7 अगस्त तक 'ब्रेस्टफीडिंग अवेयरनेस वीक' मनाया जाता है. इस वीक का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं को उनके स्तनपान संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूक करना है. लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बार यह फैसला किया है कि सरकार साल 2022 तक हर महीने के पहले सप्ताह में स्तनपान पर जागरूकता फैलाने और उसके फायदों के बारे में बताने के लिए गतिविधियां आयोजित कराएगी.

केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने विश्व स्तनपान सप्ताह-2019 के मौके पर एक कार्यक्रम में गुरुवार को कहा, 'स्तनपान को केवल महिलाओं और मां से जुड़े मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. चलिए, इसे साझा सामाजिक जिम्मेदारी बनाएं जहां ना केवल मां बल्कि उसके परिवार, समुदाय और कार्यस्थल में हर कोई एक अच्छा माहौल बनाकर उनका सहयोग करे.'

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्तनपान और शिशु तथा बच्चों के आहार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मिले डेटा पर एक रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया. उन्होंने कहा, 'यह पहली दवा है जो मां और बच्चे दोनों की रक्षा करती है. अध्ययनों में उल्लेख किया गया है कि कैसे स्तनपान बच्चों में बीमारियों तथा मौतों को और महिलाओं में भविष्य में स्तन और गर्भाशय के कैंसर को होने से रोक सकता है.'

स्तनपान कराने की दर 50 फीसदी से भी नीचे 

उन्होंने कहा, 'जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने से नवजात शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है जबकि छह महीने तक स्तनपान कराने से शिशुओं और बच्चों में डायरिया और निमोनिया के मामले कम किए जा सकते हैं.'

डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर देशों में शिशु के जन्म के शुरुआती 6 महीनों में स्तनपान कराने की दर 50 फीसदी से भी नीचे आ गई है.
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जबकी एक स्वस्थ्य शिशु के लिए स्तनपान कराना बेहद जरूरी है. मां का दूध मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बायोएक्टिव घटकों, वृद्धि के कारकों और रोग प्रतिरोधक घटकों का एक मिश्रण होता है. यह मिश्रण एक जैविक द्रव पदार्थ होता है जिससे शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है. जिन बच्चों को मां का दूध नहीं दिया जाता है, उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है.

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First published: August 9, 2019, 12:29 PM IST
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