डिप्रेशन को डायग्नोज करने में मददगार है हृदय गति, जानें कैसे

डिप्रेशन को डायग्नोज करने में मददगार है हृदय गति, जानें कैसे
ऐंग्जाइटी और डिप्रेशन के जैव रासायनिक मार्कर्स काफी अलग-अलग हैं.

भारत (India) के साथ ही दुनिया के बाकी हिस्सों में भी डिप्रेशन (Depression) के बढ़ते मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में इस चुनौती से उबरने के लिए न केवल बेहतर हेल्थकेयर सपोर्ट की जरूरत है.

  • Last Updated: September 17, 2020, 6:59 AM IST
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भारतीय राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-2016 के नतीजों से पता चलता है कि लगभग 15 प्रतिशत भारतीय वयस्कों को एक या अधिक मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) समस्याओं के लिए सक्रिय हस्तक्षेप की आवश्यकता है. इतना ही नहीं, भारत के हर 20 में से 1 नागरिक को डिप्रेशन (Depression) की समस्या भी है. भारत के साथ ही दुनिया के बाकी हिस्सों में भी डिप्रेशन के बढ़ते मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में इस चुनौती से उबरने के लिए न केवल बेहतर हेल्थकेयर सपोर्ट की जरूरत है बल्कि डिप्रेशन और अन्य मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर और अधिक रिसर्च करने की भी जरूरत है. यूरोपियन कॉलेज ऑफ न्यूरोसाइकोफार्माकोलॉजी के वर्चुअल कांग्रेस के दौरान 2 नई रिसर्च स्टडीज को पेश किया गया जो डिप्रेशन के बारे में बेहतरीन और अग्रणी योगदान दे सकती है. इन 2 स्टडीज के बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं.

24 घंटे हृदय गति पर नजर रखने से डिप्रेशन को डायग्नोज करने में मदद मिल सकती है
वैसे तो वैज्ञानिकों को पिछले कुछ समय से यह बात पता है कि हृदय गति का डिप्रेशन से लिंक है लेकिन इसका सटीक कारण क्या है इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है. मुख्य रूप से देखा जाए तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हार्ट रेट में उतार-चढ़ाव जल्दी-जल्दी होता है लेकिन डिप्रेशन को डायग्नोज करने, उसका अध्ययन करने और थेरेपी में लंबा समय लगता है. इस प्रकार यह विश्लेषण करना मुश्किल होता है कि ये दोनों चीजें यानी हार्ट रेट और डिप्रेशन एक निश्चित अवधि में एक दूसरे से कैसे जुड़े हैं. जर्मनी के गोएथे विश्वविद्यालय और बेल्जियम के केयू ल्यूवेन के शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक तरीका खोजा.
शोधकर्ताओं ने लगातार कई दिनों और रातों तक डिप्रेशन के मरीजों के हार्ट रेट को रेजिस्टर किया और रैपिड-ऐक्शन एंटीडिप्रेसेंट दवा केटामाइन का उपयोग किया, जो लक्षणों में लगभग तुरंत उभार ला सकती है. इसने शोधकर्ताओं को यह देखने का मौका दिया कि कैसे औसत आराम हार्ट रेट में बदलाव कर सकता है और इसका सीधा असर व्यक्ति के मूड में होने वाले परिवर्तन में देखने को मिलता है.



रिसर्च टीम ने पाया कि डिप्रेशन से पीड़ित मरीजों में बेसलाइन हार्ट रेट (सामान्य रेस्टिंग हार्ट रेट) अधिक होता है और हार्ट रेट में होने वाला परिवर्तन कम होता है. औसतन, डिप्रेशन के मरीजों की हृदय गति डिप्रेशन न होने वाले लोगों की तुलना में 10 से 15 बीट प्रति मिनट अधिक थी. केटामाइन उपचार के बाद हृदय की दर के माप से पता चला है कि डिप्रेशन से पीड़ित मरीजों की हृदय गति और हृदय की दर में उतार-चढ़ाव दोनों बदल गए और बिना डिप्रेशन वाले लोगों के हार्ट रेट के करीब पहुंच गए.

इस अध्ययन का अंतिम परिणाम यह खोज थी कि 24 घंटे की हार्ट रेट का उपयोग अब डिप्रेशन के लिए बायोमार्कर के रूप में किया जा सकता है. इसका मतलब यह है कि अब सिर्फ एक मिनी-ईसीजी के माध्यम से 24 घंटे तक आपकी हृदय गति को मापकर, वैज्ञानिक 90 प्रतिशत सटीकता के साथ यह बता सकते हैं कि वर्तमान में किसी व्यक्ति को डिप्रेशन है या नहीं.

चिंता नहीं, डिप्रेशन मेटाबॉलिक परिवर्तन और इन्फ्लेमेशन से जुड़ा है
डिप्रेशन और ऐंग्जाइटी यानी चिंता के कुछ समान जोखिम कारक और लक्षण हैं और अक्सर एक ही दवाओं के साथ इनका इलाज भी किया जाता है. मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दिखाया है कि कैसे डिप्रेशन से जुड़ी मुख्य बीमारी वाले लगभग 50 प्रतिशत मरीजों को चिंता का भी सामना करना पड़ता है, बावजूद इसके ये दोनों बीमारियां अलग-अलग वर्गीकृत होती हैं. नीदरलैंड्स स्टडी ऑफ ऐंग्जाइटी एंड डिप्रेशन के शोधकर्ता अब पहली बार दोनों बीमारियों के बीच जैव रासायनिक अंतर दिखाने में सक्षम हुए हैं.

अपनी इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने मौजूदा समय में डिप्रेशन का सामना कर रहे 304 मरीजों, ऐंग्जाइटी या चिंता के 548 मरीजों, डिप्रेशन और चिंता दोनों समस्या से पीड़ित 531 मरीजों, 807 ऐसे मरीज जिन्हें दोनों या एक बीमारी थी और 634 हेल्दी प्रतिभागियों के खून के सैंपल का उपयोग किया. फिर उन्होंने खून में पाए जाने वाले 40 मेटाबोलाइट्स और डिप्रेशन और चिंता के लक्षणों के बीच जुड़ाव का पता लगाने के लिए एक न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस डिटेक्टर का इस्तेमाल किया.

शोधकर्ताओं ने पाया कि डिप्रेशन के मरीजों में ऐंग्जाइटी या चिंता के मरीजों की तुलना में इन्फ्लेमेशन अधिक देखने को मिला. डिप्रेशन से पीड़ित मरीजों में ट्राइग्लिसराइड्स का उच्च स्तर और ओमेगा-3 फैटी एसिड का निम्न स्तर भी देखने को मिला जबकि ऐंग्जाइटी के मरीजों का लिपिड प्रोफाइल स्टडी में शामिल हेल्दी प्रतिभागियों के समान ही था. अध्ययन से पता चला कि यदि आपके खून में लिपिड का अधिक स्तर नजर आता है तो आपकी डिप्रेशन की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है.

यह स्टडी स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि कई तरह की समानताओं के बावजूद, ऐंग्जाइटी और डिप्रेशन के जैव रासायनिक मार्कर्स काफी अलग-अलग हैं. उच्च ट्राइग्लिसराइड्स, कम ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे मेटाबॉलिक परिवर्तन और इन्फ्लेमेशन का उच्च स्तर ऐंग्जाइटी से जुड़े विकारों की बजाय डिप्रेशन से काफी हद तक जुड़ा हुआ था. इन बायोमार्कर्स और पूरे शरीर के परिप्रेक्ष्य को इसलिए उपचार की सिफारिश करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए, विशेष रूप से डिप्रेशन के लिए.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, डिप्रेशन के लक्षण, कारण, इलाज के बारे में पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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