सावधान! लंबे समय से बैठा है गला तो दें ध्यान, हो सकता है लेरिन्जाइटिस

गले में लेरिन्जाइटिस की समस्या क्या है जानें

वॉइस बॉक्स में सूजन (Swelling In Voice Box) को लेरिन्जाइटिस (Laryngitis)कहते हैं, यह संक्रमण या वॉइस बॉक्स के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से होता है. वॉइस बॉक्स को लैरिंक्स भी कहते हैं और इसमें बलगम से ढकी स्वर ग्रंथियां होती है...

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    वॉइस बॉक्स में सूजन को लेरिन्जाइटिस कहते हैं, यह संक्रमण या वॉइस बॉक्स के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से होता है. वॉइस बॉक्स को लैरिंक्स भी कहते हैं और इसमें बलगम से ढकी स्वर ग्रंथियां होती है. इन ग्रंथियों के खुलने और बंद होने से उत्पन्न होने वाली कंपन ध्वनि बनती है. इसमें सूजन होने पर आवाज में बदलाव आता है. वयस्कों में आवाज बैठना, आवाज बंद होना और गले में दर्द लेरिन्जाइटिस के प्राथमिक लक्षण हैं. यदि लेरिन्जाइटिस का कारण संक्रमण है तो अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे ऊपरी श्वसन तंत्र में संक्रमण या सर्दी, सूखी खांसी, बुखार, गले में खराश, नाक बहना, निगलने में दर्द, लिम्फ नोड्स में सूजन आदि. शिशुओं और बच्चों में इस रोग के साथ श्वास नली और ब्रोन्कियल ट्यूब में भी सूजन हो जाती है जिसे क्रुप रोग या कंठ रोग के नाम से जाना जाता है. ऐसे बच्चों को सांस लेने में कठिनाई होती है. ऐसी स्थिति में अजीब आवाज वाली खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. रात में ये लक्षण बढ़ जाते हैं.

    myUpchar के अनुसार, लेरिन्जाइटिस (एक्यूट और क्रोनिक) दो तरह का हो सकता है. एक्यूट लेरिन्जाइटिस के मामले आमतौर पर अस्थायी होते हैं. ये चिल्लाने या बहुत ज्यादा बोलने की वजह से स्वर तंत्रियों में खिंचाव के कारण हो सकता है. एक्यूट लेरिन्जाइटिस वायरल संक्रमण और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण भी हो सकता है. जब इस रोग के लक्षण तीन सप्ताह से ज्यादा समय तक दिखते हैं तो यह क्रोनिक माना जाता है. यह ज्यादातर तब होता है जब उत्तेजक पदार्थ सांस के जरिये शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं. इन उत्तेजक पदार्थों में रासायनिक धुआं, एलर्जी पैदा करने वाले तत्व या सिगरेट का धुआं आदि शामिल है. इसके अलावा ज्यादा शराब पीना, धूम्रपान भी इसकी वजह हो सकता है. लगातार गायन की वजह से भी यह समस्या हो सकती है.

    इस रोग के परीक्षण में अधिक समय नहीं लगता है और इसका परीक्षण कान, नाक और गले तक ही सीमित होता है. डॉक्टर निदान के लिए रोगी के काम, आहार, आदतों के बारे में पता करते हैं. इस रोग के ज्यादातर मामलों की पुष्टि के लिए किसी परीक्षण की जरूरत नहीं होती है. क्रोनिक लेरिन्जाइटिस में ब्लड टेस्ट, एक्स-रे व अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं. हालांकि लैरिंगोस्कोपी सबसे सामान्य परीक्षण है जो स्वर तंत्रियों को पास और विस्तृत रूप से देखने और उनके काम का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है. इससे देखा जाता है कि कहीं स्वर तंत्रियों में सूजन या गांठ तो नहीं है.

    इलाज के लिए पहला चरण स्वर तंत्रियों को आराम देना है. इसके लिए कम बात करने से स्वर तंत्रियों के खिंचाव को रोका जा सकता है. इसके साथ ही रोगी को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीने और नमी वाली हवा में सांस लेने की सलाह दी जाती है. दर्द के लिए इबुप्रोफेन या एसिटामिनोफेन दिया जा सकता है. इसके इलाज के लिए डेक्साथेमासोन की एक डोज मौखिक रूप से या इंजेक्शन के जरिये दी जा सकती है. धूम्रपान से बचना, कैफीन या अल्कोहल का ज्यादा सेवन और धूल व धुएं भरी जगहों पर जाने से बचना जरूरी है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, लेरिन्जाइटिस पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

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