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इंसान की सेहत और मूड को किस तरह बदलता है पूर्णिमा का चांद, जानें यहां

चंद्रमा के घटने-बढ़ने से ना केवल समुद्र की लहरों पर असर पड़ता है, बल्कि मानव स्वभाव पर भी असर होता है. (Image-Canva)

चंद्रमा के घटने-बढ़ने से ना केवल समुद्र की लहरों पर असर पड़ता है, बल्कि मानव स्वभाव पर भी असर होता है. (Image-Canva)

Moon can affect your mood: चंद्रमा को हमेशा से ही इमोशंस, मूड और मेमोरी का प्लैनेट माना जाता है. क्या आपको मालूम है कि ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

एस्ट्रोलॉजी के अनुसार, चंद्रमा का स्वभाव पर असर हो सकता है.
फुल मून होने पर कम नींद की समस्या हो सकती है.

Moon Effects On Human: पूर्णिमा के दिन चांद अपने पूर्ण आकार में दिखाई देता है. यह पूर्णिमा का चांद धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. आमतौर पर हमें लगता है कि चांद का हमारे जीवन पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता होगा, लेकिन यह खगोलीय तथ्य है कि चंद्रमा का पृथ्वी पर बहुत सी महत्वपूर्ण चीजों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है. उदाहरण के लिए, चंद्रमा समुद्र में ज्वार भाटा को उत्पन्न करता है. कई अलग-अलग जानवरों के जीवन चक्र और व्यवहार को प्रभावित करता है और यदि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल, समुद्र और पृथ्वी की सतह को प्रभावित करने के लिए शक्तिशाली है, तो यह मानना आसान बात होगी  कि यह मनुष्य के शरीर पर भी प्रभाव डाल सकता है.

पूर्णिमा का चांद किस प्रकार सेहत और मूड बदलता है?

पूर्णिमा का चांद आपको अधिक लापरवाह बना सकता है
बस्टलडॉटकॉम के मुताबिक, अगर आपको ऐसा लगता है कि पूर्णिमा के दिन आपको गुस्सा आता है, तो यह सिर्फ आपकी कल्पना नहीं हो सकती है. हालांकि, वे यह दावा नहीं करते कि चंद्रमा अपराध या पागलपन का कारण बनता है, लेकिन रिपोर्ट में हिंसक मामले सामने आए हैं जैसे हमले, हत्या, आत्महत्या, रोड एक्सीडेंट और मनोरोग. परिणामों से पता चला कि सभी प्रकार के अपराध फुलमून के आसपास के दिनों में हुए हैं.

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आप मोटिवेटेड महसूस कर सकते हैं
जैसे-जैसे चंद्रमा, पूर्णिमा की ओर जाता है, तो आपकी एनर्जी और मोटिवेशन में भी वृद्धि होती है. जैसे-जैसे चंद्रमा आकार में बढ़ने लगता है. आप नयापन महसूस करने लगते हैं. अमावस्या और पूर्णिमा के बीच दो सप्ताह की अवधि के दौरान अपनी एनर्जी पर ध्यान दें और देखें कि क्या परिवर्तन दिखाई देते है.

पूर्णिमा के दिन नींद की कमी हो सकती है
करंट बायोलॉजी में प्रकाशित, 2013 के एक अध्ययन में भाग लेने वाले लोगों ने पूर्णिमा के दौरान पहले की अपेक्षा बहुत कम नींद का अनुभव किया जा सकता है. आरामदायक नींद की कमी होने से व्यक्ति की मनोदशा और सेहत पर भी प्रभाव पड़ सकता है. कम नींद से मूड भी प्रभावित हो सकता है. हम नींद की वजह से ना केवल मूड बल्कि हेल्थ भी प्रभावित हो सकती है.

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Tags: Health, Lifestyle

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