शरीर पर कैसे नजर आता है भावनात्मक तनाव, वैज्ञानिकों ने पता लगाया इसका जवाब

शरीर पर कैसे नजर आता है भावनात्मक तनाव, वैज्ञानिकों ने पता लगाया इसका जवाब
भावनात्मक तनाव मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों को सक्रिय करता है जो शारीरिक प्रतिक्रिया को जन्म देता है.

पैनिक अटैक (Panic Attack) एक अचानक डर लगने की भावना (Emotion) होती है जो गंभीर शारीरिक प्रतिक्रियाओं को उत्तेजित करती है, जबकि आसपास कोई वास्तविक खतरा या स्पष्ट कारण नहीं होता है.

  • Last Updated: September 11, 2020, 6:56 AM IST
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क्या कभी ध्यान दिया है कि जब व्यक्ति भावनात्मक (Emotional) रूप से परेशान होता है तो उसका शरीर कैसे प्रतिक्रिया करता है? उसके दिल की धड़कन (Heart Rates) बढ़ जाती है और पसीना छूटने लगता है. यह हालिया अध्ययन भावनात्मक तनाव (Emotional Stress) का शरीर पर होने वाली प्रतिक्रिया के बारे में बताता है. जर्नल साइंस में प्रकाशित अध्ययन एक न्यूरल सर्किट की ओर इशारा करता है जो भावनात्मक तनाव के लिए शारीरिक प्रतिक्रिया देता है. यह सर्किट तनाव संबंधी विकारों जैसे पैनिक अटैक और पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण आधार हो सकता है.

myUpchar से जुड़े एम्स के उमर अफरोज का कहना है कि पैनिक अटैक एक अचानक डर लगने की भावना होती है जो गंभीर शारीरिक प्रतिक्रियाओं को उत्तेजित करती है, जबकि आसपास कोई वास्तविक खतरा या स्पष्ट कारण नहीं होता है.



इसी तरह myUpchar से जुड़े डॉ. आयुष पांडे का कहना है कि पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) वह मानसिक स्थिति है, जिसका सीधा संबंध व्यक्ति के साथ घटी किसी भयानक घटना से होता है. इस घटना को या तो व्यक्ति अनुभव कर चुका होता है या उसे देख चुका होता है. इसके लक्षणों में कोई पुरानी याद, बुरे सपने और गंभीर चिंताओं के साथ ही घटना के जुड़े अनियंत्रित विचार शामिल हो सकते हैं.
भावनात्मक तनाव मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों को सक्रिय करता है जो शारीरिक प्रतिक्रिया को जन्म देता है. भावनात्मक तनाव सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे शारीरिक प्रतिक्रियाएं होती हैं जैसे कि ब्लड प्रेशर और शरीर के तापमान में वृद्धि और तेज हृदय गति. ऐसी प्रतिक्रियाओं को फाइट एंड फ्लाइट स्थितियों में शारीरिक प्रदर्शन को बढ़ावा देने के लिए पहचाना जाता है. फाइट एंड फ्लाइट प्रतिक्रिया एड्रेनालाइन नाम के हार्मोन से उत्पन्न होती है. यह हार्मोन शरीर की फाइट यानी लड़ने के लिए या खतरे से बचने के लिए तैयार होने की प्रतिक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

जब हर समय तनाव में रहता है, तो ये प्रतिक्रियाएं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं. वास्तव में, अत्यधिक तनाव असामान्य रूप से शरीर के उच्च तापमान की स्थिति जैसे साइकोजेनिक फीवर पैदा कर सकता है.

यह खोज मानसिक विकारों से पीड़ित लोगों के लिए आशा की एक किरण है. प्रशिक्षकों ने दिखाया कि तनाव के संपर्क में डीपी/डीटीटी मस्तिष्क क्षेत्र अत्यधिक सक्रिय थे. तनाव की प्रतिक्रिया में इन मस्तिष्क क्षेत्रों की भूमिका की जांच करने के लिए शोधकर्ताओं ने हाइपोथैलेमस के क्षेत्रों के कनेक्शन को बिगाड़ा और फिर से उसी तनाव में चूहों को प्रभावित किया. चूहों ने किसी भी तनाव से प्रेरित शारीरिक प्रतिक्रिया नहीं दिखाई और न तो ब्लड प्रेशर में वृद्धि हुई और न ही शरीर का तापमान या तेज हृदय गति बढ़ी.

शोध के नतीजे बताते हैं कि डीपी / डीटीटी मस्तिष्क के ऐसे हिस्से हैं जो भावनाओं और तनाव की प्रोसिसिंग करने में शामिल हैं. डीपी/डीटीटी-टू-हाइपोथैलेमस मार्ग खोजा गया जो माइंड-बॉडी कनेक्शन के लिए एक मस्तिष्क तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है, जो तनाव संबंधी विकारों जैसे कि पैनिक डिसऑर्डर, पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और साइकोजेनिक फीवर के इलाज के लिए उपयोगी हो सकता है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, तनाव क्या है, लक्षण, कारण, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

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