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फिजिकल वर्कआउट के दौरान यह बड़ी गलती बनती है हाइपोथर्मिया और हाइपरथर्मिया की वजह, जानें कैसे.. 

फिजिकल वर्कआउट के दौरान यह बड़ी गलती बनती है हाइपोथर्मिया और हाइपरथर्मिया की वजह, जानें कैसे.. 

Exercise in winter: स्‍वस्‍थ्‍य सेहत के लिए यह तो जरूरी है ही कि आप नियमित व्‍यायाम यानी फिजिकल वर्कआउट करें, इससे ज्‍यादा यह जरूरी है कि आप सही तरीके से फिजिकल वर्कआउट करें. अक्‍सर फिजिकल वर्कआउट के नतीेज गलत तरीके की वजह से विपरीत हो जाते हैं. कई बार, लोगों को व्‍यायाम का फायदा तो नहीं मिलता, वे बीमार जरूरी हो जाते हैं. आइए, इंद्रप्रस्‍थ अपोलो हॉस्पिटल में फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. सीमा ग्रोवर से जाने फिजिकल वर्कआउट से जुड़ी कुछ अहम बातें...

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SEHAT KI BAAT: फिजिकल वर्कआउट के दौरान की गई छोटी-छोटी गलतियां हमें बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. जी हां, फिजिकल वर्कआउट (Physical Workout) के दौरान की गई एक ऐसी ही एक छोटी सी गलती की वजह से हम हाइपोथर्मिया (Hypothermia) और हाइपरथर्मिया (Hyperthermia) नामक बीमारी का शिकार बन सकते हैं. इन दोनों बीमारियों फिजिकल वर्कआउट के दौरान पहने गए कपड़ों से जुड़ी हुई हैं. दरअसल, हमें फिजिकल वर्कआउट किन कपड़ों में करना चाहिए, यह सवाल अधिकतर लोगों के मन में नहीं आता है. हम मनमुताबिक कपड़ों में फिजिकल वर्कआउट शुरू कर देते हैं, जिसका नतीजा बीमारियों के रूप में सामने आता है.

इंद्रप्रस्‍थ अपोलो हॉस्पिटल में फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. सीमा ग्रोवर (Dr. Seema Grover) के अनुसार, बढ़ती ठंड के साथ हम अपने शरीर में गर्म कपड़ों की लेयर्स बढ़ाते जाते हैं. कपड़ों की ये लेयर्स हमारे शरीर में इंसुलेटिंग लेयर्स के तौर पर काम करती है. फिजिकल वर्कआउट के दौरान, हमारे शरीर से निकलने वाली हीट गर्म कपड़ों की इंसुलेटिंग लेयर्स की वजह से बहुत बढ़ जाती है. यह हीट किसी भी शख्‍स को तकलीफ में डाल सकती है. लिहाजा, जरूरी है कि जैसे-जैसे हम अपनी एक्‍सरसाइज बढ़ाएं, इंस्‍युलेटिंग लेयर्स को कम करते जाएं. शरीर में जितनी इंसुलेटिंग लेयर्स कम होंगी, हमारा स्‍वेट एम्‍युलेशप कम होगा और हम कई तरह की बीमारियों से बच जाएंगे.

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क्‍या है हाइपरथर्मिया और हाइपोथर्मिया में अंतर
डॉ. सीमा ग्रोवर के अनुसार, शरीर का तापमान 104°F से अधिक होने पर हाइपरथर्मियां और 95°F से कम होने की स्थिति को हाइपोथर्मिया कहते हैं. हिंदी में हाइपरथर्मिया को अतिताप और हाइपोथर्मिया को अल्‍पताप भी कहा जाता है. हाइपरथर्मिया मतलब ज्‍यादा गर्मी से हीट स्‍ट्रोक हो जाना है. अचानक से बहुत अधिक एक्‍सरसाइ करने वाले युवकों को भी हाइपरथर्मियां होने का खतरा रहता है. वहीं, ठंड लग जाने की वजह से हाइपोथर्मिया और फ्रासबाइट का खतरा बना रहता है. उन्‍होंने बताया कि जब भी हम मूवमेंट करते हैं, तो बॉडी में हीट प्रड्यूस होती है. इस हीट को कूल डाउन करने का काम हमारा पसीना करता है. विंटर में पसीना न आने की वजह से स्थिति बदल जाती है.

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सर्दियों में इनको रखना होगा खास ख्‍याल
डॉ. सीमा ग्रोवर के अनुसार, सर्दियों में विशेषतौर पर जिन लोगों का बॉडी फैट कम है या जिनकी उम्र 60 से ज्‍यादा है, फिजिलक वर्कआउट के दौरान खास ख्‍याल रखने की जरूरत है. वहीं, खाना खाने के कुछ समय बाद अचानक बहुत अधिक एक्‍सरसाइज करने वालों का शुगर लेबल अचानक से बहुत कम हो जाता है. इस स्थिति को हम ट्रांसिएंट हाइपोग्‍लाइ‍सीमिया कहते हैं. खासतौर पर उन लोगों को ध्‍यान रखना जरूरी है, जिनको रेस्‍प्रेटरी या हार्ट की समस्‍या है, जिनके शुगर लेबल डांवाडोल रहता है, उनको ध्‍यान रखना है कि वे एक्‍सरसाइज कैसे करें. उनके अनुसार, ठंडे मौसम में एक्‍सरसाइज करना गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में एक्‍सरसाइज करने से बहुत अधिक खतरा नहीं रहता है.

Tags: Fitness, Health tips, Sehat ki baat

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