#काम की बात: मुझे ऑर्गज्म नहीं होता, दिक्कत कहां है, शरीर में या दिमाग में?

सेक्‍स सलाह
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सेक्स के लिए हिंदी में एक शब्द है- संभोग यानी समान रूप से भोग. यदि यौन आनंद में दोनों पक्ष समान रूप से भागीदार नहीं हैं तो यह एक पक्ष के लिए तकलीफदेह अनुभव बन जाता है

  • Last Updated: July 30, 2018, 3:55 PM IST
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प्रश्‍न : मेरी उम्र 29 साल है और मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं. मेरे पति के साथ वैसे तो संबंध मधुर हैं, लेकिन सेक्स मेरे लिए धीरे-धीरे बोझ बनता जा रहा है क्योंकि मुझे ऑर्गज्म का अनुभव नहीं होता. इन दो सालों में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि मैं चरम सुख तक पहुंची होऊं. सेक्स खत्म होने के बाद भी मेरे शरीर में एक अजीब सी उलझन और बेचैनी बनी रहती है. मैं क्या करूं?

उत्‍तर : आपकी समस्या इस देश की बहुसंख्यक स्त्रियों की समस्या है. यह बहुत कॉमन है और इसके लिए मुख्यतः पुरुषों की नामसझी और उनकी अज्ञानता जिम्मेदार है. कई बार पुरुष पर्याप्त संवेदनशील भी नहीं होते, इसलिए भी संबंधों में इस तरह की दिक्कतें पैदा हो जाती हैं. सेक्स के लिए हिंदी में एक शब्द है- संभोग यानी समान रूप से भोग. यदि यौन आनंद में दोनों पक्ष समान रूप से भागीदार नहीं हैं तो यह एक पक्ष के लिए तकलीफदेह अनुभव बन जाता है, जैसाकि हमारे समाज में बहुत बड़ी तादाद में स्त्रियों के साथ हो रहा है.

पुरुष यौन संबंधों के मामले में अधिकांशतः अज्ञानी होते हैं. उन्हें जो बात समझने की जरूरत है, वह यह कि स्त्री के सुख की प्रक्रिया पुरुष की तरह सरल नहीं है. वह थोड़ी जटिल है. पुरुष सेक्स के लिए बहुत जल्दी तैयार हो जाते हैं, जबकि स्त्री को वक्त लगता है. उसके लिए सेक्स में फोरप्ले की भूमिका बहुत अहम है, जबकि पुरुष के लिए यह बहुत जरूरी भी नहीं है. अकसर स्त्री जब तक सेक्स के लिए तैयार होती है, पुरुष जब अपना काम खत्म कर चुके होते हैं. यही कारण है कि स्त्री चरम सुख से वंचित रह जाती है.



स्त्रियां यह महसूस करती हैं, लेकिन संकोच के कारण बोलती नहीं. मुझे लगता है कि आपको अपने पार्टनर से इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए. उन्हें समझाएं कि इसमें आपका सुख भी बहुत जरूरी है. इसमें शर्म या संकोच की कोई बात नहीं है. इसलिए अपने साथी से बात करें. पुरुष इतने अज्ञानी होते हैं कि अकसर उन्हें पता ही नहीं होता कि वो क्या गलती कर रहे हैं. ऐसे में यह स्त्री की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने साथी को समझाए, उसे शिक्षित करे. दिक्कत ज्यादा तब होती है, जब पुरुष इतने स्वार्थी हों कि इस बात को समझने से इनकार कर दें. लेकिन मुझे यकीन है कि अगर आप इस बारे में खुलकर बात करेंगी, उन्हें बताएंगी कि आपको क्या अच्छा लगता है, किस चीज से आनंद मिलता है तो वह सुनेंगे. अपने संकोच से बाहर आएं और संवाद करें.
(डॉ. पारस शाह सानिध्‍य मल्‍टी स्‍पेशिएलिटी हॉस्पिटल, अहमदाबाद, गुजरात में चीफ कंसल्‍टेंट सेक्‍सोलॉजिस्‍ट हैं.)

अगर आपके मन में भी कोई सवाल या जिज्ञासा है तो आप इस पते पर हमें ईमेल भेज सकते हैं. डॉ. शाह आपके सभी सवालों का जवाब देंगे.
ईमेल – Ask.life@nw18.com

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