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Pollution: दिल्‍ली की जहरीली आबोहवा के बीच सुबह की सैर 'सज्‍जन' के लिए बनी जानलेवा, ICU में हुए भर्ती

Pollution: दिल्‍ली की जहरीली आबोहवा के बीच सुबह की सैर 'सज्‍जन' के लिए बनी जानलेवा, ICU में हुए भर्ती

दिल्‍ली की खराब आबोहवा तेजी से लोगों को बीमार कर रही है.

दिल्‍ली की खराब आबोहवा तेजी से लोगों को बीमार कर रही है.

Air Pollution in Delhi: गाजियाबाद के वैशाली मैक्‍स हॉस्पिटल में एक ऐसे मरीज को दाखिल कराया गया है, जिसके फेफडे़ प्रदूषण के चलते गंभीर रूप से क्ष‍तिग्रस्‍त हो गए हैं. सांस लेने में दिक्‍कत और शरीर में ऑक्‍सीजन की कमी को देखते हुए इस मरीज को आईसीयू में भर्ती कराया गया था. फिलहाल, मरीज के स्‍वास्‍थ्‍य में तेजी से सुधार देखा गया है.

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली की आबोहवा का मिजाज इस कदर बिगड़ चुका है कि वह आपकोे बीमार और बहुत बीमार बना सकती है. ये बातें लगातार आपको खबरों के जरिए दिखाई, सुनाई और पढ़ाई जा रही हैं. लेकिन, ज्‍यादातर लोग इन बातों को मानने के लिए तैयार नहींं हैंं. उन्‍हें लगता है कि आखिर इस प्रदूषण से होगा क्‍या? ज्‍यादा से ज्‍यादा गले में खरास, खांसी, जुखाम और सिर में दर्द हो जाएगा.

लोग अपनी इसी सोच की वजह से प्रदूषण से बचाव के लिए बताए गए उपाय मानने के लिए बिल्‍कुल भी तैयार नहीं हैं. लेकिन, अब दिल्‍ली-एनसीआर में फैले प्रदूषण के गंभीर नतीजे नजर आना शुरू हो गए है. कई लोगों को इसी प्रदूषण की वजह से आईसीयू में भर्ती कराने की नौबत आ गई है. एक ऐसा ही मामला गाजियाबाद के वैशाली मैक्‍स हॉस्पिटल में सामने आया है.

वैशाली मैक्‍स हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. शरद जोशी के अनुसार, 55 वर्षीय एक सज्‍जन को हाल में ही गाजियाबाद के वैशाली मैक्‍स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. इन सज्‍जन को कुछ दिनों पहले सांस लेने में दिक्‍कत महसूस हुई. धीरे-धीरे सांस लेने दिक्‍कत बढ़ती गई. घर में ऑक्‍सीमीटर से सेचुरेशन नापने पर पता चला कि शरीर का ऑक्‍सीजन लेबल भी बहुत कम था. जिसके बाद, परिजन इन सज्‍जन को लेकर दिल्‍ली के मैक्‍स हॉस्पिटल पहुच गए.

सही समय पर मिला इलाज, तो टला खतरा
जांच में, ब्रोंकाइटिस के साथ-साथ ऑक्‍सीजन की कमी और तेज घरघराहट पाई गई. मरीज की स्थि‍ति को देखते हुए उन्‍हें तत्‍काल आईसीयू में भर्ती किया गया. जहां डॉक्‍टर्स के एक्‍सपर्ट पैनल ने इनका इलाज शुरू किया गया. गनीमत रही कि ऑक्सीजन, नेबुलाइजेशन, एंटीबायोटिक्स और स्टेरॉयड की मदद से इन सज्‍जन की जिंदगी पर मंडरा रहे खतरे को टाल दिया गया. इन सज्‍जन के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार के बाद उन्‍हें आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया.

डॉ. शरद जोशी ने बताया कि इन सज्जन को न ही पूर्व मे कभी सांस लेने में कोई दिक्‍कत हुई थी और न ही फेफड़ों की बीमारी का कोई इतिहास था. अतीत में कभी छाती में जमाव या घरघराहट की शिकायत भी महसूस नही हुई थी. बीते दिनों प्रदूषण मे इजाफे के बावजूद उन्‍होंने अपनी सुबह की सैर जारी रखी. जिसके बाद, उन्‍हें गले मे खराब, खांसी, जुकाम जैसे लक्षण आना शुरू हो गए. इन लक्षणों को सामान्‍य मानकर ये सज्‍जन लगातार लापरवाही बरतते रहे.

लक्षणों मिलने के बाद भी लापरवाही बरतते रहे ये सज्‍जन
आखिर में हालात यहां तक पहुंच गए कि उनके फेफड़े प्रदूषण के चलते बुरी तरह से संक्रमित हो गए और सांंस लेने में तकलीफ होने लगी. जिसके चलते उन्‍हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा. डॉ. शरद जोशी के अनुसार, प्रदूषण के चलते फेफड़ों के संक्रमित होने का यह इकलौता मामला नहीं है, बल्कि बीते दिनो इस तरह के लगातार मामले सामने आ रहे हैं. इसमें से कई मरीज ऐसे भी हैं, जिन्‍हें पूर्व में फेफड़ों से संंबंधित कोई बीमारी नहीं थी.

डॉ. शरद जोशी के अनुसार, राजधानी में अभी भी प्रदूषण के हालात बहुत संवेदनशील बने हुए हैं. ऐसे में जरूरी है कि सभी लोग प्रदूषण से बचाव के लिए बताए गए एहतियातों का कठाई से पालन करें. प्रदूषण के प्रति लापरवाही बरतने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

Tags: Air pollution, Health tips, Sehat ki baat

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