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    हार्ट अटैक के बाद कपिल देव की हुई कोरोनरी एंजियोप्लास्टी, जानिए क्या है ये और कैसे की जाती हैं

    दिल का दौरा पड़ने पर हृदय को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एंजियोप्लास्टी की जाती है.
    दिल का दौरा पड़ने पर हृदय को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एंजियोप्लास्टी की जाती है.

    जिन मरीजों को दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ता है या फिर जिन्हें स्ट्रोक का जोखिम रहता है, उनकी एंजियोप्लास्टी की जाती है. पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) की कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (Coronary Angioplasty) की गई है.

    • Last Updated: October 24, 2020, 11:17 AM IST
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    पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) को शुक्रवार सुबह हार्ट अटैक (Heart Attack) आया था जिसके बाद उन्हें नई दिल्ली के फॉर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां पर कपिल देव की इमरजेंसी कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (Coronary Angioplasty) की गई. इस प्रक्रिया के बाद कपिल देव की हालत थोड़ी स्थिर हुई और उन्हें आईसीयू में एडमिट किया गया. ऐसे में आपके मन में भी यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर ये एंजियोप्लास्टी क्या है और कैसे की जाती है. तो इस बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं.

    क्या है कोरोनरी एंजियोप्लास्टी?
    कोलेस्ट्रॉल के जमने, कोशिकाओं या अन्य पदार्थ जिन्हें प्लाक कहते हैं की वजह से व्यक्ति के हृदय की धमनियां अवरुद्ध या संकुचित हो जाती हैं. इसकी वजह से हृदय में खून का प्रवाह कम हो जाता है और छाती में दर्द या असहजता महसूस होने लगती है. कई बार अचानक खून के थक्के भी जम जाते हैं जो पूरी तरह से खून के प्रवाह को रोक देते हैं और इसकी वजह से व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है.
    कोरोनरी एंजियोप्लास्टी अवरुद्ध धमनियों को खोलता है और मरीज के हृदय की मांसपेशियों में सामान्य रक्त प्रवाह को पुनर्स्थापित करता है. सामान्य रूप से ऐसा माना जाता है कि दिल का दौरा पड़ने पर 1 से डेढ़ घंटे का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है और अगर इस समय सीमा के भीतर एंजियोप्लास्टी हो जाए तो मरीज की जान बचायी जा सकती है. एंजियोप्लास्टी कोई बहुत बड़ी सर्जरी नहीं है. इसे कैथेटर (पतली ट्यूब) के माध्यम से किया जाता है.



    कोरोनरी एंजियोप्लास्टी क्यों की जाती है?
    जिन मरीजों की हृदय की धमनी में किसी तरह का ब्लॉकेज होता है, अगर मरीज को बार-बार सीने में दर्द या असहजता महसूस होती है या फिर जिन मरीजों को हार्ट अटैक होने का खतरा होता है या फिर जिन्हें दिल का दौरा पड़ जाता है उनकी एंजियोप्लास्टी की जाती है. एंजियोप्लास्टी अवरुद्ध या संकुचित हो चुकी धमनी को तुरंत खोलने के लिए उपयोगी माना जाता है. साथ ही एंजियोप्लास्टी की यह प्रक्रिया हृदय को हुए नुकसान को कम करने में और कोरोनरी धमनियों में जमा प्लाक को साफ करने में मदद करती है.

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    यह प्रक्रिया इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इसमें बिना किसी बड़ी हृदय सर्जरी के ही धमनी को उसके सामान्य आकार में वापस लाया जा सकता है. एंजियोप्लास्टी सभी लोगों के लिए नहीं होती और आपका हृदय रोग किस तरह का है और आपकी ओवरऑल सेहत की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर इस बात का फैसला लेते हैं आपकी कोरोनरी एंजियोप्लास्टी होनी चाहिए या फिर कोरोनरी बाइपास सर्जरी.

    निम्नलिखित परिस्थितियों में एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ती है:

    • बार-बार होने वाला गंभीर एंजाइना का दर्द जिसमें दवाओं का असर न हो रहा हो (हृदय की मांसपेशियों में खून का प्रवाह कम होने के कारण सीने में जो आमतौर पर जो दर्द, भारीपन, दबाव या जकड़न महसूस होती है उसे ही एंजाइना कहा जाता है)

    • धमनियों का संकुचित या अवरुद्ध होना

    • खून का थक्का जमना

    • दिल का दौरा पड़ने पर हृदय को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए


    कोरोनरी एंजियोप्लास्टी कैसे की जाती है?
    जिन मरीजों को दिल का दौरा पड़ता है या फिर जिन्हें स्ट्रोक का जोखिम रहता है, उनके लिए सर्जन बाइपास सर्जरी की जगह एंजियोप्लास्टी का चुनाव करते हैं. एंजियोप्लास्टी मुख्य रूप से 3 तरह की होती है:

    1. बैलून एंजियोप्लास्टी: यह कोरोनरी एंजियोप्लास्टी का सबसे कॉमन प्रकार है. इसमें एक कैथेटर यानी एक पतली सी और लंबी ट्यूब होती है जिसके टिप पर एक बैलून बंधा होता है. इस ट्यूब को मरीज की बांह या जांघ में एक छोटा चीरा लगाकर हृदय की अवरुद्ध धमनी तक पहुंचाया जाता है. संकुचित धमनी में प्रवेश करने पर कैथेटर से जुड़े बैलून को फुलाया जाता है. फूला हुआ बैलून धमनी में मौजूद प्लाक को दबाकर चपटा कर देता है या फिर प्लाक को धमनी की दीवारों के बिलकुल किनारे चिपका देता है जिससे धमनी फिर से चौड़ी हो जाती है और खून का प्रवाह पहले की तरह सामान्य हो जाता है.

    2. लेजर एंजियोप्लास्टी: कोरोनरी एंजियोप्लास्टी की इस प्रक्रिया में भी कैथेटर का ही उपयोग किया जाता है लेकिन बैलून की जगह कैथेटर की टिप पर लेजर होता है. लेजर धमनी में जमा ब्लॉकेज को भाप बनाकर हटा देता है. बैलून और लेजर एंजियोप्लास्टी का इस्तेमाल एक के बाद एक किया जाता है. बैलून सख्त प्लाक को हटाता है और लेजर बचे हुए प्लाक को.

    3. अथेरेक्टॉमी: बैलून और लेजर का इस्तेमाल करने के बाद भी अगर सख्त प्लाक को न हटाया जा सके तो अथेरेक्टॉमी एंजियोप्लास्टी की जाती है. इसमें एक तरह का सर्जिकल ब्लेड यूज किया जाता है जिसकी मदद से प्लाक को काट दिया जाता है और धमनी की दीवारों से हटाया जाता है.

    वैसे तो कोरोनरी एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया में सिर्फ 1 से 3 घंटे का ही समय लगता है लेकिन एंजियोप्लास्टी होने के बाद मरीज को रिकवर होने में 12 से 16 का लग जाते हैं. इसके अलावा इस प्रक्रिया के दौरान दर्द भी बहुत कम होता है. डॉक्टर उस जगह को सुन्न कर देते हैं जहां से कैथेटर डाला जाता है और इसलिए जब कैथेटर डलता है तो मरीज को थोड़ा दबाव महसूस होता है. इस दौरान मरीज को बेहोश नहीं किया जाता लेकिन उन्हें कुछ दवाइयां दी जाती हैं ताकि वह शांत रह सकें और रिलैक्स कर सकें. जिस जगह से कैथेटर शरीर में डाला जाता है वहां पर बाद में सूजन हो सकती है.

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    कोरोनरी एंजियोप्लास्टी के बाद मरीज की देखभाल
    अगर गैर-आपातकालीन स्थिति में मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई हो तो 1-2 दिन अस्पताल में रहकर मरीज हफ्ते-10 दिन में अपनी नॉर्मल दिनचर्या में वापस लौट सकता है, लेकिन अगर दिल का दौरा पड़ने के बाद एंजियोप्लास्टी हो तो मरीज के अस्पताल में रहने के दिन और रिकवरी का समय दोनों बढ़ जाता है. इसके अलावा मरीज को डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सही समय पर सेवन करना चाहिए. धूम्रपान से बचना चाहिए, कोलेस्ट्ऱॉल का लेवल न बढ़े इस पर नजर रखनी चाहिए. नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए और वजन भी अधिक नहीं बढ़ने देना चाहिए.

    अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल एंजियोप्लास्टी क्या है, के बारे में पढ़ें।

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