हमारी आदतें हमारे व्यक्तित्व के बारे में क्या कहती हैं, जान लें हर एक छोटी बात

हमारी आदतें हमारे व्यक्तित्व के बारे में क्या कहती हैं, जान लें हर एक छोटी बात
हमारी आदतें हमारे व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ कहती हैं. ये सबके सामने हमारा प्रतिनिधित्व करती हैं.

हम इन आदतों (Habits) को अपने जीवन के हर पल के माध्यम से करते हैं, और किसी भी चीज से अधिक ये आदतें ही हैं जो हमारे व्यक्तित्व (Personality) को परिभाषित करती हैं. आज आपके जीवन में जितनी भी आदते हैं उनमें से अधिकांश आदतें समय के साथ बनती हैं.

  • Last Updated: July 31, 2020, 11:39 AM IST
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हम सभी के जीवन में कोई न कोई आदत (Habit) जरूर होती है. आदतें हमारे व्यवहार का पैटर्न होती हैं जो स्वचालित यानी ऑटोमैटिक हैं. हम इन आदतों को अपने जीवन के हर पल के माध्यम से करते हैं, और किसी भी चीज से अधिक ये आदतें ही हैं जो हमारे व्यक्तित्व (Personality) को परिभाषित करती हैं. आज आपके जीवन में जितनी भी आदते हैं उनमें से अधिकांश आदतें समय के साथ बनती हैं- कुछ पर आपको गर्व (Proud) महसूस होता है तो वहीं, कुछ आदतें ऐसी भी हैं जिन्हें आप बदलना चाहते हैं. नए साल के मौके पर न्यू ईयर रेजोलूशन बनाना हो या फिर नई "अच्छी आदतें" विकसित करना हो या फिर पुरानी "बुरी आदतों" को बदलना, हम कई तरीकों से अपने जीवन और सेहत पर बेहतर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए अपनी आदतों को उपयुक्त बनाने की कोशिश करते हैं. स्पष्ट रूप से कहें तो इस पूरी प्रक्रिया में काफी कुछ होता है.

कैसे बनती हैं आदतें?
हमारा शरीर और सबसे जरूरी हमारा दिमाग एक स्वचालित छंटाई मशीन की तरह काम करता है जिन्हें अपने भीतर संतुलन की सही स्थिति का पता लगाने के लिए प्रोग्राम किया जाता है. क्या होता है जब शरीर को पता चलता है कि किसी वायरस ने शरीर में प्रवेश किया है? शरीर अपने आप काम करने में लग जाता है और जितना हो सकता है उतने ज्यादा मजबूत और शक्तिशाली एंटीबॉडीज का उत्पादन करता है ताकि इम्यून सिस्टम अराजकता फैलाने वाले इस दुश्मन से लड़कर उसे शरीर के बाहर निकाल सके. इसी प्रकार, हमारा मन और शरीर सभी प्रकार के आंतरिक और बाहरी असंतुलन का पता लगाकर संतुलन वापस लाने के लिए एक सिस्टम बनाता है.
रोजाना की रूटीन जो हम फॉलो करते हैं फिर चाहे वह जागृत अवस्था में हो या फिर अनजाने में, वह शरीर का अपना संतुलन बनाए रखने का तरीका है और इससे ज्यादा कुछ नहीं. एक कप कॉफी जो हम पीते हैं, जिस ढंग से हम खड़े होते हैं, ये जानते हुए भी कि हम ओवरइटिंग कर रहे हैं वो अतिरिक्त कौर जो हम खा लेते हैं या फिर किसी दिन जब हम अतिरिक्त आधा घंटा सो लेते हैं- ये सभी क्रियाएं हैं जो हमारे शानदार दिमाग के तर्क की अवहेलना करती हैं, लेकिन मूल रूप से वे तरीके हैं जिसमें हमारा शरीर हमें एक निश्चित दिशा में जाने के लिए प्रेरित करता है ताकि हम अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएं.



मैंने ऐसा क्यों किया? मुझे पता था कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. इस तरह के विचार हमारे दिमाग में आते हैं लेकिन उस क्षण में, ऐसा लगता है मानो कोई छिपी हुई शक्ति आपको एक दुष्चक्र में गिरने से बचाने के लिए ये कदम उठाती है और यह हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर देता है.

अपनी आदतों से छुटकारा पाना और भी मुश्किल क्यों हो जाता है?
यह हमारी स्मृति या याददाश्त है उन सभी कार्यों की जिन्होंने अतीत में शरीर का संतुलन बनाए रखने में हमारी मदद की है. हमारा दिमाग, आश्चर्यजनक रूप से उन सभी यादों को संग्रहित करके रखता है जिन कामों को हम करते हैं. फिर चाहे वे काम हमने पिछले हफ्ते किए हों, पिछले साल, पिछले दशक या फिर बचपन में. एक बार फिर, यह स्वचालित है, स्वाभाविक है और बिना किसी सचेत प्रयास के है. हमारा मन जो हमारे शरीर की सेवा में लगा रहता है, वह पूरी मेहनत से हमारे सभी अनुभवों का वर्गीकरण करता है कि इनमें से कौन से अनुभव मददगार हैं और कौन से नहीं, पल-पल में जीवित रहने और हमारे अस्तित्व के प्रति, यह वह कार्य है जिसे प्रकृति ने हमारे दिमाग को सौंपा है.

रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि बहुत से जीवों में अपने अनुभवों को याद रखने की क्षमता होती है; उन प्रजातियों वाले जीवों में भी जिनमें हम इंसानों जैसा विकसित न्यूरोलॉजिकल सिस्टम नहीं होता है. यह देखते हुए कि हम इंसानों का न्यूरोलॉजिकल सिस्टम कितना विकसित है, कल्पना करें कि हमारा दिमाग कितना कुशल और प्रभावी है यह सुनिश्चित करने में कि हम न केवल जीवित रहें बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी यह ऑटोमैटिक ज्ञान या सीख हस्तांतरित करें.

अगली बार जब आप खुद पर सख्त हों, हारा हुआ और बर्बाद महसूस करें तो इस सच्चाई और तथ्य को याद रखें कि आप दुनिया की सबसे शक्तिशाली सिस्टम के खिलाफ हैं. हालांकि कभी-कभार यह अपराजेय लग सकता है, इसे सही उपकरणों के जरिए किया जा सकता है. इस आर्टिकल को माइउपचार के लिए डॉ. गीतिका कपूर ने लिखा है जो एडएसेंशियल में कसंल्टेंट स्कूल साइकोलॉजिस्ट हैं.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, बहुत कुछ कहती हैं आपकी आदतें के बारे में पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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