जानिए क्या है एलएपी टेस्ट, इन बीमारियों की जांच के लिए होता है इस्तेमाल


जानिए क्या है एलएपी टेस्ट

जानिए क्या है एलएपी टेस्ट

एलएपी (ल्यूकोसाइट अल्कलीना फॉस्फेट) टेस्ट में यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति का ल्यूकेमाइड रिएक्शन, जो कि एक सफेद रक्त कोशिका है, उसमें किसी तरह का संक्रमण या कैंसर तो नहीं है...

  • Last Updated: December 10, 2020, 6:55 AM IST
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एलएपी (ल्यूकोसाइट अल्कलीना फॉस्फेट) टेस्ट खून में एलएपी की जांच के लिए किया जाता है. इसमें डॉक्टर सफेद रक्त कोशिकाओं में मौजूद एंजाइमों के एक समूह 'अल्कलाइन फॉस्फेट' की मात्रा को मापते हैं. दरअसल, यह अल्कालीन फॉस्फेट शरीर की इम्यून सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह बाहरी बैक्टीरिया और संक्रमण से बचाव करने में सहायक है. खास तौर से एलएपी शरीर में लीवर, किडनी और हड्डियों की कोशिकाओं में पाया जाता है. यदि यह शरीर में कम या ज्यादा हो जाता है तो यह इस बात का संकेत है कि शरीर में किसी तरह की समस्या है.

इसलिए किया जाता है एलएपी परीक्षण

myUpchar के अनुसार, इस टेस्ट में यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति का ल्यूकेमाइड रिएक्शन, जो कि एक सफेद रक्त कोशिका है, उसमें किसी तरह का संक्रमण या कैंसर तो नहीं है.

यह जांच इस बात का पता लगाने में भी समक्ष है कि थ्रोम्बोसाइटोसिस, जो कि ब्लड प्लेटलेट्स हैं, उसका अधिक प्रवाह तो नहीं हो रहा है.
इसके अलावा पॉलीसायथिमियावेरा नाम का एक विकार है, जिसमें बोन मैरो सामान्य से ज्यादा लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने लगती है, इसकी जांच के लिए भी एलएपी टेस्ट मदद कर सकता है. इसी के विपरीत अप्लास्टिक एनीमिया नामक विकार में बोन मैरो बहुत कम रक्त कोशिकाएं बनाती है, जिसका एलएपी टेस्ट के जरिये पता चल सकता है.

परनीसियस एनीमिया में घातक रूप से खून की कमी हो जाती है. इसमें लाल रक्त कोशिकाओं में विटामिन बी-12 अवशोषित नहीं हो पाता है. ऐसे में एलएपी टेस्ट की मदद ली जाती है.

ऐसे किया जाता है परीक्षण



myUpchar के अनुसार, परीक्षण करने से 6 घंटे पहले कुछ भी खाना या पीना नहीं चाहिए. इसके अलावा यदि कोई रोगी दवा ले रहा है तो उसे लेने से भी मना किया जा सकता है क्योंकि इसके वजह से टेस्ट में परेशानी हो सकती है. यदि पहले से कोई दवा या इलाज करवा रहे हों तो इसके बारे में डॉक्टर को पूरी जानकारी देनी चाहिए.

परीक्षण करने के दौरान मरीज की बांहों से नसों में सुई डालकर खून का नमूना लिया जाता है. इसके बाद इन खून के इस सैंपल को लेबोरेटरी भेजा जाता है, जहां इसकी जांच कर इसमें एसी वैल्यू का पता लगाया जाता है.

इस तरह समझें एलएपी के रिजल्ट को

एलएपी परीक्षण का स्कोर 0 से 400 तक हो सकता है. इसमें 20 से 100 के बीच का स्कोर सामान्य माना जाता है. इसमें अल्कलाइन फास्फेट को मापा जाता है यदि यह ज्यादा या कम है, तो इसके अलग अलग कारण हो सकते हैं. इसके बारे में डॉक्टर से चर्चा करें.

एसी वैल्यू (अल्कलाइन फास्फेट) की मात्रा अधिक आने पर माइलेफिब्रोसिस, ल्यूकेमाइड प्रतिक्रिया, थ्रोंबोसाइटोसिस, पॉलीसायथीमियावेरा की समस्या हो सकती है.

एसी वैल्यू (अल्कलाइन फास्फेट) जब सामान्य से कम आता है तो यह सीएमएल, अप्लास्टिक एनीमिया और एनीमिया का संकेत देता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, एल्कलाइन फॉस्फेटेस टेस्ट पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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