लीच थेरेपी करेगी आपके गंजेपन और मुहांसों का इलाज!

लीच थेरेपी से गंजापन, मुंहासों और डायबिटीज जैसी बीमारियों का उपचार किया जाता है.
लीच थेरेपी से गंजापन, मुंहासों और डायबिटीज जैसी बीमारियों का उपचार किया जाता है.

प्राचीन मिस्त्र (Ancient Egypt) में लीच थेरेपी (Leech Therapy) का उपयोग तंत्रिका तंत्र की परेशानी, दांत, त्वचा और संक्रामक रोगों के इलाज के लिए किया जाता था.

  • Last Updated: July 9, 2020, 2:59 PM IST
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आमतौर पर औषधियों से ही शारीरिक बीमारियों (Physical Illnesses) को दूर किया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे कीड़े भी होते हैं, जो बीमारियों को दूर करने में उपयोग में लाए जाते हैं. ऐसा ही एक कीड़ा है लीच, जिसके द्वारा किए जाने वाले इलाज को लीच थेरेपी (Leech Therapy) कहा जाता है. आमतौर पर माना जाता है कि लीच शरीर में चिपक जाता है और इंसान के शरीर से खून चूस लेता है. यही कारण है कि कुछ इलाकों में इस कीड़े को लेकर खौफ भी रहता है, लेकिन शारीरिक व्याधियों को दूर करने में लीच का उपयोग बहुत ही सार्थक परिणाम देकर जाता है. इस दिनों कई बीमारियों को दूर करने में लीच थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है और मरीज को इससे आराम भी मिलता है. myUpchar से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल के अनुसार प्राचीन मिस्त्र (Ancient Egypt) में लीच थेरेपी का उपयोग तंत्रिका तंत्र की परेशानी, दांत, त्वचा और संक्रामक रोगों के इलाज के लिए किया जाता था. आइए जानते हैं इस थेरेपी के बारे में-

बहुत आसान है लीच थेरेपी
लीच थेरेपी बहुत ही आसान और प्रभावशाली है. इस थेरेपी में लीच को शरीर में ऐसे स्थान पर रखा जाता है, जहां दर्द या घाव रहता है. लीच तुरंत ही उस स्थान पर खून चूसना शुरू कर देती है. शरीर में मौजूद गंदे खून को लीच चूस लेती है तो धीरे-धीरे वह बीमारी दूर होने लगती है. लीच थेरेपी से मरीज का इलाज करने में करीब 45 मिनट का समय लगता है. इसका इस्तेमाल दाद-खुजली, कील -मुंहासे, गंजापन और डायबिटीज जैसी बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है.
आयुर्वेद में लीच थेरेपी


भारत में प्राचीन काल से लीच थेरेपी से इलाज किया जाता रहा है. शरीर के गंदे खून को निकालने के लिए लीच के इस्तेमाल की पुरानी परंपरा है. इसे रक्तमोक्षण विधि कहा जाता है. आयुर्वेद में भी इस विधि का उपयोग रक्त में मौजूद अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाता है.

गंजेपन से मुक्ति
लीच को जोंक भी कहा जाता है. इस थेरेपी से रक्त में मौजूद अशुद्धियों को निकालकर रक्त संचार बढ़ाने का काम किया जाता है. गंजेपन को दूर करने के लिए भी यह एक बेहतर उपचार माना जा सकता है. इसमें सिर पर जिस जगह पर बाल कम होते हैं, वहां लीच को रख दिया जाता है. लीच सिर के उस हिस्से से गंदे खून को चूसती है और वहां शुद्ध रक्त का संचार होने लगता है. इससे उस जगह नए बाल आने लगते हैं. जिन लोगों को रूसी की समस्या है, उनके लिए भी यह एक अच्छी थेरेपी है.

डायबिटीज में फायदेमंद
डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह बेहद ही फायदेमंद थेरेपी है क्योंकि लीच के लार में हिरूडीन नामक तत्व पाया जाता है, इसलिए इसे हिरूडीन थेरेपी भी कहा जाता है. यह तत्व शरीर में रक्त के थक्के को जमने नहीं देता है. डायबिटीज रोगियों के शरीर में खून गाढ़ा हो जाता है, इससे खून के थक्के जमने की आशंका होती है. लीच थेरेपी से डायबिटीज के मरीजों का इलाज करने से उनके शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ने लगता है.

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लीच थैरेपी लेते समय इन बातों का रखें ध्यान
लीच थेरेपी लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है. लीच थेरेपी से बहुत से लोगों को एलर्जी की भी शिकायत हो सकती है और जिन लोगों का इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर है, उन्हें भी इस थेरेपी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. लीच थेरेपी लेने से पहले इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि अगर किसी दवा का सेवन कर रहे हैं तो उसके बारे में डॉक्टर को जरूर बता दें अन्यथा लीच थेरेपी लेते समय कोई साइड इफेक्ट भी हो सकता है. myUpchar से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल के अनुसार जिन लोगों को एनीमिया, खून का थक्का जमने और हार्ट संबंधी कोई बीमारी है, उन्हें इस थेरेपी से बचना चाहिए.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, जोंक चिकित्सा क्या है, लाभ और नुकसान पढ़ें।

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