कम चलने-फिरने और बिस्तर पर ज्यादा समय बिताने से हो सकती है बेडसोर की समस्या, जानें कैसे

कम चलने-फिरने और बिस्तर पर ज्यादा समय बिताने से हो सकती है बेडसोर की समस्या, जानें कैसे
कम चलना-फिरना और सीमित गतिविधि के कारण त्वचा पर सामान्य से ज्यादा दबाव खून के बहाव को रोक देता है, जिससे बेडसोर हो जाता है.

बेडसोर (Bedsore) को प्रेशरसोर या डेसुबिटस अल्सर के रूप में भी जाना जाता है, इसमें लगातार या ज्यादातर बेड पर लेटे रहने की वजह से त्वचा (Skin) पर सामान्य से ज्यादा दबाव पड़ता है.

  • Myupchar
  • Last Updated : December 2, 2020, 6:54 am IST
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    किसी चिकित्सीय हालत के कारण जो लोग ज्यादा चल-फिर नहीं पाते हैं या जिन्हें ज्यादातर समय बिस्तर (Bed) पर ही बिताना अच्छा लगता है, उनमें बेडसोर (Bedsore) का जोखिम बढ़ जाता है. बेडसोर को प्रेशरसोर या डेसुबिटस अल्सर के रूप में भी जाना जाता है, इसमें लगातार या ज्यादातर बेड पर लेटे रहने की वजह से त्वचा पर सामान्य से ज्यादा दबाव पड़ता है जिसके कारण त्वचा के ऊतकों को नुकसान होने लगता है. आप भले ही क्यों ना किसी शारीरिक स्थिति की वजह से बिस्तर पर ज्यादा देर रहें ऐसे में सिर के पीछे, कंधे की हड्डियों पर, कूल्हे, रीढ़ की हड्डी या टेलबोन पर, एड़ी, टखनों या घुटनों के पीछे की त्वचा ऊतकों को नुकसान होने लगता है.

    बेडसोर के यह हो सकते हैं लक्षण



    myUpchar के अनुसार, त्वचा के रंग या बनावट में असामान्य बदलाव, सूजन, मवाद जैसे लक्षण दिखते हैं. इसके अलावा त्वचा पर ज्यादा ठंड या गरम महसूस हो सकती है. इसमें त्वचा और ऊतकों में हुई क्षति के कारण रूखी त्वचा, लाल चकत्ते और मांसपेशियों व हड्डियों को भी नुकसान हो सकता है.

    त्वचा पर ज्यादा दबाव पड़ना है कारण

    कम चलना-फिरना और सीमित गतिविधि के कारण त्वचा पर सामान्य से ज्यादा दबाव खून के बहाव को रोक देता है, जिससे बेडसोर हो जाता है. इसके अलावा अगर त्वचा किसी कपड़े से रगड़ खा जाए या घिस जाए तो ऐसे में भी बेडसोर की समस्या हो सकती है.

    ये है इलाज

    त्वचा के छिलने से भी यह समस्या हो सकती है. बेडसोर है या नहीं, यह जानने के लिए डॉक्टर त्वचा की बारीकी से जांच कर सकते हैं. इलाज के तौर पर वे सबसे पहले दबाव और रगड़ की वजह को दूर करने की कोशिश करेंगे जैसे कि लेटने के दौरान हर दो घंटे में शरीर की मुद्रा को बदलते रहना. इसके अलावा यदि जख्म हुए हैं तो उनकी सफाई और मरहम-पट्टी करने की जरूरत होती है. यदि त्वचा फटी न हो तो प्रभावित हिस्से को क्लींजर से धोकर साफ करना चाहिए. खुले घावों पर पट्टी बदलते समय हर बार जख्मों को नमक के पानी से साफ करना चाहिए. पट्टी लगाने से संक्रमण का खतरा कम होता है. इसके अलावा मृत और संक्रमित ऊतकों को हटाना भी जरूरी है. डॉक्टर दर्द कम करने, संक्रमण का इलाज करने के लिए दवाएं दे सकते हैं. बेडसोर की समस्या ज्यादा होने पर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है.

    बेडसोर से ऐसे बचें

    बेडसोर की समस्या से बचने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसके लिए सबसे पहले त्वचा पर पड़ने वाले दबाव से बचना जरूरी है, इसके लिए समय समय पर मुद्रा बदलते रहना अच्छा विकल्प है. जो लोग शारीरिक स्थिति की वजह से बिस्तर पर हैं उनके लिए य​दि संभव हो तो व्हीलचेयर उपलब्ध कराना चाहिए. कुछ व्हीलचेयर झुकने और हिलने-डुलने में भी मदद कर सकती है. व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर 15 मिनट में दबाव वाली जगह को रिलैक्स मिलता रहे. शरीर का ऊपरी हिस्सा मजबूत हो तो व्हीलचेयर पुशअप्स करें यानी अपने हाथों से शरीर को कुर्सी की सीट पर जोर लगाएं ताकि शरीर का ऊपरी हिस्सा उठ सके. बिस्तर पर लेटते हुए ऐसे तकियों और गद्दों का इस्तेमाल करें जो शरीर पर दबाव को कम करें और सही मुद्रा रखने में मदद करें.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, बेडसोर (दबाव अल्सर) पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.