सूर्य नमस्कार के साथ करें ये आसन, बॉडी होगी रिलैक्स, गायब होगा तनाव

सूर्य नमस्कार के साथ करें ये आसन, बॉडी होगी रिलैक्स, गायब होगा तनाव
सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका जानें

योग करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए...

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योग जीवन का दर्शन है. एक सेहतमंद दिन की शुरुआत योग (Yoga) और एक्सरसाइज के साथ होनी चाहिए. कोरोना काल (Corona) में शरीर को फिट (Fit) और हेल्दी (Healthy) रखने के लिए योग का अभ्यास करना बहुत जरूरी है. दिनभर में कम से कम एक घंटा योग पर जरूर दें. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. वर्क फ्रॉम होम करने वालों को तो खासतौर पर इन अभ्यासों को करना चाहिए. सूर्य असीम शक्ति का स्त्रोत है. ऐसे में सूर्य नमस्कार शरीर के लिए काफी लाभकारी होता है. आइए आज हम 5 राउंड में सूर्य नमस्कार करते हैं और इसके साथ ही कुछ प्राणायाम और सांसों के व्यायाम भी करेंगें. अंत में भस्त्रिका, उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करें. इसके बाद दोनों हाथों को रब करते हुए चेहरे पर लगायें और ओम शब्द का उच्चारण जरूर करें.

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskār ) : सूर्य नमस्कार को सभी योगासनों में सबसे ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है. सूर्य नमस्कार ऐसा योग है जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है. पर सूर्य नमस्कार को करने का सही तरीका बहुत कम लोग जानते हैं.

प्रणाम आसन:
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पंजे जोड़कर अपने आसन मैट के किनारे पर खड़े हो जाएं. फिर दोनों हाथों को कंधे के समान्तर उठाएं और पूरा वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. दोनों हथेलियों के पृष्ठभाग एक दूसरे से चिपकाए रहें और नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं.
हस्ततुन्नासन:



इस आसन को करने के लिए गहरी सांस भरें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं. अब हाथ और कमर को झुकाते हुए दोनों भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं.



हस्तपाद आसन:

इस आसन में बाहर की तरफ सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की तरफ नीचे की ओर झुकें. अपने दोनों हाथों को कानों के पास से घुमाते हुए ज़मीन को छूएं.

अश्व संचालन आसन:

इस आसन में अपनी हथेलियों को ज़मीन पर रखें, सांस लेते हुए दाएं पैर को पीछे की तरफ ले जाएं और बाएं पैर को घुटने की तरफ से मोड़ते हुए ऊपर रखें. गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएं और कुछ देर इसी स्थिती में रहें.

पर्वत आसन:

इस आसने को करने के दौरान सांस लेते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाएं और पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखें और अपने हाथ ज़मीन पर सीधे रखें.
अष्टांग नमस्कार: इस आसन को करते वक्त अपने दोनों घुटने ज़मीन पर टिकाएं और सांस छोड़ें. अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएं और अपनी छाती और ठुड्डी को ज़मीन से छुआएं और कुछ देर इसी स्थिति में रहें.

भुजंग आसन:

इस आसन को करते वक्त धीरे-धीरे अपनी सांस छोड़ते हुए छाती को आगे की और ले जाएं. हाथों को ज़मीन पर सीधा रखें. गर्दन पीछे की ओर झुकाएं और दोनों पंजों को सीधा खड़ा रखें.

इसी प्रक्रिया को पूरे 5 बार दोबार से रिपीट करना है.

शवासन:
मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं और आंखें मूंद लीजिए. पैरों को आराम की मुद्रा में हल्का खोल कर रखें. पैर के तलवे और उंगलियां ऊपर की तरफ होनी चाहिए. हाथों को बगल में रखकर हथेलियों को ऊपर की तरफ खोलकर रखें. पैर से लेकर शरीर के हर भाग पर ध्यान केंद्रित करते हुए धीरे-धीरे सांस अन्दर बाहर करें. धीरे धीरे इसे कम करें. जब शरीर में राहत महसूस हो तो आंखों को बंद करके ही थोड़ी देर उसी मुद्रा में आराम करें.

हनुमान आसन:
हनुमान आसन के लिए घुटनों के बल खड़े हो जाएं, दोनों घुटनो में कुछ अंतर रखे. अपने दाहिने पंजे को आगे बढ़ाएं और इस तरह रखें कि एड़ी जमीन को टच करती रहे. अब सांस छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी भाग को आगे की ओर झुकाएं और अपने हाथ की उंगलियों से जमीन को छुएं. धीरे धीरे बांये घुटने को पीछे की ओर ले जाएं, पंजे को इस प्रकार रखे कि तलवे ऊपर छत की तरफ हों. दाहिने पैर को आगे बढ़ाते हुए पूरा जमीन पर रख दें. अगर आपको घुटने कमर की दिक्कत हो तो ये व्यायाम ना करें.

भस्त्रिका: सबसे पहले ध्यान या वायु मुद्रा में बैठकर भस्त्रिका व्यायाम करें. यह मुख्य रूप से डीप ब्रीदिंग है. करीब पांच मिनट तक रोजाना डीप ब्रीदिंग करें, इससे आपका रेस्पिरेटरी सिस्टम मजबूत हो जाएगा.

उज्जायी प्राणायाम: सुखासन में बैठ जाएं. अपनी जीभ को नाली की तरह बनाकर होठों के बीच से हल्का सा बाहर निकालें. बाहर निकली हुई जीभ से अंदर की सांस को बाहर निकालें. अब धीरे-धीरे गहरी सांस लें, सांस को जितना हो सके उतनी देर तक अंदर रखें. शरीर को थोड़ा ढ़ीला छोड़कर सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालें. आप इस आसन को लेटकर या बैठकर भी कर सकते हैं.
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