मेइज सिंड्रोम शरीर के इन महत्वपूर्ण हिस्सों को बुरी तरह करता है प्रभावित, जानें लक्षण

आंख, जबड़े, जीभ को प्रभावित करता है मेइज सिंड्रोम

आंख, जबड़े, जीभ को प्रभावित करता है मेइज सिंड्रोम

मेइज सिंड्रोम (Meige Syndrome) डिस्टोनिया मूवमेंट डिसऑर्डर है, इसका मतलब है कि शरीर के किसी हिस्से में सामान्य तरह से गतिविधि नहीं हो सकती है. इसके लक्षण आमतौर पर 40 से 70 वर्ष के बीच शुरू होते हैं...

  • Last Updated: November 23, 2020, 10:28 AM IST
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मेइज सिंड्रोम डिस्टोनिया का एक दुर्लभ रूप है. डिस्टोनिया एक नर्वस सिस्टम यानी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ा डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को अक्सर आंख, जबड़े, जीभ और चेहरे की निचले हिस्से की मांसपेशियों में ऐंठन होती है. यह ऐंठन किसी बिजली के झटके की तरह महसूस हो सकती है. चूंकि यह एक मूवमेंट डिसऑर्डर है, तो इसका मतलब है कि शरीर के किसी हिस्से में सामान्य तरह से गतिविधि नहीं हो सकती है. इसके लक्षण आमतौर पर 40 से 70 वर्ष के बीच शुरू होते हैं और यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक सामान्य है.

दो तरह के होते हैं मेइज सिंड्रोम

myUpchar के अनुसार, मेइज सिंड्रोम दो तरह के डिस्टोनिया का मिश्रण है. एक आंख से जुड़ा डिस्टोरिया यानी ब्लेफरोस्पैजम और दूसरा मुंह, जीभ और जबड़े से जुड़ा डिस्टोनिया यानी ओरोमैडिब्यूलर. इन डिसऑर्डर्स में तेज दर्द होता है और व्यक्ति पलकें या जबड़ा खोलने में परेशानी महसूस करता है. इसके पीछे कई आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक हो सकते हैं. मस्तिष्क के अंदर पाई जाने वाली संरचनाओं के समूह में नुकसान होने पर भी यह स्थिति हो सकती है. कुछ मामलों में पार्किंसन जैसे रोग को ठीक करने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं को भी इसकी वजह माना गया है.

मेइज सिंड्रोम के लक्षण
ब्लेफरोस्पैजम की समस्या तनाव, चमकदार रोशनी, वायु प्रदूषण के कारण हो सकती है. इसमें पहले एक आंख प्रभावित होती है और फिर दूसरी आंख पर भी धीरे-धीरे असर होता है. मांसपेशियों के सिकुड़ने और ऐंठन से व्यक्ति को पलकें खोलने में परेशानी होती है. इसमें अंधेपन का जोखिम भी बढ़ जाता है. ओरोमैंडिब्यूलर डिस्टोनिया में जबड़े और जीभ की मांसपेशियों में सिकुड़न आती है. इसकी वजह से मुंह खोलने या बंद करने में परेशानी हो सकती है. इसमें दांत पीसने जैसी समस्या भी खड़ी हो सकती है. इस स्थिति में जबड़े में दर्द, चेहरे पर दर्द और सिरदर्द हो सकता है.

इलाज के ये हैं विकल्प

वर्तमान में मेइज डिसऑर्डर का पता लगाने के लिए कोई टेक्नोलॉजिकल डायग्नोस्टिक टूल्स नहीं हैं. यह ब्लड केमिस्ट्री एनालिसिस या रेडियोलॉजिकल इमेजिंग जैसे एमआरआई या सीटी स्कैन का इस्तेमाल करके पहचाना नहीं जा सकता है. डिस्टोनिया से जुड़ी बीमारियों के लिए वर्तमान में कोई इलाज नहीं है लेकिन इसके उपचार का लक्ष्य लक्षणों को कम करना है. चेहरे की मांसपेशियों से जुड़े डिसऑर्डर को ठीक करने के लिए बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन को सबसे प्रभावी माना जाता है, लेकिन यह प्रभाव अस्थाई है. इसके अलावा तेज धूप से बचना भी इस बीमारी का एक इलाज है. यदि तेज धूप में निकलना पड़े तो धूप वाला चश्मा और टोपी पहनने से आपको थोड़ी देर राहत मिल सकती है. तेज रोशनी के कारण जिन्हें पलकें खोलने में परेशानी होती है उनके लिए धूप वाला चश्मा एक अच्छा उपाय है. उचित समय पर इसके लक्षणों को नियंत्रित कर इलाज में मदद मिल सकती है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, मेइज सिंड्रोम पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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