हर इंसान सालभर में खा जाता है 73 हजार प्लास्टिक के टुकड़े- रिसर्च में खुलासा

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Updated: September 5, 2019, 12:04 PM IST
हर इंसान सालभर में खा जाता है 73 हजार प्लास्टिक के टुकड़े- रिसर्च में खुलासा
seafood और बोतलबंद पानी कर रहे हैं बीमार

मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना का शोध बताता है कि एक इंसान साल भर में प्लास्टिक के 73 हजार बारीक कण निगल रहा है, जो उसे बेहद बीमार बना सकते हैं.

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  • Last Updated: September 5, 2019, 12:04 PM IST
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मौजूदा दौर में हर इंसान रोजाना अंजाने में माइक्रोप्लास्टिक के 200 टुकड़े कंज्यूम कर रहा है. इसके चलते आंतों में इन्फेक्शन फैल रहा है जो हमें बीमार कर रहा है. ऑस्ट्रिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना (Medical University of Vienna) और इंवायरमेंट एजेंसी ऑफ़ आस्ट्रिया (Environment Agency Austria) की तरफ से जारी एक ताजा शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है.

सीफूड और बोतलबंद पानी है वजह
इस रिसर्च में कहा गया है कि प्लास्टिक के ये बारीक कण मानव शरीर में पहुंचकर जहरीले रसायन में तब्दील हो सकते हैं. मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियना का शोध बताता है कि एक इंसान साल भर में प्लास्टिक के 73 हजार बारीक कण निगल रहा है. Medical University of Vienna और Environment Agency Austria ने विश्व भर के कई देशों जैसे फ़िनलैंड (Finland), इटली (Italy), जापान (Japan), और यूनाइटेड किंगडम (UK) के चुनिंदा लोगों को अपने शोध का हिस्सा बनाया है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंसान के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंचने का सबसे मुख्य जरिया सी-फ़ूड (seafood) और बोतलबंद पानी है. इनका सेवन करने के चलते हर दिन हमारी आंतों में माइक्रोप्लास्टिक का एक बड़ा हिस्सा पहुंच रहा है. यह प्लास्टिक आंतों में इन्फेक्शन पैदा कर रहा है.

स्टूल टेस्ट रिपोर्ट में प्रति दस ग्राम मानव मल में मिले 20 माइक्रोप्लास्टिक टुकड़े

पर्यावरण से जुड़ी साइट अर्थ.कॉम पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. फिलिप श्वॉबल (Dr. Philipp Schwabl) का कहना है कि प्रत्येक दिन एक इंसान माइक्रोप्लास्टिक के 200 पार्टिकल का सेवन कर लेता है. यानी एक साल में यह आंकड़ा 73,000 माइक्रोप्लास्टिक कण के बराबर हो जाता है. बोतलबंद पानी के अलावा seafood का सेवन भी इसका मुख्य कारण है और इसके पीछे वजह भी इंसान ही है. दरअसल समुद्री जीव समुद्र में फेंके जाने वाले कचरे को खा जाते हैं और बाद में जब इंसान इनका सेवन करता है तो यही कचरा हमारे भोजन कि थालियों में पहुंच जाता हैं. शोधकर्ताओं को औसतन प्रति दस ग्राम मानव मल में 20 माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े मिले.

शोधकर्ता डॉ. फिलिप का कहना है कि रिसर्च में पहली बार स्टूल टेस्ट को अध्ययन का जरिया बनाया गया है. मानव मल के अध्ययन में शरीर में पहुंची प्लास्टिक की मात्रा का खुलासा हुआ. शोधकर्ता लंबे समय से इस विषय पर शोध कर रहे थे कि आखिरकार प्लास्टिक मानव शरीर में पहुंचता कैसे हैं? रिसर्च में यह बात स्पष्ट तौर पर सामने आई. रिसर्च में बताया गया है कि ये प्लास्टिक के महीन कण शरीर में पहुंचकर जहरीले रसायन में तब्दील हो सकते हैं. साथ ही ये ब्लड सर्कुलेशन के जरिये लिवर समेत शरीर के कई हिस्सों में पहुंच जाते हैं.

डॉ. फिलिप के मुताबिक, मल में माइक्रोप्लास्टिक मिलने के लिए प्लास्टिक की बोतलें काफी हद तक जिम्मेदार हैं. वैज्ञानिकों की टीम ने प्लास्टिक के सात अन्य रूपों का भी पता लगाया है जिनके जरिये मानव शरीर में माइक्रोप्लास्टिक के कण पहुंच रहे हैं. मसलन प्रदूषित हवा भी इसका एक जरिया है क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक के ये कण धूल में भी मौजूद हैं जो सांस लेने पर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. माइक्रोप्लास्टिक्स का आकार 5 मिमी से भी कम होता है.
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यह प्लास्टिक आंतों में इन्फेक्शन पैदा कर रहा है.
यह प्लास्टिक आंतों में इन्फेक्शन पैदा कर रहा है.


दुनिया भर में प्लास्टिक के उत्पादों का बेहद तेजी से साल दर साल इजाफा हो रहा है, जिसकी रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चिंतित है . यह रिसर्च नॉनवेज मुख्य तौर पर seafood का सेवन करने वालों पर किया गया है. रिपोर्ट में सामने आया है कि समुद्री जीव जैसे- ट्यूना फिश, झींगा मछली इत्यादि के सेवन से माइक्रोप्लास्टिक के कण शरीर में पहुंच रहे हैं. पिछले कुछ सालों में माइक्रोप्लास्टिक्स समुद्री पानी, भोजन, हवा और पीने के बोतलबंद पानी और नल के पानी में भी पाया गया है.

पिछले महीने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे रोकने की पहल की थी. संगठन ने पेयजल से माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने वाले पर इंसान में होने वाले खतरों का विश्लेषण किया है. डब्ल्यूएचओ (World Health Organization) ये पता लगाएगा कि सबसे अधिक माइक्रोप्लास्टिक के कण कहां से आ रहे हैं और पेय जल में जाने से इन्हें कैसे रोका जा सकता है.

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First published: September 4, 2019, 2:23 PM IST
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