National Doctor's Day: कोविड-19 काल में डॉक्टर्स से फोन पर सलाह लेना है कितना फायदेमंद, जानें

National Doctor's Day: कोविड-19 काल में डॉक्टर्स से फोन पर सलाह लेना है कितना फायदेमंद, जानें
डॉक्टर्स डे 2020:

नेशनल डॉक्टर्स-डे (National Doctor's Day) :कोविड-19 (Covid 19) महामारी की वजह से लोगों को अस्पताल जाकर अपना इलाज करवाने में डर लग रहा है. साथ ही में सरकार ने भी वैसे लोग जिन्हें पहले से या लंबे समय से कोई बीमारी है उन्हें घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दी है.

  • Last Updated: July 1, 2020, 2:32 PM IST
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नेशनल डॉक्टर्स-डे (National Doctor's Day) : कोविड-19 (Covid 19) महामारी ने दुनियाभर के हेल्थकेयर सिस्टम को बुरी तरह से प्रभावित किया है. कोविड-19 के कंफर्म्ड मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी की वजह से डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों की देखभाल करने के लिए ओवरटाइम काम करना पड़ रहा है. ऐसी स्थिति में टेलिकंसल्टेशन यानी फोन पर ही डॉक्टरों से परामर्श लेना एक तरह से वरदान साबित हो रहा है क्योंकि इस समय बहुत से लोग अपनी चिकित्सीय जरूरतों के बावजूद अस्पताल नहीं जा पा रहे हैं या फिर बहुत से लोग संक्रमित होने के डर की वजह से अस्पताल जाना नहीं चाहते हैं. 1 जुलाई को सेलिब्रेट किए जाने वाले डॉक्टर्स डे के मौके पर हमने बात की गाइनैकॉलजिस्ट डॉ अर्चना निरूला से कि इस महामारी के समय फोन पर ही मरीजों को परामर्श देने का उनका अनुभव कैसे रहा.

डॉक्टर्स डे 2020:




क्या इस महामारी के समय भी आप मरीजों को परामर्श दे रही हैं?



इस महामारी की वजह से लोगों को अस्पताल जाकर अपना इलाज करवाने में डर लग रहा है. साथ ही में सरकार ने भी वैसे लोग जिन्हें पहले से या लंबे समय से कोई बीमारी है उन्हें घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दी है. ऐसे सभी लोगों की मदद करने के लिए मैं लॉकडाउन के पहले दिन से ही टेलिकंसल्टेशन्स दे रही हूं. फोन पर परामर्श देने का यह तरीका मरीजों को संक्रमित होने के खतरे से बचाते हुए उनके सवालों और परेशानियों को सुलझाने का सबसे असरदार तरीका है. चूंकि कुछ अस्पतालों में कोविड-19 मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है इसलिए वैसे लोग जिन्हें दूसरी बीमारियां हैं उन्हें समय पर सही परामर्श नहीं मिल पा रहा क्योंकि बहुत से डॉक्टरों को सिर्फ कोविड-19 ड्यूटी में ही लगाया गया है. मैं फोन कॉल, विडियो कॉल और ईमेल के जरिए मरीजों को परामर्श दे रही हूं.

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कोविड-19 की इस स्थिति का आप निजी तौर पर कैसे सामना कर रही हैं?
पर्सनल लेवल पर बात करें तो यह स्थिति बिलकुल ठीक नहीं है. लॉकडाउन के बाद से जीवन पूरी तरह से बदल गया है. मेरे घर पर भी बुजुर्ग लोग हैं और बाकी लोगों की ही तरह मुझे भी हर वक्त उनकी सेहत की चिंता रहती है. एक डॉक्टर होने के नाते मैं रेग्युलर ओपीडी मरीजों को नहीं देख पा रही हूं जिन्हें मैं लॉकडाउन से पहले देखती थी. मरीज इस वक्त अस्पताल या क्लिनिक जाने के नाम से ही घबराए हुए हैं. सरकारी नियमों के हिसाब से मैंने खुद भी मरीजों से सीधा संपर्क बहुत सीमित कर रखा है. मैं सिर्फ इमरजेंसी केस ही देखती हूं जब जरूरत होती है. यह पूरा अनुभव काफी निराशा भरा भी है क्योंकि मैंने अपनी पूरी लाइफ में कभी क्लिनिकल स्पेस से इतने दिनों तक दूरी बनाकर नहीं रखी. लेकिन मुझे खुशी है कि इतने सारे लोग अपने सवाल और परेशानियों को टेलिकंसल्टेशन के माध्यम से मुझ तक पहुंचा रहे हैं.

इस महामारी के दौरान आपके पास किस तरह के सवाल आ रहे हैं लोगों के?
गाइनैकॉलजिस्ट होने के नाते मुझे बहुत सी गर्भवती महिलाओं के सवाल मिल रहे हैं जो प्रसवपूर्व देखभाल से जुड़े हैं जिसमें गर्भावस्था के दौरान महिला को उचित देखभाल की जरूरत होती है. ये सारी चीजें बेहद जरूरी हैं जैसे प्रेगनेंसी में लगने वाले टीके, दवाइयां, बच्चे की गतिविधियों को मॉनिटर करना आदि जिसमें किसी भी तरह की देरी नहीं की जा सकती. इस संक्रामक बीमारी की वजह से मैं इन महिलाओं को फोन पर ही परामर्श देती हूं जब तक कि उनसे मिलना बहुत जरूरी न हो जाए क्योंकि गर्भवती महिलाएं भी कोविड-19 के हाई रिस्क ग्रुप में आती हैं. ये महिलाएं जब एक तिमाही से दूसरी तिमाही में जाती हैं तो उन्हें कौन सी दवा प्रिस्क्राइब करनी है और कौन सी जटिलताएं हो सकती हैं इस बारे में मैं उन्हें बताती हूं.

क्या आपने कोविड-19 के लक्षण वाले किसी मरीज को परामर्श दिया है?
चूंकि यह बीमारी बाकी वायरल इंफेक्शन्स से मिलती जुलती है इसलिए मेरे पास भी कई लोगों के सवाल आए जिन्होंने कोविड-19 जैसे लक्षणों की शिकायत की जिसमें सर्दी, खांसी, गला खराब और सांस लेने में तकलीफ जैसी चीजें शामिल हैं. हल्की सर्दी या बुखार वाले लोग भी पैनिक हो रहे हैं कि कहीं उन्हें कोविड-19 तो नहीं हो गया. मैं अपने सभी मरीजों को यही सलाह दे रही हूं कि अगर उनका बुखार एक या दो दिन में ठीक हो जाता है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि मुझे ऐसे लोगों की भी कॉल आयी जिन्हें सांस से जुड़ी गंभीर समस्या हो रही थी, तेज बुखार था और स्वाद और सूंघने की क्षमता खत्म हो गई थी. ऐसे लोगों को मैंने सेल्फ-क्वारंटीन करने की सलाह दी और उन्हें जिंक, विटामिन सी, एंटी एलर्जिक दवाएं और कई बार आइवरमेक्टिन भी प्रिस्क्राइब किया. जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं उन्हें पल्स ऑक्सीमीटर का भी इस्तेमाल करना चाहिए. प्रिस्क्रिप्शन लेटर के साथ ही मैं नैशनल कोविड हेल्पलाइन नंबर भी देती हूं ताकि मरीज लक्षण के बिगड़ने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क कर पाएं.

इस स्वास्थ्य संकट के समय आप लोगों को क्या सलाह देंगी?
कोई भी व्यक्ति अपनी सेहत को ठीक रखने और दुनियाभर के डॉक्टरों पर बढ़ रहे बोझ को कम करने के लिए जो सबसे अहम चीज कर सकता है वो ये है कि अपने घर से बाहर निकलने के एक्सपोजर को जितना हो सके कम करें. सभी जरूरी ऐहतियाती कदम उठाएं और अपने लक्षणों पर नियमित रूप से नजर बनाए रखें. अगर आपके शरीर के तापमान में थोड़ा सा भी अंतर आता है तो आपकी बीमारी को डायग्नोज करने और आपका इलाज करने में डॉक्टरों को बेहतर मदद मिल सकती है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोविड-19 से जुड़े सबसे आम 32 सवालों के बारे में पढ़ें।

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