National Pollution Control Day 2020: वायु प्रदूषण से हृदय और फेफड़ों सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा

National Pollution Control Day 2020: वायु प्रदूषण से हृदय और फेफड़ों सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा
वायु प्रदूषण और कोविड-19 का खतरा एक साथ होने पर मृत्यु दर बढ़ सकती है.

National Pollution Control Day 2020: भारत में लगातार बढ़ता जा रहा वायु प्रदूषण (Air Pollution), चिंता का विषय बना हुआ है. इसे कई तरह के गंभीर रोग पनपने लगते हैं.

  • Myupchar
  • Last Updated : December 2, 2020, 2:37 pm IST
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    National Pollution Control Day 2020: भारत में आपदाओं का जब भी जिक्र होगा, तब भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) के बारे में जरूर चर्चा होगी. तारीख 2 दिसंबर, साल था 1984, इसी दिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित ‘यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड’ से करीब 30 टन जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस (Methyl Isocyanate Gas) का रिसाव हुआ, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए थे और हजारों लोगों की जान चली गई थी. इस आपदा में मारे गए लोगों को याद करने के लिए हर साल 2 दिसंबर को भारतीय राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण द्वारा ‘राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस’ (National Pollution Control Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य देश को प्रदूषण मुक्त बनाने वाले अभियानों बढ़ावा देना है.

    साल 2020 में यह दिन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस समय पूरी दुनिया कोविड-19 जैसे वैश्विक स्वास्थ्य संकट से जूझ रही है. ऐसे में इस बात पर विशेष गौर करने की जरूरत है कि वायु प्रदूषण हमारे जीवन पर कितना गहरा प्रभाव डालता है. इस साल 2 दिसंबर को कोविड-19 और वायु प्रदूषण के बीच की खतरनाक कड़ी के बारे में जानना और लोगों को इस बारे में जागरूक करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. आइए राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर विशेष इस लेख में समस्या को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं.



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    भारत में वायु प्रदूषण की स्थिति

    भारत में लगातार बढ़ता जा रहा वायु प्रदूषण, चिंता का विषय बना हुआ है. सर्दियों के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है. इस मौसम में हर बार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में भारी गिरावट देखने को मिलती है. जिन राज्यों में फसलों के अवशेषों को जलाया जाता है उनमें स्थिति और भी गंभीर है. इसके अलावा इसी दौरान दीपावली का त्योहार भी मनाया जाता है. कई राज्यों द्वारा पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाजवूद इन्हें जलाने के कारण एक्यूआई का स्तर और भी गिर गया. बाहरी प्रदूषण के अलावा अब इनडोर वायु प्रदूषक भी बढ़ते जा रहे हैं जिससे स्वच्छ हवा का स्तर प्रभावित हो रहा है.

    ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज प्रोजेक्ट के तहत स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2020 (एसओजीए 2020) के आंकड़ों के अनुसार भारत में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) वायु प्रदूषण का जोखिम बहुत अधिक है. आंकड़ों से पता चला है कि बाहरी और घरेलू पीएम प्रदूषण के कारण देश में हर साल एक लाख से अधिक शिशुओं की मृत्यु हो जाती है. इसके अलावा साल 2019 में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं जैसे स्ट्रोक, हृदय रोग, दिल का दौरा, मधुमेह, फेफड़ों के कैंसर आदि के चलते 1.67 मिलियन यानी 16.7 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई. वायु प्रदूषण की इस स्थिति से पता चलता है कि भारत में पहले से ही वायु प्रदूषकों का जोखिम काफी ज्यादा है, जो लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का कारण बनती जा रही है.

    वायु प्रदूषण और कोविड—19 का क्या संबंध है?

    साल 2020 में पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी के प्रकोप से जूझ रही है. कोविड-19 एक श्वसन संबंधित वायरल संक्रमण है जिसका फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है. पर्यावरणीय स्वास्थ्य को लेकर साल 2003 में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि वायु प्रदूषण का चीन में फैले सार्स महामारी के साथ अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के संबंध थे. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि जिस आबादी में वायु प्रदूषण का खतरा अधिक होता है वहां पर यह वायरस कई प्रकार के गंभीर रोगों का कारण बन सकता है.

    इसके अलावा जून 2020 में हुए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इटली के जिन हिस्सों में वायु प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक था, वहां कोविड-19 रोगियों के मामले भी ज्यादा देखने को मिले. अध्ययन से स्पष्ट रूप से पता चला है कि वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से युवाओं और स्वस्थ लोगों में भी श्वसन संबंधी क्रोनिक समस्याएं विकसित हो सकती हैं जो लोगों को गंभीर रूप से कोविड-19 संक्रमण के चपेट में ला सकती हैं. अध्ययनों से संकेत मिला है कि पीएम प्रदूषण और कोविड-19 से जुड़े जोखिम और भी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकते हैं.

    क्या पीएम प्रदूषण, सार्स-सीओवी-2 से फ्यूज हो सकता है?

    नवंबर 2020 में हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं द्वारा ‘साइंस एडवांस’ में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया. इसमें बताया गया कि उच्च पीएम प्रदूषण के संपर्क में लंबे समय तक रहने वाले लोगों में कोविड-19 संक्रमण की गंभीर जटिलताओं और उससे मरने का खतरा लगभग 11 फीसदी बढ़ जाता है. अध्ययन से खुलासा हुआ है कि वायु प्रदूषण और कोविड-19 का खतरा एक साथ होने पर मृत्यु दर बढ़ सकती है.

    सितंबर 2020 में पर्यावरण अनुसंधान में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन का निष्कर्ष और भी खतरनाक है. इतालवी शोधकर्ताओं की एक टीम का अनुमान है कि पीएम कणों में सार्स-सीओवी-2 की मौजूदगी हो सकती है. सार्स-सीओवी-2 का आरएनएस और इसकी जीन संरचना ऐसी है जो पीएम कणों के साथ आसान से फ्यूज हो सकती है. इस तरह से पीएम और वायु प्रदूषण का कारण बनने वाले एयरोसोल, कोविड—19 के वाहक के रूप में काम कर सकते हैं. इसके अलावा इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायरनमेंट रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में बताया गया कि पीएम में सार्स-सीओवी-2 आरएनएस की खोज करने से शोधकर्ताओं को यह अनुमान लगाने में मदद कर सकती है कि कोविड-19 का अगला प्रकोप कहां हो सकता है?

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    उपरोक्त बिंदुओं से स्पष्ट है कि कोविड-19 और वायु प्रदूषण का संबध गहरा है. जैसे जैसे इस बारे में और अधिक शोध किए जाएंगे, वैज्ञानिकों को इस लिंक के बारे में और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती जाएगी. तब तक नीति निर्धारकों और स्वास्थ्य एजेंसियों को वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि न केवल दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सके बल्कि दुनियाभर में फैल रहे कोविड-19 के प्रभाव को भी नियंत्रित करने में कामयाबी मिल सके.