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अबॉर्शन के बाद मानसिक तकलीफ का कर रही हैं सामना? इस तरह खुद का रखें ख्याल

अबॉर्शन जितना शारीरिक रूप से महिलाओं को तकलीफ देता है. उससे कहीं ज्यादा मानसिक रूप से दिक्कत होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अबॉर्शन जितना शारीरिक रूप से महिलाओं को तकलीफ देता है. उससे कहीं ज्यादा मानसिक रूप से दिक्कत होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अबॉर्शन जितना शारीरिक रूप से महिलाओं को तकलीफ देता है. उससे कहीं ज्यादा मानसिक रूप से औरतों को दिक्कत होती है.

  • News18Hindi
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    After abortion take care of health- विज्ञान की तरक्की का ही नतीजा है की होने वाले बच्चे में कोई दोष( Deformity) या दिक्कत होती है तो उस बारे में भी पता चल जाता है.  ऐसे में भी कई बार डॉक्टर सलाह देते हैं कि अबॉर्शन(Abortion)  कराना ही सही होगा. इसके अलावा कई बार दुर्घटना के कारण भी गर्भपात कराना पड़ता है. खराब स्वास्थ्य के कारण महिलाओं को अबॉर्शन का सामना करना पड़ सकता है. वजह कोई भी हो अबॉर्शन जितना शारीरिक रूप से महिलाओं को तकलीफ देता है. उससे कहीं ज्यादा मानसिक रूप से औरतों को दिक्कत होती है. लेकिन इन बातों से इस तकलीफ को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.

    क्या करें ऐसी अवस्था में

    कई बार मेडिकल कारण से भी औरतों को गर्भपात यानी अबॉर्शन कराना पड़ता है. कारण कुछ भी हो ये शारीरिक कष्ट के साथ मानसिक रूप से भी काष्टदायक होता है. ऐसी स्थिति में ढेर सारा आराम करें. खुद को व्यस्त रखें. डॉक्टर की दी सलाह का नियम से पालन करें.गर्भपात के बाद कुछ समय तक ड्राइविंग, भारी चीजें उठाने, एक्सरसाइज और बड़े निर्णय लेने से दूर रहने की कोशिश करें. गर्भपात के बाद आपको 100.3 डिग्री फेरेनहाइट या इससे ज्यादा बुखार रह रहा है, तो इसका मतलब इन्फेक्शन भी हो सकता है. इसे तुरंत डॉक्टर को बताएं. शरीर को रिपेयर होने देने के लिए पौष्टिक आहार खाएं. इस दौरान बहुत ज्यादा रक्त स्राव होता है.  शरीर कमजोर हो चुका होता है तो सही खान-पान से ही शरीर को दोबारा स्वस्थ किया जा सकता है.

    खुद को ख्याल रखें 

    कहा जाता है समय हर तकलीफ को कम कर देता है. खुद को संभलने का वक्त दें. जो चीजें आप करना चाह रही थीं उनको करें. अपनी शौक और आदतों में खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें.

    मेडिटेशन की लें मदद

    ध्यान हर किसी को करना चाहिए है और जब परस्थितियां विपरीत हों तब इसका अभ्यास जरुर करें. तब ध्यान आपकी बहुत मदद कर सकता है.

    परिवार के साथ की जरुरत

    इस स्थिति में परिवार और पति की जिम्मेदारियां प्रसूता के प्रति दोगुनी हो जाती हैं .गर्भपात का कारण कुछ भी हो आप अपने पार्टनर का पूरा साथ दें और उनका पूरी तरह से ख्याल रखें. ताकि वह इस तकलीफ से जल्दी निकल पाए. आपका साथ उन्हें मजबूत बनाएगा.

    प्रोफेशन की लें मदद

    इस अवस्था में किसी मनोरोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें. ताकि इस परस्थिति को अच्छे संभाल सकें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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