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इतना भी विलेन नहीं है कोलेस्ट्रॉल, इसके फायदों के बारे में भी जानिए 

इतना भी विलेन नहीं है कोलेस्ट्रॉल, इसके फायदों के बारे में भी जानिए 

कोलेस्ट्रोल के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती है. (Image: Shutterstock)

कोलेस्ट्रोल के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती है. (Image: Shutterstock)

cholesterol is not always villain: कोलेस्ट्रोल के बगैर जिंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती है. शरीर की कोशिका झिल्ली कोलेस्ट्रॉल के कारण ही बनती है. कोलेस्ट्रोल यह टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजेन समेत कई हार्मोन को बनाने में मदद करता है. साथ ही पाचन से संबंधित कई एसिड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लिवर और आंत में कई ऐसे काम हैं जो कोलेस्ट्रॉल के बिना संभव नहीं है. इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल को अक्सर लोग विलेन ही मानते हैं.

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    Cholesterol is not always villain: अक्सर कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) का संबंध हार्ट अटैक (Heart attack), स्ट्रोक (Stroke)और अन्य तरह की कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए आमतौर पर लोग इसे विलेन (Villain) ही मानने लगते हैं. हालांकि वास्तविकता यह नहीं है. कोलेस्ट्रॉल शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों के लिए बेहद जरूरी है. कोलेस्ट्रॉल फैट, लिपिड या वसा का ही एक रूप है. कोलेस्ट्रॉल कोशिका झिल्ली (Cell membrane) को बनाता है. यह टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजेन समेत कई हार्मोन को बनाने में मदद करता है. साथ ही पाचन से संबंधित कई एसिड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कोलेस्ट्रॉल के कारण ही फैट और विटामिन डी का शरीर में अवशोषण होता है जिससे कई तरह फंक्शन सुचारू रूप से हो पाते हैं. लिवर और आंत में कई ऐसे काम हैं जो कोलेस्ट्रॉल के बिना संभव नहीं है.
    हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक मानव शरीर में होने वाली शारीरिक क्रियाओं को ठीक तरीके से पूरा करने के लिए कोलेस्ट्रॉल का होना बेहद जरूरी है.दरअसल, कोलेस्ट्रॉल अपने आप में बैड कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है. सच्चाई तो यह है कि कोलेस्ट्रॉल के बिना हम जिंदा ही नहीं रह सकते हैं. हालांकि खून में इसकी कितनी मात्रा है, इस बात पर हमारा स्वास्थ्य टिका हुआ है.

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    दो तरह के कोलेस्ट्रॉल
    शरीर में दो तरह से कोलेस्ट्रॉल के पार्टिकल मौजूद रहते हैं. एलडीएल यानी लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (low-density lipoprotein -LDL). इसे ही तथाकथित रूप से बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है. दूसरा है हाई डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (high-density lipoprotein HDL) यानी एचडीएल. इसे गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है.
    गुड कोले

    कोलेस्ट्रॉल के फायदे
    एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जब संतुलित रहेगा तो इससे बैड कोलेस्ट्रॉल अपने आप खून से हटता जाएगा.यह एक तरह से खून में जमा हुई गंदगी को साफ करता है. गुड कोलेस्ट्रॉल के कारण खून की धमनियों में बैड कोलेस्ट्रॉल के कारण बनने वाला चिपचिपा पदार्थ जमा नहीं हो पाता है. इससे हार्ट संबंधी बीमारियों का जोखिम भी बहुत कम हो जाता है.

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    बैड कोलेस्ट्रॉल कैसे बनता है
    लो डेंसिटी लाइपोप्रोटीन को बैड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं. जब लाइपोप्रोटीन में प्रोटीन की जगह फैट की मात्रा अधिक होने लगती है, तो यहां बैड कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है.एलडीएल बढ़ने के लिए मुख्य रूप से डाइट को ही दोष दिया जाता है. इसके लिए सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और आसानी से पच जाने वाला कार्बोहाइड्रैट को दोषी माना जाता है. हालांकि कभी-कभी जीन और कुछ दवाइयां भी एलडीएल को बढ़ा सकती है.

    गुड कोलेस्ट्रॉल को कैसे बढ़ाएं
    गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को शरीर में बढ़ाने के लिए हेल्दी डाइट के साथ-साथ बुरी आदतों को भी छोड़ना होगा. शराब, सिगरेट को छोड़ना होगा और डाइट में ओमेगा-3 फैटी एसिड को शामिल करना होगा. कम चीनी, कम नमक का ख्याल रखना होगा. जिन फूड में सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट ज्यादा हो उसे कम खाना चाहिए. रेड मीट में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है. इसके अलावा हरी सब्जियां, साबुत अनाज, बादाम, बींस, मछली जैसी चीजें गुड कोलेस्ट्रॉल के लिए अच्छी है.

    Tags: Health, Lifestyle

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