Home /News /lifestyle /

एंटी डिप्रेशन की दवा हार्ट के मरीजों के लिए खतरनाक, 3 गुना बढ़ जाता है मौत का रिस्क: स्टडी

एंटी डिप्रेशन की दवा हार्ट के मरीजों के लिए खतरनाक, 3 गुना बढ़ जाता है मौत का रिस्क: स्टडी

पहले की स्टडी के अनुसार हार्ट रोगियों में बेचैनी के खराब लक्षणों से खराब स्वास्थ्य, यहां तक कि मौत का खतरा भी जुड़ा है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

पहले की स्टडी के अनुसार हार्ट रोगियों में बेचैनी के खराब लक्षणों से खराब स्वास्थ्य, यहां तक कि मौत का खतरा भी जुड़ा है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Heart patients should avoid taking antidepressants : एक हालिया स्टडी के अनुसार अवसाद रोधी (Anti Depressant) और मानसिक बीमारियों (Mental Illnesses) की दवाएं हार्ट के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती हैं. इन दवाओं से हार्ट रोगियों में जल्दी मौत का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है. आपको बता दें कि जब व्यक्ति ज्यादा समय तक तनाव (Stress) में रहता है, तो वह अवसादग्रस्त होने लगता है, जिसके बाद उसे अवसाद रोधी दवाएं खानी पड़ती हैं. इस स्टडी का निष्कर्ष ईएससी (ESC) यानी यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (European Society of Cardiology) के जर्नल 'यूरोपियन जर्नल ऑफ कार्डियोवस्कुलर नर्सिंग (European Journal of Cardiovascular Nursing)' में प्रकाशित हुआ है.

अधिक पढ़ें ...

Heart patients should avoid taking antidepressants :आजकल के लाइफस्टाइल में डिप्रेशन (Depression) या अवसाद सामान्य मानसिक बीमारी (Mental Illness) है जिसका सामना अधिकांश लोगों को कभी न कभी करना पड़ता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक दुनिया भर में करीब 5 प्रतिशत वयस्क आबादी किसी न किसी रूप में डिप्रेशन की चपेट में हैं. अब एक हालिया स्टडी के अनुसार, अवसाद रोधी (Anti Depressant) और मानसिक बीमारियों (Mental Illnesses) की दवाएं हार्ट के मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है. इन दवाओं से हार्ट रोगियों में जल्दी मौत का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है. आपको बता दें कि जब व्यक्ति ज्यादा समय तक तनाव (Stress) में रहता है, तो वह अवसादग्रस्त होने लगता है. जिसके बाद उसे अवसाद रोधी दवाएं खानी पड़ती है.  इस स्टडी का निष्कर्ष ईएससी (ESC)यानी यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (European Society of Cardiology) के जर्नल ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ कार्डियोवस्कुलर नर्सिंग (European Journal of Cardiovascular Nursing)’ में प्रकाशित हुआ है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक विश्व में लगभग 28 करोड़ लोग सक्रिय रूप से डिप्रेशन के शिकार हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या ज्यादा होती है. इसके साथ ही वयस्कों के मुकाबले बुजुर्गों में डिप्रेशन ज्यादा होता है.

क्या कहते हैं जानकार 
स्टडी के राइटर कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी अस्पताल डेनमार्क (Copenhagen University Hospital, Denmark) की डॉ पर्निल फेजेवल क्रॉमहौट (Dr. Pernille Fevejle Cromhout) ने बताया कि हमारी स्टडी में पता चला है कि हार्ट रोगियों में मनोचिकित्सीय दवाएं यानी साइकोट्रॉपिक ड्रग्स (psychotropic drug) का इस्तेमाल बड़ी ही सामान्य बात है. लगभग हर तीसरे हार्ट पेशेंट में बेचैनी के लक्षण होते हैं, इसलिए जरूरी है कि हार्ट रोगियों की मनोविकार संबंधी जांच सुव्यवस्थित तरीके से होनी चाहिए और इसके साथ ही उनसे यह भी पूछ जाना चाहिए कि क्या वे साइकोट्रॉपिक ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं और यदि हां तो किस कारण से?

यह भी पढ़ें-
मसूड़ों की बीमारी जिंजिवाइटिस से बढ़ता है प्रीमैच्योर डिलीवरी का रिस्क: स्टडी

उन्होंने आगे बताया कहा कि यह याद रखना चाहिए कि जब हार्ट पेशेंट को साइकोट्रॉपिक ड्रग्स लेने की सलाह दी जाती है तो उससे उसकी मौत का खतरा भी बढ़ सकता है. हालांकि इस बात को लेकर आगे और रिसर्च की जरूरत है कि मौत की ज्यादा दर का कारण साइकोट्रॉपिक ड्रग्स है या फिर मानसिक बीमारी. पहले की स्टडीज में ये पाया गया कि हार्ट रोगियों में बेचैनी के खराब लक्षणों से खराब स्वास्थ्य यहां तक कि मौत का खतरा भी जुड़ा है. इन स्टडीज को इस परिपेक्ष में देखा गया कि क्या इसके संबंध की व्याख्या साइकोट्रॉपिक ड्रग्स के इस्तेमाल के संदर्भ में की जा सकती है.

यह भी पढ़ें-
क्या है ब्रेन स्ट्रोक के अहम कारण? जानें किस तरह कर सकते हैं लक्षणों की पहचान

कैसे की गई स्टडी
स्टडी में डेनहार्ट नेशनल सर्वे (DenHeart national survey) के तहत इस्केमिक हार्ट डिजीज (ischaemic heart disease), हार्ट फेल्यर (heart failure) या अनियमित दिल की धड़कन (arrhythmias) वाले मरीजों और वॉल्व संबंधी (valvular heart disease) 12,913 हार्ट रोगियों को शामिल किया गया. इन सभी प्रतिभागियों से अस्पताल से छुट्टी मिलते वक्त एक प्रश्नावली (questionnaire) भरवाई गई और उन्हें अस्पताल एनेक्सिटी एंड डिप्रेशन स्केल पर बेचैनी के लक्षणों के संदर्भ में आठ या उससे अधिक स्कोर पाने के अनुसार वर्गीकृत किया गया. इन लोगों के अस्पताल में दाखिल होने से छ महीने पहले अवसाद रोधी या मानसिक रोगों की दवाएं लेने के संबंध में नेशनल रजिस्टर से सूचनाएं एकत्रित की गई. अस्पताल से छुट्टी मिलने के एक साल बाद तक उनकी मौतों के कारणों का फोलोअप किया गया.

Tags: Health, Lifestyle, Mental health

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर