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क्या आपको भी चीजों को जमा करने का शौक है? सावधान! जानें क्या है होर्डिंग डिसऑर्डर

होर्डिंग डिसऑर्डर केवल बहुत सारी चीजों को इकट्ठा करने से कहीं ज्यादा है. (फोटो-canva.com)

होर्डिंग डिसऑर्डर केवल बहुत सारी चीजों को इकट्ठा करने से कहीं ज्यादा है. (फोटो-canva.com)

होर्डिंग डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है. इसमें लोगों को चीजों को जमा करने की आदत लग जाती है. फिर चाहे वो चीज किसी काम की ...अधिक पढ़ें

क्या आपका मन भी पुरानी चीजों को फेंकने का नहीं करता है, बल्कि आप उन्हें जमा करते रहते हैं, तो आप होर्डिंग डिसऑर्डर (Hoarding Disorder) नाम की मानसिक बीमारी का शिकार हो सकते हैं. इसमें लोगों को चीजों को जमा करने की आदत लग जाती है. फिर चाहे वो चीज किसी काम की हो या कबाड़ हो. आमतौर पर इन सामानों में अखबार, घरेलू सामान, कपड़े शमिल होते हैं. कभी-कभी होर्डिंग डिसऑर्डर वाले लोग बड़ी संख्या में जानवरों को इकट्ठा करते हैं. शुरुआत में समस्या भले ही आम हो लगती हो, लेकिन यह आगे चल कर खतरनाक अवस्था में तब्दील हो सकता है. ब्रिटेन की एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी की स्टडी में दावा किया गया है कि अगर आपने अपनी इस आदत को नजरअंदाज किया, तो इसके आपकी मानसिक सेहत पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं. एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी (Anglia Ruskin University) की रिसर्च में दावा किया गया है कि अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) से पीड़ित लोगों में चीजों को जमा करने के व्यवहार का प्रदर्शन करने की काफी अधिक संभावना होती है, जो उनके जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है.

जर्नल ऑफ साइकियाट्रिक रिसर्च (Journal of Psychiatric Research) में प्रकाशित स्टडी में पाया गया कि एडीएचडी वाले पांच लोगों में से लगभग एक ने चीजों को जमा करने के क्लिनिकल ​​रूप से महत्वपूर्ण स्तर का प्रदर्शन किया, ये दर्शाता है कि चीजों को जमा करना और इसके परिणामों से जूझ रहे वयस्कों की एक छिपी हुई आबादी हो सकती है.

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क्या कहते हैं जानकार
एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी (ARU) के रिसर्चर शेरोन मोरिन (Dr. Sharon Morein-Zamir) का कहना है, ‘होर्डिंग डिसऑर्डर केवल बहुत सारी चीजों को इकट्ठा करने से कहीं ज्यादा है. होर्डिंग डिसऑर्डर का इलाज करा रहे लोगों ने अपने रहने वाले क्षेत्रों को इतनी सारी चीजों और अव्यवस्था से भर दिया है कि ये उनके दैनिक कामकाज को तो प्रभावित करता ही है, साथ ही इससे उनके जीवन की गुणवत्ता खराब होती है और चिंता और अवसाद भी बढ़ता है.’

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कैसे हुई स्टडी
रिसर्चर्स की टीम ने इस स्टडी के लिए कैम्ब्रिज और पीटरबरो एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित एक वयस्क एडीएचडी (ADHD) क्लिनिक से 88 प्रतिभागियों के ग्रुप को शामिल किया, जिसके बाद ये बात निकलकर सामने आई कि ग्रुप के 19% लोगों ने क्लिनिकल रूप से महत्वपूर्ण जमाखोरी (significant hoarding) के लक्षण दिखाएं. इनमें से ज्यादातर लोगों की उम्र 30 की थी. बाकी के बचे 81 प्रतिशत मरीजों में, रिसर्चर्स ने इस मानसिक विकार की गंभीरता को अधिक पाया, लेकिन इस हद तक नहीं कि स्टडी कंट्रोल ग्रुप की तुलना में उनके जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सके.

Tags: Health, Health News, Lifestyle, Mental health

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