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हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है तो हो जाएं सतर्क, आदतें बदलने से भी कम हो जाता है खतरा

सर गंगाराम अस्पताल में कार्डियोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ अश्विनी मेहता के अनुसार नियमित जांच जरूरी. (फोटो-Canva.com)

सर गंगाराम अस्पताल में कार्डियोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ अश्विनी मेहता के अनुसार नियमित जांच जरूरी. (फोटो-Canva.com)

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ अश्विनी मेहता (Dr. Ashwani Mehta) के अनुसार, हार्ट डिजीज और उससे जुड़े फैक्टर्स (कारक) का फैमिली हिस्ट्री से सीधा संबंध है. अगर फैमिली में किसी पुरुष 55 साल से पहले और महिला को 60 साल से पहले हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी हुई हैं, तो व्यक्ति में इन रोगों को होने की आशंका बढ़ जाती है.

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Heart Health : आजकल की लाइफस्टाइल में 30 साल के बाद से ही हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है. और अगर हार्ट डिजीज से जुड़ी आपकी फैमिली हिस्ट्री है तो आपको ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.  वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा साल 2016 में जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में होने वाली कुल मौतों में से 63% मौतें हार्ट और लंग्स से संबंधित बीमारियों, स्ट्रोक, कैंसर और डायबिटीज के कारण हुई. इनमें भी 27% मौतों के लिए हार्ट डिजीज ही जिम्मेदार थे. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के परिवार में हार्ट से जुड़ी बीमारियों की हिस्ट्री है, तो ऐसे लोगों को अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है.

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ अश्विनी मेहता (Dr. Ashwani Mehta) के अनुसार, हार्ट डिजीज और उससे जुड़े फैक्टर्स (कारक) का फैमिली हिस्ट्री से सीधा संबंध है. अगर फैमिली में किसी पुरुष को 55 साल से पहले और महिला को 60 साल से पहले हार्ट से जुड़ी कोई बीमारी हुई हैं, तो व्यक्ति में इन रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है. साथ ही व्यक्ति में हार्ट से जुड़ी बीमारियों को बढ़ाने वाली आदतें भी आने की आशंका ज्यादा होती है.

आदतों में बदलाव
दरअसल हार्ट डिजीज से जुड़ी फैमिली हिस्ट्री जानने से पता चलेगा कि जीन में कुछ ऐसे गुण हैं जो आप में भी खतरा बढ़ा सकते हैं. पारिवारिक वातावरण में आपमें भी कुछ आदतें ऐसी आ सकती हैं जो हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाती है. ऐसे में आप जीन तो बदल नहीं सकते, लेकिन पारिवारिक सदस्यों की आदतों को जानकर आप उनसे बच सकते हैं. स्टडी बताती है कि इन आदतों में बदलाव से हार्ट डिजीज के रिस्क को 47% तक कम किया जा सकता है.

लाइफस्टाइल में ये बदलाव जरूर करें

कमर-लंबाई का अनुपात
नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (NICE) के अनुसार व्यक्ति की कमर का साइज उसकी लंबाई से आधा या उससे कम होना चाहिए. जैसे मान लीजिए आपकी लंबाई 5 फुट 8 इंच है, यानी 68 इंच. तो आपकी कमर का साइज 34 इंच होना चाहिए. नुकसान- आपकी कमर का साइज आपकी लंबाई के आधे से ज्यादा होने पर टाइप-2 डायबिटीज, हाई बीपी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.

मोटापा
जानकार बताते हैं कि बॉडी मास इंडेक्स 24.9 से ज्यादा नहीं होना चाहिए. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये होता है कि कैसे जानें की आप मोटे हैं? वजन किलोग्राम में और लंबाई मीटर में. अगर बीएमआई 18.5 से कम है तो आप अंडरवेट हैं. 18.5 से 24.9 है तो आप सामान्य हैं. 25 से 29.9 है तो ओवरवेट है. और इससे ज्यादा वाले मोटे होते है. नुकसान – हार्वर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार मोटापा हार्ट डिजीज का सबसे बड़ा कारण है.

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स्मोकिंग
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, स्मोकिंग और तंबाकू सेवन हार्ट डिजीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर है. हार्वर्ड इंस्टीट्यूट की स्टडी के अनुसार अगर हार्ट के मरीज स्मोकिंग छोड़ देते हैं तो उन्हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है. नुकसान – स्मोकिंग करने वालों को हार्ट अटैक का रिस्क लगभग दोगुना और स्ट्रोक का रिस्क लगभग तीन गुना होता है. स्मोकिंग छोड़कर इन खतरों से बचा जा सकता है.

क्या करना है
डॉक्टर अश्विनी मेहता की सलाह है कि 30 साल से ज्यादा आयु वाले लोगों को समय रहते ही बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल आदि की जांच अवश्य करवानी चाहिए. और इनमें से किसी के भी बढ़े होने की स्थिति में तुरंत डॉक्टरी उपचार जरूरी है. इसके अलावा व्यायाम और आहार पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है

एक्सरसाइज
अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC)के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति हफ्ते में 50 मिनट तेज एक्सरसाइज करता है तो उसमें हार्ट डिजीज से मौत का रिस्क 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है. दरअसल एक्सरसाइज 6 तरह से शरीर पर असर डालती है. ये कार्डियो रेस्पिरेटरी सिस्टम को मजबूत बनाती है. गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती है. शरीर में ट्राइग्लिसराइड (एक तरह का फैट) की मात्रा कम करती है. बीपी घटाती, ब्लड शुगर को बेहतर कर इंसुलिन के लेवल में सुधार करती है.

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हेल्दी डाइट
अमेरिका के टफ्ट्स फ्राइडमैन स्कूल ऑफ न्यूट्रिशन साइंस एंड पॉलिसी के अनुसार, भोजन को तीन कैटेगरी में बांटा जा सकता है. दिल के लिए अच्छा, खराब और निष्प्रभावी. पौधों से मिलने वाला भोजन, फल-सब्जियां, कुछ सी फूड, फ्रेगमेंटेड फूड और हेल्दी फैट को भोजन में शामिल किया जाना चाहिए. वहीं ऐडेड शुगर वाले फूड प्रोडक्ट्स, रिफाइंड कार्बोहाईड्रेट्स जैसे सफेद ब्रेड, पास्ता, प्रोसेस्ड मीट, डिब्बाबंद भोजन से बचें.

Tags: Health, Health News, Heart Disease, Lifestyle

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