Painting For Mental Health: मेंटल हेल्‍थ को रखना है दुरुस्‍त तो बने रहें क्रिएटिव, कोरोना काल में पेंटिंग की लें मदद

जो लोग क्रिएटिव चीजों से जुड़े रहते हैं उनमें स्ट्रेस हॉर्मोन की जगह हैप्‍पी हॉर्मोन्‍स अधिक ऐक्टिव रहता है. Image Credit : Pexels/Marko Blazevic

जो लोग क्रिएटिव चीजों से जुड़े रहते हैं उनमें स्ट्रेस हॉर्मोन की जगह हैप्‍पी हॉर्मोन्‍स अधिक ऐक्टिव रहता है. Image Credit : Pexels/Marko Blazevic

Painting For Mental Health: कोरोना (Corona) काल के दौरान ऐसे कई उदाहरण मिले जहां पेंटिंग की मदद से लोगों ने खुद को नकारात्‍मक माहौल से उबारा और बेहतर मानसिक स्थिति के साथ पारिवारिक जीवन (Life) जी रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2021, 4:30 PM IST
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Painting For Mental Health : ये जरूरी नहीं कि आपको क्रिएटिव बनने के लिए एक्‍सपर्ट आर्टिस्‍ट होना पड़े. आप चाहें तो बिना सीखे भी रंगों (Colour) या पेंसिल की मदद से कुछ नया बनाने का प्रयास कर सकते हैं. आपका ये प्रयास आपको मानसिक रूप से बहुत सुकून देगा और आप किसी भी परिस्थिति में खुद को अधिक उर्जावान महसूस करेंगे. द साइंस टाइम्‍स के मुताबिक, किसी भी तरह की कला इंसान को सकारात्‍मक उर्जा से भर देती है. कोरोना (Corona) काल के दौरान ऐसे कई उदाहरण मिले जहां कला की मदद से लोगों ने खुद को नकारात्‍मक माहौल से उबारा और अब बेहतर मानसिक स्थिति के साथ पारिवारिक जीवन जी रहे हैं.

अकेलेपन में अभिव्‍यक्ति का बना जरिया

कोरोना काल के दौरान ऐसी कई फैमिलीज़ हैं जिनके घर में हर सदस्‍य अलग अलग शहरों में बसर कर रहा है. अकेलेपन के इस दौर में कोरोना जैसी बीमारी का माहौल लोगों के मानसिक सेहत को और भी अधिक प्रभावित कर रहा है. होम ऑफिस और तमाम तरह की व्‍यस्‍तताओं के बीच परिवार के कुछ अन्‍य सदस्‍य खास तौर पर बच्‍चे और बूढे अकेलापन महसूस कर रहे हैं. ऐसे में पेंटिंग और कैनवास उनके अकेलेपन को तो दूर करने का जरिया बना ही है, यहां वे अपनी भावनाओं को रंगों और आकार की मदद से अभिव्‍यक्‍त भी कर सकते हैं और बेहतर महसूस कर रहे हैं.

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एंग्जाइटी और तनाव का बना इलाज



अमेरिकन आर्ट थेरेपी असोसिएशन भी इस बात की वकालत कर रहा है कि पेंटिंग, ड्रॉइंग, डांस आदि क्रिएटिव चीजों की मदद से लोग अपनी भावनाओं को अच्‍छी तरह से मैनेज कर पा रहे हैं और बेहतर जीवन जी रहे हैं. एक शोध में यह पाया गया है कि जो लोग क्रिएटिव चीजों से खुद को जुड़ा रख पाते हैं उनमें स्‍ट्रेस हार्मोन की जगह हैप्‍पी हार्मोन्‍स अधिक ऐक्टिव रहता है जिस वजह से वे हर परिस्थिति में खुद को सकारात्‍मक बनाकर रख पा रहे हैं.

मेमोरी लॉस से रहते हैं बचे हुए

टेसेरा ब्रांडन के मुताबिक, पेंटिंग हमारे दिमाग को शार्प बनाता है. इसकी मदद से हम किसी चीज को बेहतर तरीके से विजुअलाइज कर पाते हैं और उसका इंप्लिमेंट कर पाते हैं. यही नहीं, इससे मेमोरी  बूस्‍ट होता है. जो लोग राइटिंग, पेंटिंग, ड्रॉइंड आदि से जुड़े हैं उन्‍हें बढ़ती उम्र के बावजूद भूलने की बीमारी नहीं होती. ऐसे में कोरोना काल में अगर लोग खुद को इन गतिविधियों में शामिल करें तो अकेलेपन और स्‍ट्रेस से दिमाग पर पड़ने वाले गलत प्रभाव से बच सकते हैं.

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 अकादमिक परफॉरमेंस भी होता है बेहतर

अगर ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से आपका बच्‍चा फोकस नहीं कर पा रहा या पढ़ाई में मन नहीं लगा पा रहा तो इसका भी सॉल्‍यूशन पेंटिंग या अन्‍य आर्ट से निकल सकता है. द साइंस टाइम्‍स के मुताबिक, पाया गया है कि जो लोग म्‍यूजिक या आर्ट से जुड़े रहते हैं उनका दिमाग ज्‍यादा सुलझा रहता है और वे कम उम्र में ग्रैजुएट कर लेते हैं. यही नहीं, आर्ट से जुड़े बच्‍चों को मैथ, साइंस के न्‍यूमेरिकल पैटर्न को समझने में भी अधिक आसानी होती है.
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