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बोन सेल्स को टारगेट कर रोका जा सकता है ब्लड कैंसर - स्टडी

बोन सेल्स को टारगेट कर रोका जा सकता है ब्लड कैंसर - स्टडी

नई स्टडी से पता चलता है कि बोन मैरो में नजदीक की कोशिकाओं को लक्षित करना ब्लड कैंसर से निपटने का एक बेहतर तरीका हो सकता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

नई स्टडी से पता चलता है कि बोन मैरो में नजदीक की कोशिकाओं को लक्षित करना ब्लड कैंसर से निपटने का एक बेहतर तरीका हो सकता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Target the Bone to Stop Blood Cancer : एक ताजा स्टडी में में सामने आया है कि एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (Acute Myeloid Leukemia) को रोकने के लिए नजदीक के बोन मैरो (Bone Marrow) में मौजूद सेल्स (Bone Cells) यानी हड्डी कोशिका को टारगेट (लक्षित) करना एक बेहतर तरीका हो सकता है. बता दें बोन मैरो हड्डियों के बीच वो जगह होती है जो रेड, यलो और व्हाइट ब्लड सेल्स बनाती है. रेड ब्लड सेल्स ताकत देते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स बीमारियों से लड़ने की शक्ति देती हैं. बोन मैरो शरीर की हर लंबी हड्डी में मौजूद होता है.

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    Target the Bone to Stop Blood Cancer: अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी (Colombia University) के इरविंग मेडिकल सेंटर (Irving Medical Center) के रिसर्चर्स द्वारा की गई एक ताजा स्टडी में  में सामने आया है कि एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (Acute Myeloid Leukemia) को रोकने के लिए नजदीक के बोन मैरो (Bone Marrow) में मौजूद सेल्स (Bone Cells) यानी हड्डी कोशिका को टारगेट (लक्षित) करना एक बेहतर तरीका हो सकता है. बता दें बोन मैरो हड्डियों के बीच वो जगह होती है जो रेड, यलो और व्हाइट ब्लड सेल्स बनाती है. रेड ब्लड सेल्स ताकत देते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स बीमारियों से लड़ने की शक्ति देते हैं. बोन मैरो शरीर की हर लंबी हड्डी में होता है. वहीं मायलोइड ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर (Blood Cancer) की बात करें तो ये कैंसर के सबसे घातक प्रकारों में से एक है. और एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (AML) तो ब्लड कैंसर का एक ऐसा प्रकार है, जिसका इलाज सबसे कठिन है.

    हालांकि, ल्यूकेमिया को जन्म देने वाली स्टेम कोशिकाओं को दवाओं के जरिए लक्षित और नष्ट किया जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद रोग आमतौर पर घातक परिणामों के साथ लौट आता है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘कैंसर डिस्कवरी (Cancer Discovery)’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

    क्या कहते हैं जानकार
    कैंसर रिसर्चर स्टावरौला कौस्टेनो (Stavroula Kousteni) के अनुसार, नई स्टेम कोशिकाओं को लक्षित करने वाली एडिशनल दवाओं को विकसित करने की कोशिश चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि जब दवाओं का प्रयोग बंद किया जाता है, तो कैंसर फिर लौट आता है.

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    स्टावरौला कौस्टेनी की इस नई स्टडी से पता चलता है कि बोन मैरो (Bone Marrow) यानी अस्थि मज्जा में नजदीक की कोशिकाओं (osteoblasts) को लक्षित करना इस कैंसर से निपटने का एक बेहतर तरीका हो सकता है. ये कोशिकाएं ही ल्यूकेमिया कोशिकाओं (leukemia cells) को बनने के लिए अनूकूल माहौल उपलब्ध कराती हैं. यदि इन्हें लक्षित (टारगेट) किया जाए तो इस माहौल को बदला जा सकता है. इसकी वजह ये है कि ऑस्टियोब्लास्ट्स ल्यूकेमिया (osteoblasts leukemia) स्टेम सेल्स को बढ़ने में मदद करता है. बता दें कि स्टेम कोशिका या मूल कोशिका ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जिनमें शरीर के किसी भी अंग को विकसित करने की क्षमता होती है. इसके साथ ही ये शरीर की दूसरी कोशिका के रूप में भी ख़ुद को ढाल सकती हैं.

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    मार्टा गैलन-डायज (Marta Galán-Díez,) के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में सामने आया है कि कैसे ल्यूकेमिया कोशिकाएं (leukemia cells) ऑस्टियोब्लास्ट्स (osteoblasts) को कियूरेनिन (kynurenine) नामक एक अणु जारी करके अपने लाभ के लिए काम करने का लालच देती है.

    Tags: Cancer, Health, Health News

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