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Cardiac Arrest: मौत से पहले नहीं मिलता संभलने का एक भी मौका

Cardiac Arrest: मौत से पहले नहीं मिलता संभलने का एक भी मौका

कार्डियो वैस्‍कुलर डिजीज की वजह से सालाना करीब 12 लाख नौजवानों की मृत्‍यु हो रही है. नौजवानों की मौत का यह आंकड़ा हर साल तेजी से बढ़ रहा है.  

Sehat Ki Baat: अभी 2022 को आए जुमां-जुमां कुछ ही दिन गुजरे थे कि लखनऊ से आई एक खबर ने सभी को स्‍तब्‍ध कर दिया. यह खबर वरिष्‍ठ पत्रकार कमाल खान की मौत से जुड़ी थी. पता चला कि सीने में दर्द की शिकायत के बाद परिजन कमाल खान को अस्‍पताल तक पहुंचा पाते, इससे पहले उनकी मृत्‍यु हो गई.

कुछ इसी तरह, पिछले साल 24 दिसंबर को आई पंखुरी (Pankhuri) और ग्रैबहाउस (Grabhouse) स्टार्टअप की फाउंडर पंखुरी श्रीवास्‍तव की महज 32 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई. वहीं, कार्डियक अरेस्‍ट के चलते बॉलीवुड अभिनेता अमित मित्री और सिद्धार्थ शुक्‍ला की अचानक हुई मौत की खबर से हम सब पहले ही वाकिफ हैं.

उपरोक्‍त सभी मौतों में तीन बातें एक सी थी. पहली चारों मौतों की वजह कार्डियक अरेस्ट थी. दूसरी, जिंदगी और मौत के बीच का फासला महज 10 से 15 मिनट ही रहा. परिवार कुछ कर पता, इससे पहले ये सभी दुनिया छोड़कर हमेशा के लिए चले गए. तीसरी बात, कमाल खान को छोड़कर बाकी सभी की उम्र 45 साल से भीतर थी.

हर साल 12 लाख नौजवानों की जान ले रही हैं कार्डियो वैस्कुलर डिजीज
कार्डियक अ‍रेस्‍ट से मौत का मामाल सिर्फ कमाल खान, पंखरी श्रीवास्‍तव, अमित मित्री और सिद्धार्थ शुक्‍ला तक ही सीमित नहीं है. कोरोनरी आर्टरी डिजीज अमंग एशियन इंडियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में कार्डियो वैस्कुलर डिजीज (दिल की बीमारियों) के चलते पूरी दुनिया में करीब 1.20 करोड़  और भारत में करीब 40 लाख लोगों की मृत्‍यु हुई थी.

गुड़गांव स्थिति आर्टेमिस हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डॉयरेक्‍टर डॉ. मनजिंदर संधू के अनुसार, कार्डियक अरेस्‍ट की चपेट में आने वाले करीब 30 फीसदी मरीजों की उम्र 45 वर्ष से कम है. इस लिहाज से देखा जाए तो भारत में हर साल करीब 12 लाख नौजवानों की मौत का कारण कार्डियो वैस्कुलर डिजीज बन रही हैं. साल दर साल, नौजवानों की मौत का यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.

पहले समझें, कार्डियक अरेस्‍ट और हार्ट अटैक में अंतर
अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्‍ट डॉ. अमित मित्‍तल के अनुसार, जब हार्ट पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है, इस स्थिति को कार्डियक अरेस्‍ट कहते हैं. यह स्थिति हार्ट के अंदर सोडियम, कैल्शियम और पोटेशियम के चैनल्‍स में असंतुलन की वजह से पैदा होती है. कार्डियक अरेस्‍ट में इलेक्ट्रिक शॉक के जरिए ही मरीज की जान बचाई जा सकती है.

डॉ. अमित मित्‍तल के अनुसार, हार्ट को काम करने के लिए ऑक्‍सीजन युक्‍त ब्‍लड की जरूरत होती है. यह ब्‍लड कोरोनरी धमनियों के जरिए हार्ट में पहुंचता है. कोरोनरी धमनियों में ब्‍लॉकेज की वजह से हार्ट में जरूरत के अनुसार ब्‍लड नहीं पहुं पाता है और हार्ट की कार्यक्षमता बहुत कम हो जाती है. दबाव बढ़ने पर हार्ट काम करना बंद कर देता है, जिसे मेडिकल साइंस में हार्ट अटैक कहते हैं.

हार्ट स्‍ट्रोक के मामले बढ़ते मामलों की क्‍या है वजह
जेनेटिक्स
बैड कोलेस्ट्रॉल
हाई स्‍ट्रेस लेबल,
डाइबिटीज
बदलती जीवनशैली
बॉडी क्‍लाक सिस्‍टम में बदलाव
अनहेल्‍दी फूड
क्षमता से अधिक फिजकल एक्टिविटी

कैसे पहचाने कार्डियक अरेस्‍ट और हार्ट अटैक की आहट
सीने से कंधे में होते हुए हाथ में दर्द का प्रवाह
धडकनों (पल्‍स रेट) का बहुत तेज हो जाना
सीने में तेज दर्द और सांस लेने में दिक्‍कत
घबराहट और तेज पसीना आना के साथ चक्‍कर आना
सीने में दर्द के साथ अचानक बेहोश हो जाना

कार्डियक अरेस्‍ट की स्थिति में कैसे बचे जान
डॉ. अमित मित्‍तल के अुनसार, कार्डियक अरेस्‍ट की स्थिति में यदि मरीज को समय पर इलेक्ट्रिक शॉक नहीं दिया गया, तो जान बचाना लगभग असंभव हो जाता है. शॉक नहीं मिलने पर मरीज की जान बचने की संभावना दर हर एक मिनट में 10 फीसदी कम होती जाती है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए अब कुछ डिवाइस आ गए हैं, जिन्‍हें हाईरिस्‍क मरीजों में इनप्‍लाइंट किया जाता है. सीपीआर के जरिए भी मरीज की जान बचाई जा सकती है.

डॉ. मित्‍तल ने बताया कि कार्डियो वैस्कुलर डिजीज के मरीज को सबसे पहली आहट एंजाइना के तौर पर मिलती है, दरअसल, मरीज की हार्ट कोरोनरी आर्टरीज में ब्‍लॉकेज की वजह से फिजिकल एक्टिविटी के दौरान आवश्‍यक ब्‍लड फ्लो नहीं हो पाता है. जिसके चलते, सीने में दर्द होता है या अधिक सांस फूलने लगती है. इन संकेतों के मिलते ही यदि हम अपना इलाज शुरू कर दें तो जिंदगी बचाई जा सकती है.

Tags: Cardiac Arrest, Health News, Heart attack, Sehat ki baat

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