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वेजिटेरियन बच्चों से ज्यादा होता है नॉनवेज खाने वाले बच्चों का वजन - स्टडी

शाकाहारी बच्चों के अंडरवेट होने की संभावना ज्यादा होती है. वहीं, मीट खाने वाले बच्चों में मोटापा बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है. (फोटो-canva.com)

शाकाहारी बच्चों के अंडरवेट होने की संभावना ज्यादा होती है. वहीं, मीट खाने वाले बच्चों में मोटापा बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है. (फोटो-canva.com)

रिसर्चर्स ने इस स्टडी में 9000 बच्चों को शामिल किया, जिसमें कुल 250 शाकाहारी बच्चों को भी शामिल किया गया. इस स्टडी का निष्कर्ष अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के जर्नल 'पीडियाट्रिक्स' में प्रकाशित किया गया है.

नॉनवेज और वेजिटेरियन खाने को लेकर बहस काफी लंबी है और इसका कोई अंत नहीं है, लेकिन एक ताजा स्टडी में खुलासा हुआ है कि नॉनवेज खाने वाले बच्चों की तुलना में वेजिटेरियन बच्चों का वजन आधे से कम हो सकता है. 2 से 5 साल तक के बच्चों पर की गई स्टडी में डाइट की वजह से ऐसा होने की संभावना बताई गई है. कनाडा के टोरंटो स्थित सेंट मिशेल्स हॉस्पिटल (St. Michael’s Hospital) की अगुवाई में की गई इस स्टडी में ये खुलासा हुआ है.

रिसर्चर्स ने इस स्टडी में 9000 बच्चों को शामिल किया. इसमें कुल 250 शाकाहारी बच्चों को शामिल किया गया. इस स्टडी का निष्कर्ष अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के जर्नल ‘पीडियाट्रिक्स (Pediatrics)’ प्रकाशित किया गया है.

कैसे हुई स्टडी 
स्टडी में शामिल बच्चों की लंबाई, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और पोषण लगभग मांस खाने वाले बच्चों के बराबर था. लेकिन जब इनके बीएमआई की गणना की गई, तो पता चला कि शाकहारी बच्चों में वजन कम रहने की संभावना 94 फीसदी तक है. 8700 मांसाहारी बच्चों में से 78% बच्चों का वजन उम्र के हिसाब से सही निकला. शाकाहारी में सही वजन वाले 79% बच्चे थे. जब उम्र के हिसाब से कम वजन वाले बच्चों को देखा गया तो मांसाहारी में सिर्फ 3% ही अंडरवेट मिले. ऐसे शाकाहारी बच्चों की संख्या 6% निकली.

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स्टडी में क्या निकला
इसी आधार पर साइंटिस्टों ने निष्कर्ष निकाला कि शाकाहारी बच्चों के अंडरवेट होने की संभावना ज्यादा होती है. ये भी पाया गया कि मीट खाने वाले बच्चों में मोटापा बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है. साइंटिस्टों ने इसकी एक वजह शाकाहारी खाने में बच्चों के विकास के जरूरी तत्व नहीं होने को माना है. साथ ही ये बात भी जोड़ी है कि एशिया के बच्चे ज्यादातर शाकाहारी होते हैं. इससे संभावना रहती है कि उनका वजन कम हो.

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क्या कहते हैं जानकार
स्टडी में शामिल पीडियाट्रिशन डॉ जोनाथन मैगुरी (Dr. Jonathon Maguire) ने बताया कि भारत और अमेरिका में बच्चों के विकास का पैमाना अलग है. भारत में 5 साल की लड़की का वजन 17 किलो, लंबाई 108 सेंटीमीटर होना चाहिए. वहीं अमेरिका में वजन 18 किलो होना चाहिए. स्टडी में शाकाहारी बच्चों के ज्यादातर एशिया से होने की वजह से उनके वजन को लेक ये नतीजे निकले.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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