कोरोना संक्रमण के नए स्‍ट्रेन से बचने के लिए घर की खिड़कियां रखें खुली....

एरोसोल ट्रांसमिशन में दूषित कण 5 माइक्रॉन से छोटे होते हैं जो हवा के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं. Image Credit : Pixabay

एरोसोल ट्रांसमिशन में दूषित कण 5 माइक्रॉन से छोटे होते हैं जो हवा के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं. Image Credit : Pixabay

विशेषज्ञ यह सलाह दे रहे हैं कि जहां तक हो सके इंडोर जगहों पर वेंटिलेशन (Ventilation) बढ़ाएं और घर की खिड़कियों को खुली रखें. खुले वातावरण की तुलना में बंद जगहों पर कोरोना (Corona) ज्यादा फैलता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2021, 11:05 AM IST
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Coronavirus 2nd Wave Precautions : कोरोना के नए स्‍ट्रेन से बचने के लिए क्रॉस वेंटिलेशन (Cross Ventilation) पर बहुत जोर दिया जा रहा है. विशेषज्ञ यह सलाह दे रहे हैं कि जहां तक हो सके इंडोर जगहों पर वेंटिलेशन बढ़ाएं और घर की खिड़कियों को बंद रखने की जगह खुली रखें. ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने भी इस बात पर जोर दिया है. डॉ गुलेरिया का कहना है कि बंद जगहों पर हवा का संचालन बेहतर तरीके से होना बहुत ही जरूरी है. हिन्‍दुस्‍तान की खबर के मुताबिक, दरअसल नए शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि कोविड-19 का संक्रमण (Infection) के लिए जिम्मेदार कोरोना का नया वायरस  SARS-COV-2 दरअसल हवा के जरिए भी फैल रहा है.

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क्‍या है एरोसोल इंफेक्शन

ऐयरोसोल इंफेक्शन यानी कि हवा में ऐसे कणों की मौजूदगी जो रोगाणुओं से भरा हो. जबकि ड्रॉपलेट इंफेक्शन में सांस की बूदों से होने वाला संक्रमण होता है जो पूरी तरह से इससे अलग है. बता दें कि ड्रॉपलेट्स 5 माइक्रॉन से बड़े कण होते हैं जो ज्यादा दूर तक ट्रैवल नहीं कर सकते. ये अधिक से अधिक 2 मीटर तक ट्रैवल कर पाते हैं और नीचे गिर जाते हैं. जबकि एरोसोल ट्रांसमिशन में दूषित कण 5 माइक्रॉन से छोटे होते हैं जो हवा के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं. ऐसे में अगर कोई संक्रमित व्यक्ति रूम में खांसता या छींकता है तो उसके जाने के बावजूद कमरे में कई घंटों तक वायरस मौजूद रहता है. ऐसे में कमरे में पर्याप्‍त वेंटिलेशन होना बहुत ही जरूरी है.

घर की खिड़कियां गर्मी में भी रखें खुली



मेडिकल जर्नल लैंसेट (Lancet) में प्रकाशित इस नई रिसर्च में कहा गया है कि कोरोना का नया वायरस  SARS-COV-2 दरअसल एयरबॉर्न है यानी कि ये हवा के जरिए फैलता है. ऐसे में देश में तेजी से फैल रहे इस संक्रमण के मद्देनजर डॉ गुलेरिया ने भी कहा है कि किसी बंद जगह के मुकाबले खुली जगह में वायरस के फैलने की आशंका कम होती है. इसलिए गर्मियों में घरों की खिड़कियों को खुली रखें.

घर पर अधिक लोग न हों एकत्रित

जहां तक हो सके एक कमरे में अधिक लोग एकत्रित होने से बचें. कोशिश करें कि आपका कमरा हवादार हो, क्रॉस वेंटिलेशन की व्यवस्था हो और किसी बंद कमरे में ज्यादा लोग इकट्ठा न हों तभी आप इस नए संक्रमण से बच सकते हैं. अगर लोग ऐसा नहीं करें तो हो सकता है कि किसी बंद कमरे में केवल व्यक्ति वहां मौजूद सभी लोगों को संक्रमित कर दे.  दरअसल बंद कमरे के अंदर संक्रमित व्यक्ति अगर 10 मीटर दूर भी बैठा हो और खांसता या छींकता है तो वह वहां मौजूद सभी को संक्रमित कर सकता है.

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सही  तरीके से पहनें मास्‍क

डबल म्यूटेंट स्ट्रेन के आने पर कई लोग डबल मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं. डॉ गुलेरिया की मानें तो अगर आप N-95 मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको डबल मास्क पहनने की जरूरत नहीं. हालांकि मास्क को सही तरीके से पहनना बहुत जरूरी है. इस बात का ध्‍यान हमेशा रखें कि मास्क और स्किन के बीच कोई गैप ना हो और आपकी ठुड्डी भी अच्छी तरह से मास्‍क के अंदर हो. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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