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Monkeypox: क्‍या भारत के पास है मंकीपॉक्‍स का इलाज? विशेषज्ञों ने दिया राहत भरा जवाब

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को मंकीपॉक्‍स से डरने की जरूरत नहीं है.  (सांकेतिक फोटो)

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को मंकीपॉक्‍स से डरने की जरूरत नहीं है. (सांकेतिक फोटो)

Monkeypox: दिल्‍ली एम्‍स के पूर्व निदेशक डॉ. मिश्र कहते हैं कि सबसे खास बात है कि स्‍मॉलपॉक्‍स के परिवार से जुड़ा होने के नाते मंकीपॉक्‍स की रोकथाम और इलाज के लिए स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन का लाभ उठाया जा सकता है. अनुमान है कि स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन मंकीपॉक्‍स पर 80 से 85 फीसदी तक कारगर हो सकती है.

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नई दिल्‍ली. पहले से ही कोरोना महामारी (Corona Pandemic) से जूझ रहे लोगों के सामने एक और मुसीबत खड़ी हो गई है. विश्‍व के करीब 15 देशों में मंकीपॉक्स नाम के वायरस ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. 100 से ज्‍यादा लोगों को संक्रमित कर चुके मंकीपॉक्‍स (Monkeypox) को लेकर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है.भारत में अभी तक इस बीमारी का एक भी केस सामने नहीं आया है लेकिन इस बीमारी को लेकर यहां सतर्कता बरती जा रही है. इतना ही नहीं भारत के विशेषज्ञ इस बीमारी से न डरने की सलाह दे रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीमारी नई नहीं है, बल्कि अफ्रीका जैसे देशों में लंबे समय से इसका आउटब्रेक होता रहा है. इतना ही नहीं मंकीपॉक्‍स जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में भारत पहले भी सफल रह चुका है, जिसका फायदा इस बीमारी को फैलने से रोकने में मिल सकता है.

दिल्‍ली स्थित ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में बताते हैं कि भारत को मंकीपॉक्‍स वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि इसे यहां फैलने से रोकने के लिए सावधानियां और एहतियात बरतने की जरूरत है. भारत आज से 40 साल पहले स्‍मॉलपॉक्‍स (Smallpox) जैसी खतरनाक बीमारी को नियंत्रित कर चुका है और भारत में आज चिकनपॉक्स और स्मालपॉक्स की बीमारी का खतरा न के बराबर है. वहीं ये मंकीपॉक्‍स (Monkeypox) भी स्‍मॉलपॉक्‍स की फैमिली का ही वायरस है.

मंकीपॉक्‍स में स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन हो सकती है कारगर
डॉ. मिश्र कहते हैं कि सबसे खास बात है कि स्‍मॉलपॉक्‍स के परिवार से जुड़ा होने के नाते मंकीपॉक्‍स की रोकथाम (Prevention of Monkeypox) और इलाज के लिए स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन का लाभ उठाया जा सकता है. अनुमान है कि स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन मंकीपॉक्‍स पर 80 से 85 फीसदी तक कारगर हो सकती है. अब स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन के इस्‍तेमाल को लेकर विश्‍व में कई जगहों पर मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ चर्चा भी कर रहे हैं. हालांकि इसके इस्‍तेमाल पर डब्‍ल्‍यूएचओ (WHO), सीडीसी (CDC) को फैसला लेना है. वहीं भारत में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय (MOHFW), एनसीडीसी (NCDC) और आईसीएमआर (ICMR) मिलकर निर्णय लेंगे.

भारत में है स्‍मॉलपॉक्‍स के प्रति इम्‍यूनिटी..
डॉ. मिश्र कहते हैं कि भारत 1979 में स्‍मॉलपॉक्‍स फ्री (Smallpox Free) घोषित कर दिया गया था. इससे पहले तक यहां के लोगों को स्मालपॉक्स की वैक्‍सीन लगाई जाती थी. इस साल से पहले पैदा हुए लगभग सभी लोगों को व‍ह वैक्‍सीन (Vaccine) लगी है. यही वजह है कि आज यहां स्मालपॉक्स के केस नहीं आते हैं. इसके अलावा एक और अनुमान लगाया जा सकता है कि इस अवधि तक के जिन लोगों में स्‍मॉलपॉक्‍स को लेकर इम्‍यूनिटी (Immunity) मौजूद है वह शायद मंकीपॉक्‍स से भी बचाव कर सकती है. हालांकि इस अवधि के बाद पैदा हुए लोगों को जिन्‍हें स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन नहीं लगी है, उनके बारे में मंकीपॉक्‍स को लेकर कुछ भी कहना संभव नहीं है.

भारत के लिए राहत की बात
डॉ. मिश्र कहते हैं कि मंकीपॉक्‍स जिस गति से अन्‍य देशों में फैल रहा है, उस लिहाज से इसके भारत में आने और संक्रमण फैलाने से इनकार नहीं किया जा सकता है. आने वाले समय में भारत में भी इस बीमारी के मामले देखने को मिल सकते हैं लेकिन चिकनपॉक्‍स और स्‍मॉलपॉक्‍स जैसी बीमारियां को वैक्‍सीन के माध्‍यम से खत्‍म कर चुका भारत मंकीपॉक्‍स के लिए भी इनका इस्‍तेमाल कर सकता है. भारत के टीकाकरण (Immunization) अभियान में भी अभी स्‍मॉलपॉक्‍स की वैक्‍सीन शामिल नहीं है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो इसे भी किया जाना संभव है. लिहाजा भारत में इस बीमारी को लेकर अभी पैनिक की जरूरत नहीं है. भारत का स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय और मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी बड़ी संस्‍थाएं इस पर नजर बनाए हुए हैं.

Tags: Monkey, Vaccine, WHO, WHO Expert Panel

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