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साल 2050 तक दुनिया में 3 गुना बढ़ सकते हैं डिमेंशिया के मरीज- स्टडी

साल 2050 तक दुनिया में 3 गुना बढ़ सकते हैं डिमेंशिया के मरीज- स्टडी

साल 2019 में दुनिया में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 5.7 करोड़ थी, जो साल 2050 में बढ़कर 15.3 करोड़ हो सकती है. (फोटो-shutterstock)

साल 2019 में दुनिया में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 5.7 करोड़ थी, जो साल 2050 में बढ़कर 15.3 करोड़ हो सकती है. (फोटो-shutterstock)

New Study On Dementia: एक नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वैश्विक स्तर पर 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के डिमेंशिया पीड़ितों की संख्या वर्ष 2050 तक तीन गुना हो जाएगी. आपको बता दें कि साल 2019 में दुनिया में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 5.7 करोड़ थी, जो साल 2050 में बढ़कर 15.3 करोड़ हो सकती है. इस स्टडी के निष्कर्षों को 'द लांसेट पब्लिक हेल्थ (The Lancet Public Health)' जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

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    New Study On Dementia: आमतौर पर बुजुर्गों को होने वाली मानसिक बीमारी डिमेंशिया (Dementia) को साधारण भाषा में भूलने की बीमारी कहते हैं, हालांकि. ये बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि एक बड़े लक्षणों के ग्रुप का नाम है. इसमें भूलने के अलावा जो लक्षण होते हैं, वो इस तरह से हैं- नई बातें याद करने में दिक्कत होना, लॉजिक को समझ न पाना, लोगों से मिलने-जुलने में झिझक, इमोशंस को संभालने में दिक्कत, पर्सनैलिटी चेंज आदि. ये सभी लक्षण ब्रेन लॉस (Brain loss) के कारण होते हैं, जिससे लाइफ में हर कदम दिक्कतों को सामना करना पड़ता है.

    अब एक नई स्टडी में साइंटिस्टों ने दावा किया है कि वैश्विक स्तर पर 40 साल या उससे ज्यादा उम्र के डिमेंशिया पीड़ितों की संख्या वर्ष 2050 तक तीन गुना हो जाएगी. आपको बता दें कि साल 2019 में दुनिया में डिमेंशिया के मरीजों की संख्या 5.7 करोड़ थी, जो साल 2050 में बढ़कर 15.3 करोड़ हो सकती है. इस स्टडी के निष्कर्षों को ‘द लांसेट पब्लिक हेल्थ (The Lancet Public Health)’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

    ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार
    इस स्टडी के दौरान डिमेंशिया के चार जोखिम कारकों स्मोकिंग, मोटापा, डायबिटीज और कम शिक्षा पर भी गौर किया गया और उनके परिणामों की आशंका को भी रेखांकित किया गया. उदाहरण के लिए, वैश्विक स्तर पर अगर शिक्षा में सुधार होता है, तो साल 2050 तक डिमेंशिया के मामलों में 62 लाख की कमी आ सकती है. लेकिन, मोटापा, डायबिटीज और स्मोकिंग जैसे पहलू इसमें रुकावट पैदा करते हुए दुनियाभर में 68 लाख नए डिमेंशिया मरीजों के लिए जिम्मेदार साबित हो सकते हैं.

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    क्या कहते हैं जानकार
    रिसर्चर्स ने डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए तत्काल स्थानीय स्तर पर उपाय किए जाने पर बल दिया है. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फार हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन से जुड़ी इस स्टडी की प्रमुख लेखिका एम्मा निकोलस (Emma Nichols) का कहना है, ‘हमारा अध्ययन वैश्विक के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर डिमेंशिया के लिए उन्नत पूर्वानुमान प्रदान करता है.

    डाइट का रखें ख्याल
    एक अन्य शोध के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस (University of Athens in Greece) के प्रोफेसर डॉ निकोलस स्कारमेस (Dr Nikolaos Scarmeas) ने बताया कि उन्होंने अपनी स्टडी के नतीजों में पाया गया कि लोग एंटी इंफ्लामेटरी डाइट को शामिल कर अपने ब्रेन को हेल्दी बना सकते हैं. उन्होंने कहा कि लोग अपनी डाइट में परिवर्तन कर आसानी से दिमागी बीमारियों के जोखिम से बच सकते हैं. इसके बहुत कम मेहनत की जरूरत है. सिर्फ एंटी-इंफ्लामेटरी फल और सब्जियों का सेवन करना होगा.

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    एंटी-इंफ्लामेटरी फूड
    टमाटर, ऑलिव ऑयल, हरी पत्तीदार सब्जी, पालक, कोलार्ड, बादाम, अखरोट, सेलमन मछली, टूना मछली, सार्डिन मछली, स्ट्रॉबेरी,ब्लूबेरी, चेरी, संतरे, आदि.

    Tags: Health, Health News, Mental health

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