मोटे अनाज यानी मिलेट्स खाएं और रोगों को दूर भगाएं

मिलेट्स को चावल और आटा दोनों की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. चावल की तरह इस्तेमाल करने के लिए मिलेट को करीब 12 घंटे के लिए पानी में छोड़ दें.

मिलेट्स को चावल और आटा दोनों की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. चावल की तरह इस्तेमाल करने के लिए मिलेट को करीब 12 घंटे के लिए पानी में छोड़ दें.

क्या आप जानते हैं कि आपकी ज्यादातर समस्याओं की जड़ गेहूं (Wheat) और चावल (Rice) है. गेहूं और चावल ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें सब कुछ अच्छा रहते हुए भी फाइबर की मात्रा अत्यंत कम होने के कारण ये अखाद्य हो जाते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 6:26 AM IST
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(मनोज कुमार)

क्या आपका हाजमा अक्सर बिगड़ा हुआ रहता है? क्या आपको गैस की समस्या परेशान करती है? क्या आपके ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ा हुआ रहता है? क्या आपको डायबिटीज का डर सताता है? क्या आपका पेट निकलता जा रहा है और आप उसे कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं? अगर, हां तो आप इन परेशानियों से जूझने वाले अकेले शख्स नहीं हैं. आजकल ज्यादातर लोग इन समस्याओं से जूझते रहते हैं, चुपचाप इन दिक्कतों को सहते रहते हैं क्योंकि इन्हें सहने के सिवा उनके पास कोई चारा नहीं है. महंगा एलोपैथिक इलाज इन समस्याओं से शायद ही छुटकारा दिला पाता है. अगर दिला भी दे तो ये परेशानियां जल्द ही लौटकर आपके पास आ जाती हैं.

क्या है इन परेशानियों की वजह

क्या आप जानते हैं कि इन परेशानियों की असली वजह आपका खान-पान है. आपका खान-पान आपके हाजमे को बिगाड़ रहा है. आपका खान-पान आपके ब्लड में शुगर लेवल को बढ़ा रहा है, डायबिटीज का खतरा बढ़ा रहा है. आपका खान-पान आपके शरीर में अनावश्यक चर्बी जमा कर रहा है और आपकी सेहत को चौपट कर रहा है.
चावल और गेंहू आपकी ज्यादातर समस्याओं की जड़ है

क्या आप जानते हैं कि आपकी ज्यादातर समस्याओं की जड़ गेहूं और चावल है. गेहूं और चावल ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनमें सब कुछ अच्छा रहते हुए भी फाइबर की मात्रा अत्यंत कम होने के कारण ये अखाद्य हो जाते हैं. गेहूं के आटे में 2 फीसदी से भी कम (1.9%) फाइबर होते हैं, जबकि चावल में तो 0.2% ही फाइबर होता है. ब्राउन राइस में फाइबर की मात्रा करीब 4 फीसदी होती है. आप अनुभव करते होते हैं कि चपाती और भात खाने के कुछ देर बाद या खाते खाते आप खुद को एनर्जेटिक महसूस करने लगते हैं. इसकी वजह इनमें फाइबर की मात्रा कम होना है, जो इन्हें अखाद्य बना देती है.

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कम फाइबर होने की वजह से ये चावल और गेहूं पेट में जाते ही पचने लगते हैं और एनर्जी रिलीज होने लगती है. हम खुद को एनर्जेटिक महूसस करने लगते हैं. ये जल्दी-जल्दी पचकर शरीर में अत्यधिक मात्रा में ग्लूकोज रिलीज करने लगते हैं. वजन और शुगर लेवल बढ़ना, मोटापा का कारण बनता है. कम शारीरिक श्रम करने वाले लोग जल्द मोटापे का शिकार हो जाते हैं. उनमें डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. ये अनाज कॉलेस्ट्रॉल भी बढ़ाते हैं, जो गंभीर हृदय रोग पैदा करता है.

मोटे अनाज या मिलेट्स: एक बेहतर विकल्प

जब चावल और गेहूं अखाद्य की श्रेणी में आ जाते हैं तो सवाल उठता है कि हमारे पास खाने के लिए क्या-क्या विकल्प हैं? इस सवाल का जवाब है- मिलेट्स यानी मोटे अनाज. मोटे अनाज यानी मिलेट्स- ये छोटे-छोटे, गोल और पूर्ण अनाज के समूह होते हैं जिसमें कई अनाज शामिल होते हैं. आइए इन्हें पहचानते हैं.

फिंगर मिलेट- नाचनी या रागी या मड़ुआ

पर्ल मिलेट- बाजरा

लिट्ल मिलेट- कुटकी

फॉक्सटेल मिलेट- कांगनी

बर्नियार्ड मिलेट- सांवा

प्रोसो मिलेट- चीना

कोदो मिलेट- कोदो

ब्राउन टॉप मिलेट

ऐसा मत सोचिए कि ये कोई नया अनाज है या इंपोर्टेड अनाज है. ये सब देसी अनाज हैं और सदियों से देश से लोग इनके गुणों से वाकिफ हैं. पचास-साठ साल पहले तक हिंदुस्तान के लोग इन अनाजों को पैदा करते थे, इन्हें खाते थे और स्वस्थ रहते थे. साठ के दशक में आई हरित क्रांति ने देश के लोगों के सामने चावल की थाली परोस दी. लोग गेहूं की नरम-नरम मीठी चपाती खाकर स्वयं को धन्य महसूस करने लगे. इनके स्वाद और मिठास के सामने मोटे अनाज फीके नजर आने लगे. देश की बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए लोग गेंहू-चावल पैदा करने लगे और यही दो अनाज लोगों का मुख्य आहार बन गया.

मिलेट्स क्यों हैं इतने खास

भारत, नाइजीरिया समेत एशियाई और अफ्रीकी देशों में उपजाए जाने वाले छोटे, गोल और पूर्ण अनाज मिलेट कहलाते हैं. ये प्राचीन अनाज हैं. दूसरी फसलों के मुकाबले ये बहुत कम पानी में पैदा हो सकती हैं और कीटाणुरोधी होती हैं. अलग-अलग शोधों से पता चलता है कि मिलेट खाने से ब्लड में शुगर की मात्रा कम होती है. हर रोज सिर्फ पचास ग्राम कांगनी मिलेट (फॉक्सटेल मिलेट) खाकर बारह सप्ताह में आप शुगर लेवल कम कर सकते हैं. इससे न सिर्फ शुगर लेवल में कमी होती है, बल्कि ट्राग्लासेराइड और कॉलेस्ट्रॉल लेवल में भी कमी होती है.

मिलेट ग्लूटेन फ्री होते हैं लिहाजा इसका इस्तेमाल कर आप डायरिया और अपच की समस्या से बच सकते हैं. ये एंटी-एसिड होते हैं और टाइप-2 डायबिटीज रोकने में मदद करते हैं. मोटे अनाज ब्लड प्रेशर कम करते हैं. साथ ही, गैस्ट्रिक अल्सर, कॉलोन कैंसर के खतरे को कम करते हैं. मोटे अनाज कब्ज, पेट बढ़ना और मोटापा भी कम करते हैं. मिलेट्स के पोषक तत्वों के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. मिलेट में फाइबर के अलावा, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं.

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मिलेट्स को खाने के लिए कैसे तैयार करें

मिलेट्स को चावल और आटा दोनों की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. चावल की तरह इस्तेमाल करने के लिए मिलेट को करीब 12 घंटे के लिए पानी में छोड़ दें. फिर साफ करके उसमें छह गुना पानी मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. पानी जब खत्म हो जाए तो उसे गर्म ही परोसें. दूसरा तरीका है, पत्ता गोभी, फूल गोभी, भिंडी, बीन्स, करेला, आलू, केला आदि को छोटे-छोटे टुकड़े में काट लें और सबको मिलाकर सब्जी की तरह अधपका तैयार करें फिर उसमें फूला हुआ मिलेट मिलाकर चार गुने पानी में तैयार करें.

हां, थोड़ा नमक डालना न भूलें. मिलेट्स का आटा, गेहूं के आटे में मिलाकर रोटी तैयार करें. मिलेट्स के आटे से आप इडली आदि भी बना सकते हैं. जीवन शैली से पैदा हुई बीमारियों से लोग परेशान हैं और प्राचीन संस्कृति की ओर लौट रहे हैं. खान-पान की संस्कृति में बदलाव आ रहा है. देश में मोटे अनाज की मांग बढ़ रही है. इसलिए मोटे अनाज का उत्पादन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
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