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बॉडी और ब्रेन के लिए 'इमोशनल रेस्ट' भी है जरूरी

बॉडी और ब्रेन के लिए 'इमोशनल रेस्ट' भी है जरूरी

बिजी लाइफस्टाइल से शरीर की नेचुरल रिदम बिगड़ने लगी है. जिसका सीधा असर हमारी नींद पर हुआ है. (प्रतीकात्मक फोटो- Pexels)

बिजी लाइफस्टाइल से शरीर की नेचुरल रिदम बिगड़ने लगी है. जिसका सीधा असर हमारी नींद पर हुआ है. (प्रतीकात्मक फोटो- Pexels)

Benefits of Taking Rest: फिजिकल रेस्ट उन नर्व्स (तंत्रिकाओं) को आराम देता है, जो हमें विचारों और भावनाओं को एकाग्र करने में मदद करती हैं. इसी के साथ शरीर को इमोशनल रेस्ट भी चाहिए होता है.

  • News18Hindi
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    Emotional Rest: भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार जब हमें रेस्ट करने का बिलकुल समय नहीं मिलता है, तब इसका असर हमारे मूड, एनर्जी के लेवल और हेल्थ पर देखने को मिलता है. ऐसे में हम जरूरी कामों पर ध्यान केंद्रीत करने की क्षमता भी खो देते हैं. हिंदुस्तान अखबार में छपी रिपोर्ट में हो’ ओपोनोपोनो (क्षमाशीलता पर आधारित प्राचीन जीवन दर्शन) विशेषज्ञ डॉ. करिश्मा आहूजा ने बताया कि मानसिक और शारीरिक आराम क्यों जरूरी है.

    डॉ. करिश्मा आहूजा के अनुसार, फिजिकल रेस्ट उन नर्व्स (तंत्रिकाओं) को आराम देता है, जो हमें विचारों और भावनाओं को एकाग्र करने में मदद करते हैं. शरीर की आंतरिक घड़ी स्वाभाविक रूप से जानती है कि कब जागने का समय है और कब सोने का. मगर आज के बिजी लाइफस्टाइल से शरीर की नेचुरल रिदम (natural rhythm) बिगड़ने लगी है. जिसका सीधा असर हमारी नींद पर हुआ है.

    क्यों जरूरी है नींद?
    नींद शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण करने, अंगों को डिटॉक्सीफाई करने, ऊतकों (Tissues) के पुननिर्माण के लिए जरूरी है. यह सामान्य तौर पर हमें अगले दिन के लिए तरोताजा करने में मदद करती है. यहां सवाल न केवल कितने घंटे के बारे में है, बल्कि ये भी है कि आप कब सोते हैं और आप अपनी नींद की आदतों के साथ कितने अनुशासित हैं.

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    कब सोना है?
    डॉ करिश्मा के अनुसार अगर आप एक अच्छी नींद लेना चाहते हैं तो आपको अपने रात के खाने और सोने के समय के बीच पर्याप्त अंतर रखना चाहिए. इसके साथ ही कोशिश करें कि आप रात को 11 बजे से पहले सो जाएं . यह नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा.

    खुद के लिए टाइम निकालें
    मन को तनाव से दूर रखने के लिए मेंटल रेस्ट जरूरी है और इसे पाने का सबसे शानदार तरीका है अपने आप को फोन पर या लैपटॉप से दूर रखना. कुछ मिनट मौन में बिताएं, सांस और मन से जुड़ें. इससे मन और शिथिल होता जाएगा. अपनी सांस पर ध्यान दें, जो आप अंदर ले रहे हैं और जो आपके शरीर को छोड़ रही है. ऐसा करने का सबसे अच्छा समय सुबह का है. यह अभ्यास आपके दिमाग को तरोताजा करने व आपकी इंद्रियों को शांत करने में मदद करेगा.

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    इमोशनल रेस्ट भी चाहिए
    अगर आप इमोशनली टेंशन में हैं, तो आप कभी भी पूरी तरह से जीने में सक्षम नहीं होंगे. काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच सही संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. पॉजिटिव लोगों, प्रियजनों और दोस्तों के साथ समय बिताना आपको भावनात्मक रूप से तरोताजा कर सकता है. पॉजिटिव शब्दों और सुझावों की मदद से अपनी भावनाओं को अधिक हेल्दी और पॉजिटिव फीलिंग्स में बदलने की कोशिश कर सकते हैं

    Tags: Health, Health News

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