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ओमिक्रॉन को लेकर मन में हैं कई सवाल तो जानिए भारतीय –अमेरिकी डॉक्टर से सभी जवाब

ओमिक्रॉन को लेकर मन में हैं कई सवाल तो जानिए भारतीय –अमेरिकी डॉक्टर से सभी जवाब

ओमिक्रॉन वेरिएंड डेल्टा और डेल्टा प्लस (Delta Plus) से ज्यादा म्यूटेट करता है.

ओमिक्रॉन वेरिएंड डेल्टा और डेल्टा प्लस (Delta Plus) से ज्यादा म्यूटेट करता है.

All you need to know about omicron: दुनिया भर में ऑमिक्रॉन को लेकर लोगों के मन में भारी खौफ है. दक्षिण अफ्रीका से पनपा यह वेरिएंट विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय है. शुरुआती विश्लेषणों के आधार पर माना जा रहा है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत तेजी से फैलता है. ओमिक्रॉन वेरिएंड डेल्टा और डेल्टा प्लस (Delta Plus) से ज्यादा म्यूटेट करता है यानी अपना रूप तेजी से बदल लेता है. इस पूरे मामले पर अमेरिका में कोविड-19 पर काम कर रहे भारतीय मूल के अमेरिकी डॉ शशांक हेडा से News 18 हिंदी ने खास बातचीत की.

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    लक्ष्मी नारायण

    All you need to know about omicron: ओमिक्रॉन (Omicron) वेरिएंट को लेकर दुनिया भर में दहशत का माहौल है. इस वेरिएंट (Variant) के बारे में अब तक बहुत ज्यादा जानकारी हासिल नहीं हुई है, हालांकि विशेषज्ञ (Expert) जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं. शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट बहुत तेजी से लोगों को संक्रमित कर सकता है. इसके अलावा ओमिक्रॉन के लक्षण भी पहले के वेरिएंट से थोड़ा अलग है. इस पूरे मामले पर अमेरिका में कोविड-19 पर काम करने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर शशांक हेडा से न्यूज 18 (NEWS 18) हिंदी ने खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि ओमिक्रॉन हमारे लिए चिंता की बात जरूर है लेकिन हम इसे लेकर जितना सतर्क रहेंगे, इस नए वेरिएंट से उतना ही बच सकेंगे. डॉ शशांक (Dr Shashank Heda) ने ओमिक्रॉन को लेकर फैली दहशत और इससे बचने के उपायों पर कई तरह की सलाह दी है. यहां उनकी सलाह को सिलसिलेवार पेश कर रहे हैं जो आपके मन की जिज्ञासाओं को शांत कर सकती है.

    ओमिक्रॉन वेरिएंट क्या सच में तेजी से फैलता है?
    डॉ. शशांक: ओमिक्रॉन वेरिएंड डेल्टा और डेल्टा प्लस (Delta Plus) से ज्यादा म्यूटेट करता है यानी अपना रूप तेजी से बदल लेता है. ज्यादा म्यूटेशन (Mutation) की क्षमता रखने के कारण यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम (immune system) पर हमला करता है. चिंता की बात यह है कि ओमिक्रॉन पहले के सभी वेरिएंट से ज्यादा संक्रामक है या यह लोगों में कई गुना तेजी से फैलता है. इस पर वैक्सीनेशन (vaccination) का असर भी कम है.

    ओमिक्रॉन वेरिएंट के लक्षण (symptoms) क्या है?
    डॉ. शशांक: शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि हल्के और गंभीर लक्षण (mild and severe symptoms) वाले मरीज को अस्पताल की जरूरत हो सकती है. मरीज को शुरुआती लक्षणों में बुखार, बहुत ज्यादा थकान, सिर दर्द, बदन दर्द, गले में खराश आदि हो सकते हैं. हालांकि डेल्टा वेरिएंट के विपरीत गंध और स्वाद का जाना, पल्स रेट का बढ़ जाना और ऑक्सीजन लेवल में कमी आना जैसे लक्षण फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं.

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    क्या इम्यून सिस्टम ओमिक्रॉन के खिलाफ काम नहीं करता?
    डॉ. शशांक: हमारे शरीर के पास खुद की रक्षा के लिए कई सारे हथियार होते हैं. भले ही डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ हमारा इम्यून सिस्टम उतना कारगर नहीं हो सका लेकिन यह अच्छी बात है कि इस तरह के वेरिएंट से मुकाबला करने में हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में क्षमता मौजूद है. अगर कोई व्यक्ति इस वेरिएंट के संपर्क में आता है तो इस बात की अधिक संभावन है कि उसमें इसके हल्के लक्षण (mild symptoms ) दिखाई दे.

    ओमिक्रॉन पर वैक्सीन कितनी असरदार है?
    डॉ. शशांक: शुरुआती विश्लेषणों के आधार पर पाया गया है कि वर्तमान में जितनी भी वैक्सीन है, इनका असर ओमिक्रॉन पर बहुत ही कम है. इसलिए वर्तमान म्यूटेशन को देखते हुए बूस्टर शॉट पर विचार किया जा रहा है. हालांकि वर्तमान वैक्सीनेशन पर जोर देना समय की जरूरत है. इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन अगर आपने अब तक वैक्सीन नहीं ली है तो आपको ओमिक्रॉन की गंभीरता का ज्यादा खतरा है. इसलिए वैक्सीन लेना बहुत जरूर है. खासकर जो लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा है, उन्हें हर हाल में वैक्सीन लेनी चाहिए.

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    क्या ओमिक्रॉन पहले से ज्यादा घातक है?
    डॉ. शशांक: इस मुद्दे पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन हमें इससे डरने के बजाय इससे बचने के उपायों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. हर हाल में हमें कोरोना के सभी सरकारी प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए.

    क्या भारत को चिंता करने की जरूरत है?
    डॉ. शशांक: निश्चित रूप से यह हमारे लिए भी चिंता का विषय है. हमारा देश बहुत ही बड़ा और जटिल जनसंख्या वाली आबादी का देश है. अगर हम अभी से कुछ एहतियात न बरतें तो आने वाले समय में ओमिक्रॉन कोरोना के सभी स्वरूपों में सबसे ज्यादा घातक साबित हो सकता है. हमें जल्दी से जल्दी अपनी पूरी आबादी तक वैक्सीन के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा.

    अगर किसी में ओमिक्रॉन कंफर्म हो जाए तो क्या करना चाहिए?
    डॉ. शशांक: समय से आगे सोचना हमारी जरूरत है. कोविड को सिर्फ मेडिकल चिकित्सा की समस्या नहीं समझनी चाहिए बल्कि यह एक व्यवस्थागत जोखिम (systemic risk) भी है. इसलिए कोविड के बारे में हमें अपनी बुनियादी समझ को बदलने की जरूरत है. हमें उन चुनौतियों के लिए भी तैयार रहने की जरूरत है जिनसे जीवन और अर्थव्यस्था पर गहरा असर पड़ रहा है. हर तरह के व्यवधानों को व्यवस्थित तरीके से सुलझाने की जरूरत है. इस स्थिति से निपटने के लिए अमेरिका स्थित कोविड आरएक्स एक्सचेंज विभिन्न आयामों को सुलझाने के लिए तत्पर रहता है. कोविड प्रबंधन के लिए केवल हेल्थ केयर नीति ही पर्याप्त नहीं है बल्कि हमें इसके लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है.

    ओमिक्रॉन से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
    डॉ. शशांक: देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते सबसे पहले हमें कोविड संबंधित सभी व्यवहारों और नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए. अक्सर देखा जाता है कि लोग मास्क को ठुड्डी से नीचे लटका लेते हैं. यह बहुत ही गलत तरीका है. हमें अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाना चाहिए. मास्क लगाते समय यह ध्यान रहे कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढकी हो. मुंह और नाक किसी भी तरह से बाहर न रहे. चूंकि यह वायुजनित और पदार्थजनित बीमारी है इसलिए जब भी बाहर खांसे तो पूरी तरह से मुंह को ढक लें. हाथ धोने के लिए सरकारी मानक का इस्तेमाल करें. अगर आपने अब तक वैक्सीन नहीं ली है तो जल्दी से जल्दी वैक्सीन लें. वैक्सीन जीवन को बचा सकती है.

    बचाव के लिए क्या खाएं?
    डॉ. शशांक: अपनी डाइट में ऐसी चीजों का शामिल करें जिनमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी, जिंक और विटामिन सी मौजूद हो. ऐसा भोजन करें जिनमें एंटीऑक्सीडेंट्स हो. ये चीजें आपकी जीवन को बचा सकती हैं और बीमारी को फैलने से भी रोक सकती है. ध्यान रहे कि आजादी आपको जिम्मेदारी का अहसास दिलाती है. यह एक विशेषाधिकार है जिसे हमें समाज के साथ बांटना चाहिए. इस विशेषाधिकार को बनाए रखने में ही सबको सुरक्षित रख सकते हैं.

    Tags: Health, Lifestyle, Omicron

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