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मिल्क प्रोडक्ट्स में ज्यादा फैट होने से बच्चों की सेहत पर नहीं पड़ता फर्क - स्टडी

रिसर्च के दौरान बच्चों को फुल फैट डेयरी उत्पादों को दिए जाने पर उसके असर को लेकर स्टडी की गई. (फोटो-canva.com)

रिसर्च के दौरान बच्चों को फुल फैट डेयरी उत्पादों को दिए जाने पर उसके असर को लेकर स्टडी की गई. (फोटो-canva.com)

ऑस्ट्रेलिया की एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने अपनी एक स्टडी में पाया है कि जब बात छोटे बच्चों की हो, तो फुल फैट वाला दूध भी उतना ही अच्छा है, जितना कि लो फैट मिल्क. इस रिसर्च के दौरान बच्चों पर फुल फैट डेयरी उत्पादों को दिए जाने पर उसके असर को लेकर स्टडी की गई.

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मिल्क या मिल्क प्रोडक्ट्स में कितना फैट है, ये उसकी गुणवत्ता का एक पैमाना माना जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी (Edith Cowan University) के रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि जब बात छोटे बच्चों की हो, तो पूरे फैट वाला (Full Fat Milk) दूध भी उतना ही अच्छा है, जितना कि लो फैट दूध (Low Fat Milk). इस स्टडी का निष्कर्ष अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन (American Journal of Clinical Nutrition) में प्रकाशित हुआ है. ईसीयू में एसोसिएट प्रोफेसर थेरेस ओसुल्लीवान (Therese A O’Sullivan) के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च के दौरान बच्चों को फुल फैट डेयरी उत्पादों (Full fat Dairy Products) दिए जाने पर उसके असर को लेकर स्टडी की गई.

इस दौरान 4 से 6 साल तक के 49 हेल्दी बच्चों को अचानक ही चुन लिया गया. उन्हें 3 महीने तक रोजाना रेगुलर डाइट में या तो फुल फैट या लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स दिए गए. ये डेयरी प्रोडक्ट्स उन्हें हर 15 दिन फ्री दिए ताकि उसकी उपलब्धता बराबर सुनिश्चित की जा सके. इनमें से किसी ग्रुप को नहीं मालूम था कि उन्हें फुल या लो फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स दिए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस दौरान बचे हुए प्रोडक्ट्स को भी वापस लिया गया, ताकि यह पता चल सके कि बच्चों ने कितना खाया.

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इस तरह डेयरी प्रोडक्ट्स के उपभोग के बेस्ड पर रिसर्चर्स ने पहली बार बच्चों में मोटापा (Obesity), शरीर की संरचना (body composition) ब्लड प्रेशर और ब्लड बायोमाकर्स (blood biomarkers) का विस्तृत विश्लेषण किया है. इसमें पाया गया कि बच्चों ने चाहे फुल या लो फैट के डेयरी प्रोडक्ट्स लिए हों, लेकिन दोनों ही ग्रुप्स ने बराबर मात्र में कैलोरी (calories) लीं. हालांकि, जिन बच्चों ने लो फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स लिए, स्वाभाविक है कि उन्होंने खाने-पीने की दूसरी चीजों से शरीर को मिलने वाली कैलोरी की भरपाई की.

क्या कहते हैं जानकार
प्रोफेसर थेरेस ओसुल्लीवान के अनुसार, उनकी टीम द्वारा की गई इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि दोनों ही ग्रुप्स के बच्चों में मोटापा या कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के मामले में कोई फर्क नहीं था.

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पहले यह माना जाता रहा है कि छोटे बच्चों को लो फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स से फायदा होगा, क्योंकि उनके सैचुरेटेड फैट (saturated fat) के लो लेवल और ऊर्जा के कम घनत्व (low energy density) के कारण मोटापे से बचने और संबंधित कार्डियोमेटाबॉलिक (Cardiometabolic) बीमारियों के रिस्क को कम करने में मदद मिलेगी.

स्टडी के नतीजे
प्रोफेसर थेरेस का कहना है कि हमारी स्टडी के निष्कर्ष बताते हैं कि हेल्दी बच्चे फुल फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स सुरक्षित तरीके से पचा लेते हैं और उससे उनमें मोटापा या कार्डियोमेटाबॉलिक साइड इफेक्ट्स नहीं होते है. इसलिए, जरूरी है कि दो साल या इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए डाइट की गाइडलाइंस को लेकर ताजा निष्कर्ष के आधार पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.

Tags: Child Care, Health, Health News, Lifestyle

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