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छोटी उम्र से ही करेंगे घरेलू काम तो नहीं होंगे डिमेंशिया के शिकार - स्टडी

डिमेंशिया की बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में होती है. (Image:shutterstock.com)

डिमेंशिया की बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में होती है. (Image:shutterstock.com)

Household work reduces dementia: भूलने की बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन घर की साफ-सफाई कर इस बीमारी के खतरों से बचा जा सकता है.

  • News18Hindi
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    Household work reduces dementia: पिछले दो साल से कोरोना ने सामाजिक अलगाव पैदा किया है. इसके कारण लोग स्ट्रेस में हैं. लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या किया जाए. स्ट्रेस के कारण लोगों की प्रोडक्टिविटी कम हो रही है और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. सबसे ज्यादा लोगों को भूलने की बीमारी हो रही है. वैसे तो डिमेंशिया की बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में होती है, लेकिन तनाव के कारण कई बार यह आम लोगों में भी पनपने लगती है. इसमें याददाश्त कमजोर होने लगती है और सोचने की शक्ति प्रभावित होती है.

    इससे रोजाना के जीवन में सामाजिक गतिविधियां भी प्रभावित होती है. पर भूलने की बीमारी का कोई इलाज नहीं है. सिर्फ एहतियात और थेरेपी के माध्यम से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है. टीओआई की खबर के अनुसार शुरुआती उम्र से ही घर में साफ-सफाई का काम करने से आगे की उम्र में डिमेंशिया या भूलने की बीमारी के खतरों से बचा जा सकता है.

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    दिमाग की क्षमता बढ़ती है
    अध्यन के अनुसार साफ-सफाई की आम गतिविधियां जैसे कि घर में झाड़ू देना, गार्डनिंग करना इत्यादि से डिमेंशिया के जोखिम को बहुत कम किया जा सकता है. अगर आप कम उम्र से ही घर के आस-पास साफ सफाई का ख्याल रखते हैं, तो ज्यादा उम्र में आपको भूलने की बीमारी परेशान नहीं करेगी. ऐसा करने से काम करने की क्षमता बेहतर होती है. घर की साफ-सफाई में व्यस्त रहने से ब्रेन का वॉल्यूम बढ़ता है यानी ब्रेन के काम करने की क्षमता बढ़ती है. अध्यन में पाया गया है कि जो लोग घर का काम करते हैं, उनमें दिमाग का वॉल्यूम बाहर फिजिकल एक्सरसाइज करने वालों की तुलना में कहीं अधिक होता है.

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    मेडिटेशन की तरह है सफाई
    यह अध्यन जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी ( journal Neurology ) में प्रकाशित हुआ है. इसमें पांच तरह के घर का काम विशेष रूप से फायदेमंद होते हैं. इसके लिए बिस्तर की साफ-सफाई, तकिए की देखभाल, कूकिंग, गार्डनिंग, डस्टिंग, हैवी हाउसवर्क जैसे घर के कामों को महत्व दिया गया है. अध्यन में कहा गया है कि साफ-सफाई का मानसिक स्वास्थ्य से गहरा संबंध है. अध्यन के मुताबिक घर के आस-पास को व्यवस्थित रखने से तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है. अध्यन में कहा गया है कि सफाई एक मेडिटेशन की तरह है जिसके कारण ब्रेन में एंडोर्फिन (endorphins) रिलीज होता है. इसमें दर्द का एहसास कम हो जाता है और दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है.

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