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प्रेग्नेंसी में हो रही परेशानी की वजह एंड्रोमेट्रोयोसिस तो नहीं? जानें इसके लक्षण

यह गर्भाशय की बीमारी है जिससे प्रेगनेंसी में भी समस्या आ सकती है. Image - Shutterstock.com

यह गर्भाशय की बीमारी है जिससे प्रेगनेंसी में भी समस्या आ सकती है. Image - Shutterstock.com

यह गर्भाशय की बीमारी है जिसमें गर्भाशय की आंतरिक परत बनाने वाले ऊतक तेज़ी से बढ़ने लगते हैं और बाकी अंगों में फैलने लगते हैं.

  • News18Hindi
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    Health News: आज के दौर में इनफर्टिलिटी ( Infertility) की समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों में आम है, लेकिन अगर किसी महिला को पीरियड में दर्द, गर्भधारण करने में समस्या, सेक्स के दौरान दर्द हो रहा है तो ये जानने की कोशिश करें कहीं आप एंड्रोमेट्रोयोसिस की शिकार तो नहीं हैं? गर्भाशय की लाइनिंग को एंड्रोमेट्रियम कहते हैं. 10 में से एक महिला इस समस्या से ग्रसित है. Endometriosis Society Of India के अनुसार 25 मिलियन भारतीय महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस का शिकार हैं.  करीब 40% महिलाएं एंड्रोमेट्रोयोसिस की वजह से गर्भधारण नहीं कर पाती हैं. इसकी कुछ बातें और लक्षण हम यहां बता रहे हैं जो आपको इस बीमारी के बारे में जानकारी देंगे.

    इसका कारण

    इस बीमारी के कारण के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. लेकिन रिसर्च के मुताबिक यह हार्मोन से होने वाली सामान्य बीमारी है. जो 18 से 35 साल की उम्र की महिलाओं को होती है. 

    क्या है लक्षण

    इसका सबसे सामान्य लक्षण है कि महावारी के वक्त बहुत ज्यादा दर्द होता है. इसके अलावा बहुत ज्यादा मात्रा में रक्त स्राव भी होता है. कई महिलाओं को शारीरिक संबंध के दौरान भी दर्द महसूस होता है. कई बार शौच के दौरान या पेशाब करते वक्त भी दर्द होता है और खून आता है. महिलाओं को इस बीमारी के होने के कारण थकान, चक्कर आना और कब्ज की समस्या भी होती है.

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    इनफर्टिलिटी की वजह

    एंड्रोमेट्रोयोसिस के कारण इनफर्टिलिटी की समस्या आम है. एक शोध के मुताबिक 25 से 50% महिलाओं में जिन्हें गर्भधारण की समस्या होती है उनमें एंड्रोमेट्रोसिस की समस्या पाई गई है.

    कैसे चलता है पता

    ऊपर दिए गए अगर कोई भी लक्षण हैं और आप उसकी शिकायत अपने डॉक्टर से करते हैं तो सबसे पहले डॉक्टर आप का अल्ट्रासाउंड करेगी. इसके अलावा अगर जरूरत हुई तो एमआरआई स्कैन भी किया जा सकता है. अगर समस्या गंभीर होती है तो लेप्रोस्कोपी भी की जा सकती है.

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    क्या है समस्या का इलाज़

    इस बीमारी का इलाज लक्षण और गंभीरता को देख कर किया जाता है. इलाज से प्रजनन क्षमता बढ़ती है सबसे पहले इसमें दवाइयों का सहारा लिया जाता है.जिसमें खास कर तौर पर दर्द निवारक दवाएं होती हैं. जब दवाई काम नहीं करती या यह बीमारी स्टेज 3 या  4 पर होती है तब दूरबीन विधि से सर्जरी भी की जा सकती हैं.

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