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मूड खराब हो तो वो काम करें जिसमें आप माहिर हैं, उदासी हो जाएगी दूर - स्टडी

मूड खराब हो तो वो काम करें जिसमें आप माहिर हैं, उदासी हो जाएगी दूर - स्टडी

रिसर्च में पाया कि उदासी के दौरान जिन लोगों ने अपने बेस्ट स्किल पर काम किया, वे इस मनोदशा से जल्द उबर सके. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

रिसर्च में पाया कि उदासी के दौरान जिन लोगों ने अपने बेस्ट स्किल पर काम किया, वे इस मनोदशा से जल्द उबर सके. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

best way to fix a sad mood: ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी (Ohio State University) की ताजा स्टडी में उदासी से घिरे लोगों को रिसर्चर्स ने सुझाव दिया है कि वो अपनी मनोदशा (mood) को बेहतर करने के लिए एक विधि (Method) का प्रयोग करें. इसके तहत रिसर्चर्स ने उनसे उनकी बेस्ट स्किल्स (best skill) यानी सर्वश्रेष्ठ कौशल का प्रयोग करने के लिए कहा. यानी जिस काम में वे पारंगत (well-versed) हों, उदासी के समय उन्हें वो काम करना है. स्टडी के अनुसार, ऐसे प्रतिभागी उन प्रतिभागियों की तुलना में उदासी से जल्द उबर सके, जिन्हें ऐसा काम करने को कहा गया था जिसमें वो कमजोर थे.

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Best way to fix a sad mood : लाइफ में जैसे खुशियां हमेशा नहीं रहती हैं, उसी तरह दुख और उदासी भी हमेशा नहीं रहती है. किसी भी इंसान के लिए इन दोनों ही मनोदशा से बच पाना बेहद मुश्किल होता है. लेकिन ये हमारे ऊपर है कि हम कितना जल्दी उस दुख या उदासी से अपने आप को बाहर निकाल पाते हैं. अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी (Ohio State University) की ताजा स्टडी में रिसर्चर्स ने इससे जल्द उबरने का तरीका बताया है. इसमें उदासी से घिरे लोगों को रिसर्चर्स ने सुझाव दिया है कि वो अपनी मनोदशा (mood) को बेहतर करने के लिए एक विधि (Method) का प्रयोग करें. इसके तहत रिसर्चर्स ने उनसे उनकी बेस्ट स्किल्स (best skill) यानी सर्वश्रेष्ठ कौशल का प्रयोग करने के लिए कहा.

यानी जिस काम में वे पारंगत (well-versed) हों, उदासी के समय उन्हें वो काम करना है. स्टडी के अनुसार, ऐसे प्रतिभागी उन प्रतिभागियों की तुलना में उदासी से जल्द उबर सके, जिन्हें ऐसा काम करने को कहा गया था जिसमें वो कमजोर थे. इस स्टडी के निष्कर्षों को जर्नल ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी (Journal of Clinical Psychology) में प्रकाशित किया गया है.

क्या कहते हैं जानकार
स्टडी के प्रमुख राइटर और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में साइकोलॉजी के रिसर्चर सैमुअल मर्फी (Samuel T Murphy) के अनुसार, हमने अपनी स्टडी के दौरान पाया कि इस मेथड (विधि) ने लोगों को ये सोचने में मदद की है कि वे अपनी ताकत के साथ काम कर रहे हैं. इस स्टडी के को-राइटर और ओहियो स्टेट डिप्रेशन लेबोरेट्री के प्रमुख डैनियल स्ट्रंक (Dr. Daniel Strunk) के अनुसार, हमारी स्टडी के नतीजे बताते हैं कि ये मायने नहीं रखता कि वे अपने उस कौशल से अच्छे थे या नहीं, जिसका प्रयोग वे उदासी के दौरान कर रहे थे. उनमें ये विश्वास था कि वे उस कौशल में अच्छे थे, जिसने इस तरीके को प्रभावी बना दिया.

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इस तरह हुई स्टडी
इस स्टडी के लिए रिसर्चर्स ने 616 ग्रेजुएट छात्रों को शामिल किया. इन्हें दो तरह की थेरेपी का प्रयोग करने को कहा. एक कॉग्निटिव (संज्ञानात्मक) और माइंडफुलनेस (सचेतन). उन दोनों ही तरीकों का प्रयोग डॉक्टर डिप्रेशन आदि समस्याओं के निदान के लिए करते हैं. रिसर्चस ने प्रतिभागियों को एक काल्पनिक स्थिति दी, जिसमें उन्हें किसी मित्र द्वारा किसी सामाजिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किए जाने से आहत महसूस करना था. उस दौरान उन्हें उपरोक्त दोनों ही थेरेपी अपनाने को कहा गया था, साथ ही ये भी कहा गया कि वे उदासी के समय या तो सर्वश्रेष्ठ कौशल का प्रयोग करें या फिर कमजोरी का.

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स्टडी में सामने आया
रिसर्च में पाया कि उदासी के दौरान जिन लोगों ने अपने बेस्ट स्किल पर काम किया, वे इस मनोदशा से जल्द उबर सके. हालांकि, रिसर्चर्स अभी ये नहीं बता सकते हैं कि इसके पीछे की वजह क्या है, लेकिन संभवत: इसकी वजह ये है कि इससे उन्हें शुरुआती प्रोत्साहन मिलता है.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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