जानें क्‍या है पार्किंसन डिजीज, बुजुर्गों को इस रोग से बचाने को जरूर खिलाएं तिल

पार्किंसन डिजीज दरअसल एक ब्रेन डिसऑर्डर है जिसका अब तक सटीक इलाज नहीं खोजा जा सका है. Image Credit : Pixabay

पार्किंसन डिजीज दरअसल एक ब्रेन डिसऑर्डर है जिसका अब तक सटीक इलाज नहीं खोजा जा सका है. Image Credit : Pixabay

पार्किंसन रोग (Parkinson Disease) 50 की उम्र के बाद देखने को मिलता है जिसमें उम्र (Age) के साथ साथ लोगों के काम करने की क्षमता भी धीरे धीरे कम होती जाती है. अब तक इसका सटीक इलाज (Treatment) नहीं खोजा जा सका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2021, 6:37 AM IST
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Parkinson Disease: पार्किंसन डिजीज (Parkinson Disease) दरअसल एक ब्रेन डिसऑर्डर (Brain Disorder) है जिसमें इंसान को चलने में परेशानी होती है. इसके अलावा शरीर में कंपन, अकड़न, शरीर में असंतुलन जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. पार्किंसन की वजह से मरीज की  कई बार बोलने में जुबान लड़खड़ाती है और लिखने पर हाथ कांपने लगते हैं.. इसके अलावा मेंटल बिहेवियर में बदलाव, नींद की कमी, डिप्रेशन और मेमोरी लॉस जैसी समस्‍याएं भी इसमें बढ़ने लगती है. नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑन एजिंग (NIH) के मुताबिक आमतौर पर यह रोग 50 की उम्र के बाद देखने को मिलता है और इसमें उम्र के साथ साथ शरीर के काम करने की क्षमता धीरे धीरे कम होती जाती है.अब तक इसका सटीक इलाज नहीं खोजा जा सका है. दवाओं और फिजियोथेरिपी के जरिए इसके लक्षण को कंट्रोल रखने की कोशिश की जाती है.

तिल के हैं बड़े फायदे

जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी में इस बीमारी को लेकर चूहों पर एक रिसर्च किया गया है. इस रिसर्च में पाया गया है कि पार्किंसन में तिल काफी फायदेमंद होता है. मेडिकल न्‍यूज टुडे के मुताबिक नई रिसर्च बताती है कि तिल की मदद से बुजुर्गों में होने वाली इस बीमारी के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है. दरअसल तिल में मौजूद तत्‍‍‍व शरीर में न्यूरॉन को डैमेज होने से रोकते हैं और डोपामाइन हार्मोन की मात्रा को भी कम होने से रोकते हैं.

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यही नहीं, रिसर्च में पाया गया कि तिल में सिसेमिनॉल नाम का रसायन काफी मात्रा में होता है जो शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से रोकता है. बता दें कि दरअसल ब्रेन में मौजूद नर्व कोशिकाएं ही इंसान को उठने-बैठने और चलने-फिरने के मूवमेंट को कंट्रोल करती हैं जबकि पार्किंसन डिजीज होने पर यही नर्व कोशिकाएं डैमेज होकर खत्म होने लगतीं हैं. ऐसे में तिल में मौजूद ये तत्‍व उम्‍मीद की एक किरण की तरह साबित हो सकते हैं, हालांकि पार्किंसन के प्रभाव को रोकने में ये काफी कारगर हो सकती है. हालांकि अभी तक इसका हयूमन ट्रायल बाकी है लेकिन वैज्ञानिकों को इस शोध से काफी उम्‍मीदें हैं.

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बुजुर्गों के लिए तिल के हैं और भी फायदे



तिल में एंटीऑक्‍सीडेंट, फायबर, प्रोटीन, विटामिन-बी, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैट पाया जाता है जो बढ़ती उम्र में कई तरह से सेहत के लिए जरूरी है. तिल में लिगनेंस काफी मात्रा में पाया जाता है जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है. 50 ग्राम तिल रोजाना लेने पर हाई ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है. यह आर्थराइटिस से जूझ रहे लोगों के लिए भी फायदेमंद है. तिल के सेवन से  आर्थराइटिस के दर्द को कम किया जा सकता है.
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