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Neurological Disorder: इन 5 लक्षणों को न करें इग्नोर

न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर रोगों के लिए कोई त्वरित समाधान नहीं है. Image-shutterstock.com

Neurological Disorder: सुन्नता यानी संवेदना का आंशिक या पूर्ण नुकसान न्यूरोपैथी या रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) के घाव का संकेत हो सकता है. इससे चलने या कोई अन्य शारीरिक कार्य करने में कठिनाई बढ़ सकती है.

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    क्या आपको पता है न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर (Neurological Disorder) क्या होता है? हमारा नर्वस सिस्टम (Nervous System) दैनिक जीवन में शामिल कई स्वैच्छिक और अनैच्छिक गतिविधियों को करने में मदद करता है. न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर होने पर मूवमेंट, दृष्टि, शरीर संतुलन, वाक्, मेमोरी, सीखने, खाने या निगलने में कठिनाई होती है. अगर रोगी की नसें, साथ ही मस्तिष्क प्रभावित होता है, तो न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर को कई रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है. इंडिया डॉट कॉम की खबर के अनुसार यह एक ऐसी बीमारी है जो सेंट्रल और पेरिफेरल नर्वस सिस्टम (Central and Peripheral Nervous System) को प्रभावित करती है. सेंट्रल और पेरिफेरल नर्वस सिस्टम में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, क्रैनियल नसों, तंत्रिका जड़ों, परिधीय नसों, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, न्यूरोमस्क्यूलर जंक्शन और मांसपेशियों का समावेश होता है.

    तंत्रिका विकार या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर आमतौर पर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले वायरल, जीवाणु, कवक और परजीवी संक्रमण के कारण होते हैं. नर्वस सिस्टम की बीमारियों में अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया, मिर्गी, सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियां जैसे माइग्रेन, स्ट्रोक और अन्य सिरदर्द शामिल हैं. वहीं अन्य तंत्रिका संबंधी समस्याओं में पार्किंसंस, एकाधिक स्क्लेरोसिस, न्यूरोइनफेक्शन, मस्तिष्क ट्यूमर, तंत्रिका तंत्र के दर्दनाक विकार और कुपोषण के कारण न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर हो सकता है.

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    न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर के इन 5 लक्षणों को न करें इग्नोर

    सिर, गर्दन, पीठ या शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द
    सिर, गर्दन, पीठ, हाथ या पैर में दर्द के सामान्य लक्षण कभी-कभी भयावह बीमारियों के कारण हो सकते हैं. स्थानीयकृत और गर्दन की जकड़न के साथ गंभीर सिरदर्द मेनिनजाइटिस, ब्रेन हैमरेज, ब्रेन ट्यूमर या वेनस साइनस थ्रॉम्बोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत दे सकता है. गर्दन, हाथ, पीठ, एक पैर में दर्द के साथ अंगों की कमजोरी डिस्क प्रोलैप्स के कारण नर्वस सिस्टम की परेशानी हो सकती है. कभी-कभी एक गंभीर बीमारी गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barre Syndrome) में आपातकालीन उपचार की जरूरत होती है.

    अंगों का फड़कना, झुनझुनी या कमजोरी होना
    सुन्नता यानी संवेदना का आंशिक या पूर्ण नुकसान न्यूरोपैथी या रीढ़ की हड्डी के घाव का संकेत हो सकता है. इससे चलने या कोई अन्य शारीरिक कार्य करने में कठिनाई बढ़ सकती है. लगातार कमजोरी, अंगों का टूटना और मरोड़ना एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस का लक्षण हो सकता है. वहीं अंगों की अचानक कमजोरी एक्यूट न्यूरोपैथी का कारण हो सकती है.

    कमजोरी, आंखों की रोशनी कमजोर होना, चक्कर आना और बोलने या निगलने में परेशानी
    शरीर के किसी एक अंग को प्रभावित करने वाले नर्वस सिस्टम संबंधी लक्षणों की अचानक उपस्थिति मस्तिष्क में कम रक्त आपूर्ति या रक्तस्राव के कारण हो सकती है. अगर किसी रोगी में ऐसे लक्षणों की पहचान की जाती है तो उसका इलाज तुरंत शुरू करें.

    दौरे पड़ना, अंगों का मरोड़ना और बार-बार बेहोश होना
    मस्तिष्क की गतिविधि में परेशानी होने के चलते दौरे पड़ना न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर का एक लत्रण है. हालांकि कुछ दौरे मामूली परिवर्तन और चेहरे/अंगों में फोकल झटके या झुनझुनी का कारण बनते हैं लेकिन अगर समय पर इनका इलाज नहीं किया गया तो इसके बिगड़ने का खतरा बना रहता है.

    मांसपेशियों में अकड़न, कपकपी, याददाश्त या मानसिक क्षमता का कमजोर होना
    बुजुर्गों में कठोरता, कपकपी और धीमापन पार्किंसंस रोग की ओर इशारा कर सकता है. यह अल्जाइमर रोग का कारण भी हो सकता है जहां दीर्घकालिक स्मृति अक्सर बरकरार रहती है, लेकिन छोटी यादें फीकी पड़ जाती हैं.

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    न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर का इलाज
    न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर रोगों के लिए कोई त्वरित समाधान नहीं है, लेकिन रोगी की अच्छी देखभाल उसे लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती है. प्रभावी उपचार के लिए एक अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें. न्यूरोलॉजिकल स्थिति को जानने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट को कई तरह के परीक्षण करने पड़ सकते हैं. कुछ मामलों में, उन्हें गंभीर परिस्थितियों में ऑपरेशन करने के लिए न्यूरोसर्जन या इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट की मदद की जरूरत हो सकती है. एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रोग में किसी को घबराना नहीं चाहिए और जरूरी भावनात्मक समर्थन और देखभाल की व्यवस्था करनी चाहिए. ऐसे मामलों में कई लोग ठीक भी हो जाते हैं.
    Published by:Purnima Acharya
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