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लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स डाइट दिल के मरीजों को वजन कम करने में करती है मदद- स्टडी

लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स डाइट में सेब, संतरा, ब्रोकली, बीन्स और ब्राउन राइस व ओट्स आदि शामिल हैं. (फोटो-canva)

लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स डाइट में सेब, संतरा, ब्रोकली, बीन्स और ब्राउन राइस व ओट्स आदि शामिल हैं. (फोटो-canva)

हाई-ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी हाई-जीआई डाइट ब्लड में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है. इनमें व्हाइट ब्रेड, चावल, आलू व ...अधिक पढ़ें

यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के एसीएनएपी-यूरोहार्टकेयर कांग्रेस-2022 (ACNAP-EuroHeartCare Congress 2022) में पेश की गई एक स्टडी में दावा किया गया है कि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (low glycemic index) यानी लो जीआई वाली डाइट हार्ट के मरीजों को वजन कम करने में मदद करती हैं. आपको बता दें कि जीआई, ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ाने की क्षमता के आधार पर वसायुक्त भोजन को रैंक प्रदान करने की एक प्रणाली है. हाई जीआई डाइट ब्लड में शुगर की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है. इनमें व्हाइट ब्रेड, चावल, आलू व मिठाइयां शामिल हैं.

कम जीआई वाली डाइट देर से पचती हैं, जिसके कारण शुगर का लेवल भी धीरे-धीरे बढ़ता है. इनमें सेब, संतरा, ब्रोकली, बीन्स और ब्राउन राइस व ओट्स आदि शामिल हैं. मांस व मछली आदि की जीआई रैंकिग नहीं की गई है, क्योंकि उनमें कार्बोहाइड्रेट नहीं होता. इससे पहले की स्टडीज में पाया गया है कि हाई जीआई डाइट से हार्ट रोगों व टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.

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कैसे हुई स्टडी
हालिया स्टडी बताती है कि कम जीआई वाली डाइट बॉडी मास इंडेक्स (BMI) बैलेंस रखने में मदद करती है. साल 2016 से 2019 तक चली स्टडी में 38 से 76 साल तक की आयु वाले 160 मरीजों को शामिल किया गया. इस दौरान एक ग्रुप को सामान्य, जबकि दूसरे ग्रुप को कम जीआई वाली डाइट पर तीन महीने तक रखा गया. इसके बाद दोनों ग्रुप्स के लोगों के बीएमआई व शारीरिक संरचना को मापा गया, इसमें कम जीआई वाली डाइट लेने वाले ग्रुप में बड़ा पॉजिटिव चेंज देखने को मिला.

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क्या कहते हैं जानकार
इस स्टडी के ऑथर और रिपब्लिकन स्पेशलाइज्ड साइंटिफिक प्रैक्टिकल मेडिकल सेंटर ऑफ़ थेरेपी एंड मेडिकल रिहैबिलिटेशन, ताशकंद, उज़्बेकिस्तान के डॉ. जमोल उज़ोकोव (Dr. Jamol Uzokov) के अनुसार, “इस स्टडी के निष्कर्षों की पुष्टि के लिए बड़ी स्टडी की ज़रूरत है. हमारी स्टडी से संकेत मिलते है कि बैलेंस डाइट के हिस्से के रूप में कम जीआई वाले खाने पर जोर देने से हार्ट डिजीज के मरीजों को उनकी बॉडी के वेट और उनकी कमर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.”

Tags: Health, Health News, Heart Disease, Lifestyle

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