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माइग्रेन के मरीजों में 20% तक बढ़ जाता है एज-रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन होने का रिस्क: स्टडी

माइग्रेन के मरीजों में 20% तक बढ़ जाता है एज-रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन होने का रिस्क: स्टडी

माइग्रेन बढ़ाता है एज-रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन का रिस्क. Image: shutterstock

माइग्रेन बढ़ाता है एज-रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन का रिस्क. Image: shutterstock

Migraine increases Macular Degeneration: हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों में माइग्रेन (Migraine) की समस्या होती है, उनमें नियोवैस्कुलर एज-रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन होने की संभावना 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.

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Migraine increases Macular Degeneration: हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों में माइग्रेन (Migraine) की समस्या होती है, उनमें नियोवैस्कुलर एज-रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन (age-related macular degeneration) होने की संभावना 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. आयु-संबंधित मैक्युलर डिजनरेशन रेटिना के मध्य भाग मैक्युला (Macula) से संबंधित एक समस्या है, जिसके कारण सेंट्रल विजन लॉस होता है. यह स्टडी साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित की गई है, जो ताइवान में रहने वाले लोगों पर आधारित है. मैक्युलर डिजनरेशन (macular degeneration) दुनिया भर में ब्लाइंडनेस और दृष्टि दोष के प्रमुख कारणों में से एक है. यह समस्या आमतौर पर 75 वर्ष की आयु के बाद अधिक नजर आती है.

हालांकि, पहले किए गए शोध में ये बात भी सामने आई है कि नियोवैस्कुलर एज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन (AMD) आंखों तक ही सीमित होती है, लेकिन एजेएमसी की खबर के अनुसार, इस नए अध्ययन में यह कहा गया है कि इस समस्या से आंखों के साथ ही हृदय और मस्तिष्क भी प्रभावित होती है. एएमडी के कारण हार्ट फेल और हार्ट डिजीज होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि होने से भी एएमडी होने का जोखिम बढ़ जाता है. शोध में यह सुझाव दिया गया है कि ब्लड वेसल्स पैथोलॉजी विशेष रूप से एंडोथेलियल कोशिकाएं माइग्रेन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हाल के शोध ने भी माइग्रेन में न्यूरोवैस्कुलर तंत्र की भूमिका को रेखांकित किया है.

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माइग्रेन और नियोवैस्कुलर एएमडी के बीच एक संभावित लिंक की जांच करने के लिए, शोधकर्ताओं ने ताइवान नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस (एनएचआई) रिसर्च डाटाबेस (एनएचआईआरडी) में सूचीबद्ध मरीजों के  आंकड़ों का आकलन किया. जनवरी 2010 से लेकर दिसंबर 2016 के बीच, कुल 26,209 मरीजों को पहली बार नियोवैस्कुलर एएमडी का निदान प्राप्त हुआ. इनमें से 20,333 व्यक्तियों को अंतिम विश्लेषण के लिए शामिल किया गया और इनका मिलान बाकी के एनएचआईआरडी लाभार्थियों (एन= 81,332) के साथ किया गया. हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि नियोवैस्कुलर एएमडी, हृदय रोग और माइग्रेन के अंतर्निहित सामान्य मॉलिक्युलर मेकैनिज्म आगे की जांच के लिए जटिल बने हुए हैं.

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इस अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने कहा कि चिकित्सकों को माइग्रेन पीड़ितों में नियोवैस्कुलर एएमडी की संभावना के प्रति सतर्क रहना चाहिए और उन्हें एक नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा समय-समय पर फंडस परीक्षण (Fundus examination) के लिए संदर्भित करना चाहिए.

Tags: Health, Lifestyle

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