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अल्जाइमर के मरीजों में ज्यादा सुस्ती की वजह अनिद्रा नहीं, न्यूरॉन की कमी - स्टडी

अल्जाइमर पीड़ित रात में ठीक से नींद नहीं ले पाते, जिसके कारण उन्हें दिन में उंघाई या झपकी आती रहती है और वे सुस्त बने रहते हैं. (फोट-canva.com)

अल्जाइमर पीड़ित रात में ठीक से नींद नहीं ले पाते, जिसके कारण उन्हें दिन में उंघाई या झपकी आती रहती है और वे सुस्त बने रहते हैं. (फोट-canva.com)

अल्जाइमर पीड़ितों की उंघाई व सुस्ती के लिए अनिद्रा नहीं, बल्कि खास तरह के न्यूरॉन में आने वाली गिरावट जिम्मेदार है, जो हमें जागने और तरो-ताजा रखने में मदद करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को के वैज्ञानिकों द्वारा की गई इस स्टडी में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि न्यूरॉन में गिरावट के लिए टाऊ (Tau Protein) प्रोटीन जिम्मेदार है.

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आमतौर पर बुढ़ापे में होने वाली भूलने की बीमारी अल्जाइमर (Alzheimer) दुनिया के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है. पश्चिमी देशों में 50 के बाद अधिकांश लोग इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं. इसमें याद्दाश्त कमजोर होने लगती है और अक्सर लोग भूलने लगते हैं. अब इस बीमारी से जुड़ी एक अन्य रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि अल्जाइमर पीड़ितों की उंघाई व सुस्ती (drowsiness and lethargy) के लिए अनिद्रा (insomnia) नहीं, बल्कि खास तरह के न्यूरॉन (neuron) में आने वाली गिरावट जिम्मेदार है, जो हमें जागने और तरो-ताजा रखने में मदद करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के साइंटिस्ट्स द्वारा की गई इस स्टडी में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि न्यूरॉन में गिरावट के लिए टाऊ (Tau Protein) प्रोटीन जिम्मेदार है.

इस स्टडी का निष्कर्ष ‘जेएएमए न्यूरोलाजी (JAMA Neurology)’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है. आपको बता दें कि इस बीमारी (अल्जाइमर) का अब तक कोई ठोस इलाज नहीं है. कुछ थेरेपी की मदद से इसे काबू में लाने की कोशिश की जाती है, लेकिन पूरी तरह से इस बीमारी को साइंटिस्ट समझ भी नहीं पाए हैं.

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स्टडी में क्या निकला
इस स्टडी के अनुसार, ये आम धारणा है कि अल्जाइमर पीड़ित रात में ठीक से नींद नहीं ले पाते, जिसके कारण उन्हें दिन में उंघाई या झपकी आती रहती है और वे सुस्त बने रहते हैं. इसके इलाज की सलाह दी जाती है, ताकि अल्जाइमर पीड़ित ज्यादा जाग सकें और तरो-ताजा बने रहें. इस स्टडी में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को के मेमोरी एंड एजिंग सेंटर में भर्ती मरीजों के आंकड़ों की मदद ली गई.

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मरीजों की नींद की इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) के जरिए निगरानी की गई. भर्ती मरीजों ने स्वेच्छा से मौत के बाद अपना ब्रेन दान कर दिया था. पोस्टमार्टम के बाद उनके ब्रेन के टिशूज की सूक्ष्म स्थिति और नींद संबंधी आंकड़ों की तुलना की गई. इस स्टडी के राइटर और मनोचिकित्सक थॉमस नेलन (Thomas Neylan) की सहयोगी न्यूरोपैथोलॉजिस्ट (neuropathologist) ग्रिनबर्ग (Grinberg) के अनुसार, ‘ऐसा नहीं है कि ये मरीज दिन में थके हुए हैं, क्योंकि वे रात में नहीं सोते हैं. ये इस वजह से है कि उनके ब्रेन में जो सिस्टम उन्हें जगाए रखता है, वो नहीं चला गया है. हमने अपनी स्टडी में ये साबित करने में सफलता पाई कि अल्जाइमर पीड़ितों की झपकी व सुस्ती के लिए न्यूरॉन में गिरावट जिम्मेदार है.’

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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