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विषाक्त वायु में जन्म लेने से बच्चों पर घातक असर होने का खतरा –नई स्टडी

विषाक्त वायु में जन्म लेने से बच्चों पर घातक असर होने का खतरा –नई स्टडी

ब्रिटेन में करीब 2.5 लाख बच्चे हर साल विषाक्त वायु (toxic air) के बीच पैदा लेते हैं, जिनपर कई तरह के घातक असर का खतरा है. (Image : Twitter

ब्रिटेन में करीब 2.5 लाख बच्चे हर साल विषाक्त वायु (toxic air) के बीच पैदा लेते हैं, जिनपर कई तरह के घातक असर का खतरा है. (Image : Twitter

Baby born in toxic air: ब्रिटेन में 2.5 लाख बच्चे हर साल विषाक्त वायु वाले वातावरण में पैदा लेते हैं. इन बच्चों के उपर शुरुआत से ही कई जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडराता रहता है. ब्रिटेन में हुए इस अध्ययन में इस विषाक्त वायु को राष्ट्रीय शर्म करार दिया गया है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे ही विषाक्त वातावरण में बच्चे पैदा लेते रहे, तो उन्हें कई तरह के जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ सकता है.शोधकर्ताओं ने पाया कि 2.5 लाख से ज्यादा बच्चे उन जगहों पर पैदा हुए हैं, जहां का पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से ज्यादा है.

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    Pollution effects on baby: ब्रिटेन में करीब 2.5 लाख बच्चे हर साल विषाक्त वायु (toxic air) के बीच पैदा लेते हैं, जिनपर कई तरह के घातक असर का खतरा है. डेलीमेल की खबर के मुताबिक नई स्टडी के आधार पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे ही विषाक्त वातावरण में बच्चे पैदा लेते रहे, तो उन्हें कई तरह के जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ सकता है. इस अध्ययन से यह समझा जा सकता है कि जब संपन्न देश ब्रिटेन में विषाक्त वायु यानी वायु प्रदूषण का यह हाल है, तो भारत में क्या स्थित हो सकती है. ब्रिटिश लंग फाउंडेशन ने इसे राष्ट्रीय शर्म करार दिया है और सरकार से इस पर अविलंब कदम उठाने के लिए कहा है. शोधकर्ताओं ने 2019 में उन जगहों का अध्ययन किया जहां वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है. इन जगहों में दो तिहाई जगहें ऐसी थीं, जहां प्रदूषण के कण (पार्टिकुलेट मैटर -PM2.5) विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization)के मानक से ज्यादा थे. विषाक्त वायु के कारण ब्रिटेन में हर साल 36 हजार लोगों की मौत होती है.

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    प्रदूषण शरीर के प्रत्येक अंग को प्रभावित करता है
    ब्रिटेन में किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन जगहों पर प्रदूषण का स्तर ज्यादा था वहां 71 प्रसव केंद्रों में प्रत्येक साल 1.83 लाख बच्चे पैदा होते हैं. पीएम 2.5 प्रदूषण आमतौर पर वाहन और इंडस्ट्री से निकले धुएं के कारण होता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि 2.5 लाख से ज्यादा बच्चे उन जगहों पर पैदा हुए हैं, जहां का पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से ज्यादा है.शोधकर्ताओं ने बताया है कि यह प्रमाणित हो चुका है कि प्रदूषण शरीर के प्रत्येक अंग को प्रभावित करता है और यह लंग्स के विकास में बाधा बन जाता है. इसका मतलब यह हुआ है कि यह बच्चों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा क्योंकि बच्चे के लंग्स विकसित हो रहे होते हैं.

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    समय से पहले मौत का जोखिम
    शोध के मुताबिक वायु प्रदूषण विकसित हो रहे बच्चों के लंग्स और ब्रेन को प्रभावित करता है. यहां तक कि भ्रूण में पल रहे बच्चे का विकास भी प्रभावित होता है. यही कारण है कि जो महिलाएं विषाक्त वायु में सांस लेती हैं, उनमें प्रीमेच्योर डिलिवरी का जोखिम रहता है. किसी-किसी मामले में गर्भपात का भी खतरा रहता है. ब्रिटेन में प्रत्येक साल 36 हजार लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले हो जाती है. इसके अलावा विषाक्त वातावरण के कारण बच्चों में शुरुआत से अस्थमा का भी खतरा है. शोधकर्ताओं द्वारा तैयार इस पेपर को यूएन क्लाइमेट चेंज कांफ्रेंस में पेश किया जा रहा है.

    Tags: Health, Lifestyle, Pollution

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