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लिवर कैंसर के इलाज में मिलेगी मदद, RNA के प्रोटीन की हुई पहचान - स्टडी

लिवर कैंसर के इलाज में मिलेगी मदद, RNA के प्रोटीन की हुई पहचान - स्टडी

नई स्टडी में मिले निष्कर्ष से भविष्य में लिवर कैंसर का बेहतर इलाज होने के साथ ही इसकी पहचान भी बेहतर तरीके से हो सकेगी. (फोटो-shutterstock.com)

नई स्टडी में मिले निष्कर्ष से भविष्य में लिवर कैंसर का बेहतर इलाज होने के साथ ही इसकी पहचान भी बेहतर तरीके से हो सकेगी. (फोटो-shutterstock.com)

Liver cancer treatment by RNA protein : स्वीडन की मेडिकल यूनिवर्सिटी करोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institutet) के रिसर्चर्स द्वारा की गई इस स्टडी में रिसर्चर्स ने लिवर यानी गुर्दे से संबंधित कैंसर में एक प्रोटीन और एक आईएनसी-आरएनए मॉलीक्यूल (IncRNA Molecule) की पहचान कर ली है. स्टडी के अनुसार, आईएनसी-आरएनए मॉलीक्यूल (IncRNA Molecule) की तादाद बढ़ाने से ट्यूमर सेल (tumor cell) में जमा चर्बी कम हो जाती है. इससे ट्यूमर की कोशिकाओं यानी ट्यूमर सेल्स में विभाजन होता है और ये घटती जाती हैं. फिर ये ट्यूमर सेल एकदम ही खत्म हो जाते हैं. रिसर्चर्स का दावा है कि इस नई स्टडी में मिले निष्कर्ष से भविष्य में कैंसर का बेहतर इलाज होने के साथ ही इसकी पहचान भी बेहतर तरीके से हो सकेगी.

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    Liver cancer treatment by RNA protein : लिवर से जुड़ी बीमारियों (Liver diseases) या लिवर कैंसर (Liver Cancer) के इलाज की दिशा में साइंटिस्टों को बड़ी कामयाबी मिली है. स्वीडन की मेडिकल यूनिवर्सिटी करोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institutet) के रिसर्चर्स द्वारा की गई इस स्टडी में रिसर्चर्स ने लिवर यानी गुर्दे से संबंधित कैंसर में एक प्रोटीन और एक आईएनसी-आरएनए मॉलीक्यूल (IncRNA Molecule) की पहचान कर ली है. स्टडी के अनुसार, आईएनसी-आरएनए मॉलीक्यूल (IncRNA Molecule) की तादाद बढ़ाने से ट्यूमर सेल (tumor cell) में जमा चर्बी कम हो जाती है. इससे ट्यूमर की कोशिकाओं यानी ट्यूमर सेल्स में विभाजन होता है और कोशिकाएं घटती जाती हैं. फिर ये ट्यूमर सेल एकदम ही खत्म हो जाते हैं.

    रिसर्चर्स का दावा है कि इस नई स्टडी में मिले निष्कर्ष से भविष्य में कैंसर का बेहतर इलाज होने के साथ ही इसकी पहचान भी बेहतर तरीके से हो सकेगी. इस स्टडी के निष्कर्ष ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (BMJ) के जर्नल ‘गट (Gut)’ में प्रकाशित किए गए हैं.

    क्या कहते हैं जानकार
    करोलिंस्का इंस्टीट्यूट (Karolinska Institutet) में माइक्रोबायोलॉजी, ट्यूमर और सेल बायोलॉजी की सीनियर रिसर्चर क्लाडिया कटर (Claudia Kutter) ने बताया कि हमारे जीनोम (genome) हमारी कोशिकाओं को निर्देश देते हैं, जिससे हर एक प्रकार की कोशिका के लिए एक हाई लेवल वर्क करना तय होता है.

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    इस मैसेज को बाहर दो प्रकार के आरएनए मालीक्यूल (अणु) के जरिये भेजा जाता है. स्टडी में पाया गया कि ऐसे बहुत से प्रोटीन बिना कूट संदेश वाले आरएनए से प्रतिक्रिया करते हैं जिन्हें हम आइएनसी-आरएनए (incRNA) भी कहते हैं.

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    स्टडी में क्या निकला
    रिसर्च के दौरान लिवर कैंसर के मरीज से टिशू लिया गया और इसकी विशिष्ट जोड़ी प्रोटीन वाले आईएनए (सीसीटी3) और आईएनसी-आरएनए मॉलीक्यूल (LINC00326) बनाकर एडवांस सीआरआईएसपीआर टेक्नोलॉजी (CRISPR Technology) का इस्तेमाल करने पर पाया कि दोनों तरह के आरएनए कम हो रहे थे और उनका प्रोटीन भी कम हो रहा था. ये प्रोटीन ही कैंसर कोशिकाओं को प्रभावित करता है.

    Tags: Cancer, Health, Health News, Lifestyle

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