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ऑटिज्म के खतरे से जुड़े संकेतों का पता लगाने में वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी - स्टडी

ऑटिज्म के खतरे से जुड़े संकेतों का पता लगाने में वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी - स्टडी

ऑटिज्म एक दिमागी बीमारी है. ये एक ऐसी बीमारी है जो अधिकतर बच्चों को होती है. इसका पता लगा पाना काफी मुश्किल होता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

ऑटिज्म एक दिमागी बीमारी है. ये एक ऐसी बीमारी है जो अधिकतर बच्चों को होती है. इसका पता लगा पाना काफी मुश्किल होता है. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

signs associated with the risk of Autism : कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Columbia University Mailman School of Public Health) और नार्वेजियन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (Norwegian National Institute of Public Health) के रिसर्चर्स द्वारा की गई एक व्यापक स्टडी में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर (autism spectrum disorder) के विकास के खतरे से जुड़ी गर्भकालीन सूजन (gestational inflammation) के मॉलिक्यूलर सिग्नल्स (molecular signals) यानी आणविक संकेतों की पहचान की गई. ऑटिज्म दिमाग के विकास को प्रभावित करने वाली एक परिस्थिति है

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Signs Associated With the Risk of Autism : ऑटिज्म (Autism) या ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder) यानी एएसडी (ASD) एक दिमागी बीमारी है. ये एक ऐसी बीमारी है जो बच्चों को होती है. इसका पता लगा पाना काफी मुश्किल होता है. बच्चा जब तक 2 या 3 साल का नहीं हो जाता, ऑटिज्म के लक्षण (Symptoms) पता नहीं चलते हैं. बच्चों के व्यवहार, उनकी असामान्य प्रतिक्रिया और हाव-भाव से ही इस बीमारी (Disease) का पता चल सकता है. अगर आपका बच्चा अन्य बच्चों की तुलना में खामोश रहता है या फिर किसी भी बात पर प्रतिक्रिया देर से व्यक्त करता है, तो यह लक्षण ऑटिज्म की बीमारी के हो सकते हैं. कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Columbia University Mailman School of Public Health) और नार्वेजियन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (Norwegian National Institute of Public Health) के रिसर्चर्स द्वारा की गई एक व्यापक स्टडी में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर (autism spectrum disorder) के विकास के खतरे से जुड़ी गर्भकालीन सूजन (gestational inflammation) के मॉलिक्यूलर सिग्नल्स (molecular signals) यानी आणविक संकेतों की पहचान की गई. ऑटिज्म दिमाग के विकास को प्रभावित करने वाली एक परिस्थिति है.

ये स्टडी असामान्य ब्रेन डेवलपमेंट के बारे में अहम समझ प्रदान करती है और जन्म के समय ऑटिज्म (Autism) के परीक्षण के लिए रास्ता तैयार करती है. इस स्टडी के निष्कर्षों को मॉलिक्यूलर साइकियाट्री (Molecular Psychiatry) जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

स्टडी में क्या निकला
नई स्टडी के निष्कर्षों से ये पता चला कि भ्रूण अगर सूजन के संपर्क में आ जाता है, तो ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है. पूर्व में हुए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने ऑटिज्म के खतरे को प्रेग्नेंसी के दौरान मां को हुए बुखार, इन्फ्लूएंजा संक्रमण (influenza infection) या हरपेसवायरस टाइप-2 संक्रमण (herpesvirus type 2 infection) से जोड़ा था.

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इस नई स्टडी से जुड़े रिसर्चर्स ने इम्यून रिस्पॉन्स (immune response) यानी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़े 60 आणविक संकेतों (molecular signals) का विश्लेषण किया. प्रेग्नेंसी में माताओं के व डिलिवरी के बाद 957 शिशुओं के खून के नमूने लिए गए. बाद में इनमें से आधे बच्चों में ऑटिज्म के खतरे का पता चला.

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क्या कहते हैं जानकार
इस स्टडी की को-राइटर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर (Columbia University Medical Center) में महामारी विज्ञान (Epidemiology) की एसोसिएट प्रोफेसर मैडी हॉर्निंग (Mady Hornig) ने कहा, ‘हमें प्रेग्नेंसी के बीच में माताओं के ब्लड सैंपल्स में और बच्चों की गर्भनाल रक्त (cord blood) में प्रतिरक्षा संकेत (immune signals) मिले, जो बाद में ऑटिज्म से पीड़ित थे.’

Tags: Child Care, Health, Health News, Lifestyle

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