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नाइट शिफ्ट के कारण डाइबिटीज से बचना चाहते हैं तो इन कामों को कीजिए

नाइट शिफ्ट के कारण डाइबिटीज से बचना चाहते हैं तो इन कामों को कीजिए

अध्ययन में पाया गया है कि शिफ्ट वर्क का प्रभाव सार्वजनिक हेल्थ से सीधा जुड़ा हुआ है.  (Image: Shutterstock)

अध्ययन में पाया गया है कि शिफ्ट वर्क का प्रभाव सार्वजनिक हेल्थ से सीधा जुड़ा हुआ है. (Image: Shutterstock)

Diabetes prevent from only daytime eating: नाइट शिफ्ट (Night Shift) में काम करने से कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है. अब एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग अगर सिर्फ दिन में खाना खाएं तो ब्लड शुगर (Blood Sugar) के स्तर को बढ़ने से रोका जा सकता है. अध्ययन  (Study) में दावा किया गया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाला व्यक्ति अगर दिन में ही खाना खा ले तो उसके खून में ग्लूकोज की मात्रा नहीं बढ़ेगी जिससे उसमें डायबिटीज का जोखिम भी बहुत कम रहेगा.

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    Diabetes prevent from only daytime eating: अगर आप नाइट शिफ्ट (Night Shift) में काम करते हैं तो आपके लिए यह काम की खबर है. दरअसल, एक नए  अध्ययन में यह दावा किया गया कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग अगर रात को खाना न खाएं तो उनमें डायबिटीज (Diabetes) का खतरा कम हो जाएगा. अध्ययन में दावा किया गया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाला व्यक्ति अगर दिन में ही खाना खा ले तो उसके खून में ग्लूकोज (Glucose) की मात्रा नहीं बढ़ेगी जिससे उनमें डायबिटीज का जोखिम भी बहुत कम रहेगा. यह अध्ययन साइंस एडवांस जर्नल (Science Advances Journal) में प्रकाशित हुआ है.

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    रात में काम करने वाले लोगों को डायबिटीज का जोखिम

    टाइम्सनाउ की खबर के मुताबिक शोध के लेखक ने कहा कि इस अध्ययन का मकसद रात में काम करने वाले लोगों के जीवन को सुलभ बनाना है. उन्होंने कहा कि रात में दुकानों में, होटलों में काम करने वाले लोग, ट्रक ड्राइवर, फायर वर्कर और कॉल सेंटर में काम करने वाले लोगों को डायबिटीज का जोखिम ज्यादा रहता है क्योंकि ये लोग रात की शिफ्ट में काम करते हैं और रात में खाना भी खाते हैं. गौरतलब है कि देर रात खाना खाने से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है जिससे डायबिटीज का जोखिम ज्यादा रहता है.

    शिफ्ट में काम का संबंध सार्वजनिक हेल्थ से

    नेशनल सेंटर फॉर स्लीप डिसॉर्डर रिसर्च (National Center on Sleep Disorders Research) की मरिस्का ब्राउन ने बताया कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का मेटाबोलिज्म प्रभावित होता है जिससे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं आती हैं. इस अध्ययन में पाया गया है कि शिफ्ट वर्क का प्रभाव सार्वजनिक हेल्थ से सीधा जुड़ा हुआ है. इस अध्ययन में शामिल लोगों को दो समूहों में बांट दिया गया. दोनों समूह रात की शिफ्ट में काम करते थे. नाइट शिफ्ट में काम करने वाले एक समूह को दिन में खाना दिया गया और रात में खाना नहीं दिया गया. जबकि दूसरे समूह के लोगों को रात में भी खाना दिया गया और दिन में भी दिया गया.

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    चौंकाने वाले नतीजे

    14 दिनों के बाद जब जब नतीजों का विश्लेषण किया गया तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए. अध्ययन में पाया गया जिन लोगों ने नाइट शिफ्ट में काम करते हुए दिन में भी खाना खाया और रात में भी खाया, उनमें ग्लूकोच का स्तर 6.4 गुना बढ़ गया जबकि सिर्फ दिन में खाने वाले व्यक्ति में ग्लूकोच का स्तर सामान्य ही रहा है. मरिस्का कहती हैं कि यह अध्ययन हालांकि बहुत छोटे पैमाने पर किया गया है लेकिन इसके परिणाम एकदम साफ है.

    Tags: Diabetes, Health, Lifestyle

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