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रात में सोते समय लाइट बंद रखने से दूर रहेगी डायबिटीज और दिल की बीमारियां- स्टडी

लाइट जलाकर सोने से दिल की धड़कनें दिन के लेवल जितनी बढ़ जाती है. (फोटो-canva.com)

लाइट जलाकर सोने से दिल की धड़कनें दिन के लेवल जितनी बढ़ जाती है. (फोटो-canva.com)

Sleeping with the lights off may protect your health: अमेरिका के इलिनोइस राज्य की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन (Feinberg School of Medicine - Northwestern University) के वैज्ञानिकों द्वारा की गई स्टडी के मुताबिक लाइट जलाकर कर सोने से दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, जो कि इंसानी जिंदगी के लिए काफी घातक साबित हो सकता है. रिसर्चर्स के अनुसार, लाइट जलाकर सोने से दिल की धड़कनें दिन के लेवल जितनी बढ़ जाती है और यही स्थिति शरीर में मौजूद इंसुलिन के साथ भी होती है. इस स्टडी का निष्कर्ष प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (Proceedings of the National Academy of Sciences) में प्रकाशित किया गया है.

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Sleeping with the lights off may protect your health : कहते हैं कि रात में लाइट बंद कर सोने से नींद जल्दी और अच्छी आती है. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो रात में लाइट जलाकर सोते हैं. अब एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि सोने के लिए बेड पर जाने से पहले सभी लाइटों को बंद कर देना और खिड़कियों पर पर्दे लगा देना आपकी सेहत की सुरक्षा करने मदद कर सकता है और अगर आप लाइट जलाकर सोते हैं तो ये आपको कई बीमारियां दे सकता है. अमेरिका के इलिनोइस राज्य की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन (Feinberg School of Medicine – Northwestern University) के साइंटिस्टों द्वारा की गई इस स्टडी के मुताबिक लाइट जलाकर कर सोने से दिल की बीमारी और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, जो कि इंसानी जिंदगी के लिए काफी घातक साबित हो सकता है.

रिसर्चर्स के अनुसार, लाइट जलाकर सोने से दिल की धड़कनें दिन के लेवल जितनी बढ़ जाती है. और यही स्थिति शरीर में मौजूद इंसुलिन के साथ भी होती है. इस स्टडी का निष्कर्ष प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (Proceedings of the National Academy of Sciences) में प्रकाशित  किया गया है. 20 वयस्कों पर की गई इस स्टडी में 10 लोग 100 लक्स (लाइट की तीव्रता) यानी मध्यम लाइट में रहे और दूसरे 10 लोग 3 लक्स (मंद रोशनी) तीव्रता वाली लाइट में रहे. दोनों के शरीर में बहुत अंतर पाया गया.

क्या कहते हैं जानकार
इस स्टडी के को-राइटर और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (Northwestern University) के फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन (Feinberg School of Medicine) में न्यूरोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ डेनिएला ग्रिमालड (Dr. Daniela Grimaldi) के अनुसार, जो लोग 100 लक्स लाइट की तीव्रता में सोए थे, उनके दिल की धड़कन उनकी तुलना में तेज थी जो 3 लक्स की रोशनी में सोए थे. क्योंकि हमारे दिमाग में मौजूद स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली (autonomic nervous system) रात को भी एक्टिव रहती है, जो हल्की सी भी आहट से तीव्र हो जाती है.

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जो लोग तेज रोशनी में सोए थे, उनका इंसुलिन 15 प्रतिशत तक बढ़ा, परंतु मंद रोशनी में सोए लोगों में 4 प्रतिशत तक इंसुलिन कम हो गई थी. मध्यम रोशनी (100 लक्स) में सोने वाले वयस्कों में हार्ट रेट तेज पाया गया.

तेज रोशनी को स्पष्ट करते हुए इस स्टडी की राइटर और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी (Northwestern University) के फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन (Feinberg School of Medicine) में स्लीप मेडिसिन की प्रमुख डॉ फाइलिस जी (Dr. Phyllis Zee) कहती हैं…

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‘…अगर आप किसी चीज को स्पष्टता से देख पा रहे हैं, तो संभवत: वहां तेज रोशनी है. 40% लोग बेड लैम्प और टीवी चलाकर सोते हैं, जो सेहत के लिए सही नहीं है. इसलिए लोगों को अपने कमरे में हल्की पीली लाइट जलाकर सोना चाहिए, क्योंकि इसकी रोशनी की तीव्रता दूसरी लाइट की तुलना में कम होती है. अच्छी सेहत के लिए 8 घंटे नींद जरूरी है.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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