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30 के बाद पुरुष अपनी डाइट में जरूर शामिल करें ये चीजें, नहीं होगी ताकत की कमी

30 के बाद पुरुष अपनी डाइट में जरूर शामिल करें ये चीजें, नहीं होगी ताकत की कमी

30 के बाद जरूरी है कि कुछ प्लांट बेस्ड फूड का सेवन किया जाए. (Image: Shutterstock)

30 के बाद जरूरी है कि कुछ प्लांट बेस्ड फूड का सेवन किया जाए. (Image: Shutterstock)

Diet plan after 30: शरीर हमेशा जवान नहीं रहता. एक समय आता है जब शरीर की हर प्रक्रिया स्लो होने लगती है. इसके बाद पाचन तंत्र, ब्लड सर्कलेशन, स्किन आदि पर प्रभाव दिखने लगता है. इस स्थिति में मेटाबोलिज्म को मैंटेन रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इन सब स्थितियों में क्रोनिक डिजीज होने का जोखिम बढ़ जाता है. इसलिए 30 के बाद जरूरी है कि कुछ प्लांट बेस्ड फूड का सेवन किया जाए ताकि उम्र के कारण जो प्रभाव बॉडी पर पड़ता है, उसका असर कम दिखे.

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    Diet plan after 30: शरीर हमेशा एक जैसा ताकतवर नहीं रहता है. 30 साल के बाद शरीर का फंक्शन धीरे-धीरे स्लो होने लगता है. इसके बाद पाचन तंत्र, ब्लड सर्कुलेशन, स्किन आदि पर प्रभाव दिखने लगता है. इस स्थिति में मेटाबोलिज्म को मैंटेन रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. इन सब स्थितियों में क्रोनिक डिजीज होने का जोखिम भी बढ़ जाता है. फिर हमारे लिए बॉडी को हेल्दी रखने का क्या तरीका है. दरअसल, डाइट ही वह चीज है जिसकी वजह से हमारा अस्तित्व है.

    अगर हम अपनी डाइट में सही चीजों का इस्तेमाल करें तो लंबी आयु तक हेल्दी भी रह सकते हैं और जिंदा भी रह सकते हैं. 30 के बाद जरूरी है कि कुछ प्लांट बेस्ड फूड का सेवन किया जाए ताकि उम्र के कारण जो प्रभाव बॉडी पर पड़ता है, उसका असर कम दिखे. यहां हम ऐसे ही कुछ फूड के बारे में बता रहे हैं.

    30 के बाद इन चीजों को करें डाइट में शामिल

    अश्वगंधा
    अश्वगंधा कमाल का मेडिसीनल प्लांट है. 30 के बाद इसके पाउडर का सेवन नियमित रूप से जरूर करना चाहिए. इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स (antioxidant ) होते हैं जो शरीर में फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है. 30 के बाद पुरुषों में टेस्टेस्टोरोन के स्तर में जो कमी होता है, अश्वगंधा इस स्तर को सुधारता है.

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    ब्लू बेरी
    ब्लू बेरी में कई चीजें आती है. अपने देश में जामुन और स्ट्राबेरी ब्लू बेरी प्रजाति का ही फ्रूट है. माना जाता है कि ब्लू बेरी में अन्य फ्रूट्स की तुलना में सबसे ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं. यह शरीर में फैट को स्टोर नहीं होने देता. इसके अलावा यह पुरुषों में टेस्टेस्टोरोन लेवल को भी बढ़ाता है. यह डाइबिटीज पेशेंट के लिए भी गुणकारी है और हार्ट डिजीज के जोखिम को भी कम करता है.

    फ्लेक्स सीड या अलसी के बीज
    अलसी के बीज में प्रचूर मात्रा में लिग्नेंस (Lignans) पाया जाता है. लिग्नेंस एक प्रकार का पॉलीफिनॉल है जो प्लांट में ही पाया जाता है. अलसी के बीज में फाइटोएस्ट्रोजन (phytoestrogens) भी पाया जाता है जो महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन को बढ़ाता है. इसमें विटामिन ई, के, बी1, बी3, बी5, बी6, बी9 और कई अन्य मिनिरल्स पाए जाते हैं जो पुरुषों में स्टैमिना को बढ़ाते हैं.

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    मिल्क थिसल
    मिल्क थिसल एक प्लांट है जिसे लिवर के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. मिल्क थिसल के बीज को खाया जाता है. हालांकि इस प्लांट के अन्य भाग को भी कई तरह की बीमारियों में इलाज किया जाता है. मिल्क थिसल लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले टॉक्सिन का अवशोषण कर लेता है और लिवर को सुरक्षा प्रदान करता है. यह लिवर को क्षति होने से भी बचाता है.

    गिंको बिलोबा (GINKGO BILOBA)
    गिंको बिलोबा पेड़ आमतौर पर चीन में पाया जाता है. भारत के हिमालय पर्वतों पर भी यह पेड़ पाया जाता है. इसे मेदेनहेयर ट्री (Maidenhair tree) भी कहा जाता है. माना जाता है कि यह पृथ्वी पर सबसे पहले उगने वाले पेड़ों में से एक है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड फ्लो को बढ़ता है. इसमें मौजूद फ्लेवोनॉएड (flavonoids) मेमोरी बढ़ाने के लिए जाना जाता है.

    Tags: Health, Lifestyle

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