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बच्चों के लिए खेलना है जरूरी, कॉन्संट्रेशन और लाइफ क्वालिटी होती है बेहतर- स्टडी

स्टडी के अनुसार, खेलने वाले बच्चों की फिजिकल फिटनेस, एकाग्रता और हेल्थ से जुड़ी क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार हुआ. (फोटो-canva.cm)

स्टडी के अनुसार, खेलने वाले बच्चों की फिजिकल फिटनेस, एकाग्रता और हेल्थ से जुड़ी क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार हुआ. (फोटो-canva.cm)

टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख के रिसर्चर्स की एक नई स्टडी में बताया गया है कि स्पोर्ट्स एक्टिविटी से प्राइमरी स्कूलों के बच्चों में एकाग्रता में सुधार होने साथ ही उनका स्टैंडर्ड ऑफ लाइफ भी बेहतर होता है.

बचपन में शारीरिक श्रम वाले खेलों के कई फायदे बताए जाते रहे हैं. इससे शारीरिक तंदुरुस्ती की बात तो कही ही जाती रही है, लेकिन उसके अन्य फायदे भी सामने आ रहे हैं. इस संबंध में जर्मनी की टीयूएम यानी टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (Technical University of Munich) के रिसर्चर्स की एक नई स्टडी में बताया गया है कि स्पोर्ट्स एक्टिविटी से प्राइमरी स्कूलों के बच्चों में एकाग्रता (concentration) में सुधार होने साथ ही उनका स्टैंडर्ड ऑफ लाइफ भी बेहतर होता है. इस स्टडी का निष्कर्ष जर्नल ऑफ क्लीनिकल मेडिसिन (Journal of Clinical Medicine) में प्रकाशित हुआ है.

इस स्टडी में जर्मनी के बवेरिया के बेर्चटेस्गेडेनर लैंड डिस्ट्रिक्ट (Bavaria’s Berchtesgadener Land District) के 3285 लड़कियों और 3248 लड़कों को शामिल गया. इसमें शारीरिक बल, सहनशक्ति और स्वास्थ्य संबंधी जीवन स्तर का आकलन अंतरराष्ट्रीय मानक जांच प्रक्रियाओं के आधार पर किया गया.

स्टडी में क्या निकला
स्टडी के निष्कर्ष में दिखा कि खेलने वाले बच्चों की फिजिकल फिटनेस (physical fitness), एकाग्रता (concentration) औऱ हेल्थ से जुड़ी क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार हुआ. लड़के और लड़कियों में एक उल्लेखनीय अंतर ये देखने को मिला कि फिटनेस टेस्ट में लड़कों का प्रदर्शन अच्छा रहा, जबकि लड़कियों का प्रदर्शन एकाग्रता और जीवन मूल्य में बेहतर रहा.

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साथ ही, ज्यादा वजन वाले और मोटापे के शिकार बच्चों का प्रदर्शन सभी फिजिकल फिटनेस टेस्टों में कम वजन वाले और सामान्य वजन वाले बच्चों की तुलना में काफी खराब रहा. इतना ही नहीं, मोटापा ग्रस्त बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी जीवन स्तर, शारीरिक तंदुरुस्ती, आत्म सम्मान का सूचकांक उनके अपने स्कूल के साथियों की तुलना में भी खराब रहा.

क्या कहते हैं जानकार
टीयूएम चेयर ऑफ प्रिवेंटिव पीडियाट्रिक्स के प्रमुख व डीन ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ स्पोर्ट्स एंड हेल्थ साइंसेज के प्रोफेसर रेनैट मारिया ओबरहोफ़र-फ़्रिट्ज (Renate Maria Oberhoffer-Fritz) ने बताया कि प्राइमरी स्कूल के बच्चों में यदि अच्छी फिटनेस हो और एकाग्रचित (Concentrated) होने की अच्छी क्षमता हो, तो सेकेंडरी सकूल में भी उनका प्रदर्सन अच्छा रहने की बेहतर संभावना होती है.

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उन्होंने बताया कि इसका मतलब ये है कि छोटी उम्र में यदि बच्चों को मोटर डेवलपमेंट के लिए प्रोत्साहित किया जाए, तो उनके मानसिक विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसलिए बच्चों में व्यापक संभावनाओं को विकसित करने को पेरेंट्स, स्कूलों, समुदाय और एथेलेटिक क्लबों के बीच सहयोग और समन्वय बढ़ाया जाना चाहिए.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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